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बारिश के बाद बदल गया मौसम का मिजाज
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मथुरा। जनपद में बुधवार को सुबह अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। बादल छाने लगे और फिर बूंदाबांदी शुरू हो गई। इसके बाद चली सर्द हवाओं ने लोगों को तेज ठंडक का अहसास करा दिया। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। पारा सामान्य से काफी नीचे आ गया। ऐसे में लोगों ने रिमझिम के चलते बढ़ी ठंडक के बीच घरों में ही रहना उचित समझा।
सुबह आसमान में काले बादल छा गए। यमुना एक्सप्रेसवे और यमुना के किनारे के क्षेत्रों में कोहरे की हल्की धुंध छा गई। दिन निकलने के साथ ही अचानक रिमझिम बरसात शुरू हो गई। सूरज के नहीं दिखने और रिमझिम बरसात से मौसम में ठंडक बढ़ गई। ठंडी हवाओं ने सर्दी का लोगों को अहसास कराया, जिससे खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। इस स्थिति के चलते सड़कों पर सन्नाटा रहा।
मंदिरों में भी अन्य दिनों की भांति भक्तों की भीड़ काफी कम दिखाई दे रही है। बुधवार को मथुरा, वृंदावन, मांट, चौमुहां, बलदेव, राया, टैंटीगांव, गोवर्धन, सुरीर, टाउनशिप और नौहझील आदि क्षेत्रों में बरसात और तेज हवाओं से तापमान में भी एक बार फिर गिरावट आ गई। राया कृषि प्रशिक्षण केंद्र के अनुसार अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। बढ़ी सर्दी के चलते लोगों के हाथ पर सुन्न हो रहे हैं। सर्दी के चलते लोग घरों में कैद हो गए है।
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अलाव का लिया लोगों ने सहारा
ठंड से बचने के लिए लोग अलाव जलाकर शरीर तापते दिखाई दिए। वहीं, बारिश की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग अलाव के सहारे दिन बिताते दिखे। खासकर खुले आसमान के नीचे रहने वाले लोगों के लिए अलाव बड़ा सहारा बना।
सड़कों पर हो गई कीचड़
दिन भर की बूंदाबांदी के बाद सड़कों पर कीचड़ की समस्या बन गई है। जिससे लोगों को उन पर आवागमन करते समय परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी पैदल राह चलते लोगों को हुई। वाहनों से भी आसपास गुजरते लोगों के कपडे़ खराब हो गए।
डॉक्टरों ने दी बारिश से बचने की सलाह
चिकित्सकों ने बूंदाबांदी के इस मौसम से लोगों को बचने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों का कहना है कि यह मौसम लोगों को बीमार कर सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ठंड से बचना जरूरी है।
ठंड से जितना हो उनका बचना सेहत के लिए लाभदायक है। घर से बाहर कम निकलें और भीगने से बचें। कोविड नियमों का पालन करें।
- डॉ. मुकुंद बंसल, सीएमएस, जिला अस्पताल
बुधवार को बूंदाबांदी फसलों के लिए लाभदायक है। इससे किसी भी फसल को नुकसान नहीं होगा। खासकर गेहूं की फसल में यह बूंदाबांदी लाभदायक है। वर्तमान फसलों के लिए ठंड का होना जरूरी है।
अश्वनी कुमार सिंह जिला कृषि अधिकारी
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सुबह आसमान में काले बादल छा गए। यमुना एक्सप्रेसवे और यमुना के किनारे के क्षेत्रों में कोहरे की हल्की धुंध छा गई। दिन निकलने के साथ ही अचानक रिमझिम बरसात शुरू हो गई। सूरज के नहीं दिखने और रिमझिम बरसात से मौसम में ठंडक बढ़ गई। ठंडी हवाओं ने सर्दी का लोगों को अहसास कराया, जिससे खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। इस स्थिति के चलते सड़कों पर सन्नाटा रहा।
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मंदिरों में भी अन्य दिनों की भांति भक्तों की भीड़ काफी कम दिखाई दे रही है। बुधवार को मथुरा, वृंदावन, मांट, चौमुहां, बलदेव, राया, टैंटीगांव, गोवर्धन, सुरीर, टाउनशिप और नौहझील आदि क्षेत्रों में बरसात और तेज हवाओं से तापमान में भी एक बार फिर गिरावट आ गई। राया कृषि प्रशिक्षण केंद्र के अनुसार अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। बढ़ी सर्दी के चलते लोगों के हाथ पर सुन्न हो रहे हैं। सर्दी के चलते लोग घरों में कैद हो गए है।
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अलाव का लिया लोगों ने सहारा
ठंड से बचने के लिए लोग अलाव जलाकर शरीर तापते दिखाई दिए। वहीं, बारिश की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग अलाव के सहारे दिन बिताते दिखे। खासकर खुले आसमान के नीचे रहने वाले लोगों के लिए अलाव बड़ा सहारा बना।
सड़कों पर हो गई कीचड़
दिन भर की बूंदाबांदी के बाद सड़कों पर कीचड़ की समस्या बन गई है। जिससे लोगों को उन पर आवागमन करते समय परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी पैदल राह चलते लोगों को हुई। वाहनों से भी आसपास गुजरते लोगों के कपडे़ खराब हो गए।
डॉक्टरों ने दी बारिश से बचने की सलाह
चिकित्सकों ने बूंदाबांदी के इस मौसम से लोगों को बचने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों का कहना है कि यह मौसम लोगों को बीमार कर सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ठंड से बचना जरूरी है।
ठंड से जितना हो उनका बचना सेहत के लिए लाभदायक है। घर से बाहर कम निकलें और भीगने से बचें। कोविड नियमों का पालन करें।
- डॉ. मुकुंद बंसल, सीएमएस, जिला अस्पताल
बुधवार को बूंदाबांदी फसलों के लिए लाभदायक है। इससे किसी भी फसल को नुकसान नहीं होगा। खासकर गेहूं की फसल में यह बूंदाबांदी लाभदायक है। वर्तमान फसलों के लिए ठंड का होना जरूरी है।
अश्वनी कुमार सिंह जिला कृषि अधिकारी