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Mathura News: संकट में पड़ा 800 से अधिक वक्फ संपत्तियों का अस्तित्व
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मथुरा। संशोधित वक्फ कानून के तहत प्रत्येक वक्फ संपत्ति का 5 दिसंबर तक उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है। अप्रैल से शुरू हुई पंजीकरण प्रक्रिया में अभी तक महज 100 वक्फ संपत्तियों का ही पंजीकरण हो सका है, जो सिर्फ 10 प्रतिशत है। ऐसे में निर्धारित तिथि तक बाकी संपत्तियों का पंजीकरण कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ में मथुरा की कुल 920 वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हैं। इसका औसत पंजीकरण रोजाना तीन से चार वक्फ संपत्ति है। अब अंतिम तिथि में सिर्फ एक पखवाड़ा बचा है, ऐसे में पंजीकरण की यही गति रही तो जिले की शेष 820 संपत्तियों का पंजीकरण कराना बेहद मुश्किल होगा। पंजीकरण न होने पर उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। नियमानुसार उम्मीद पोर्टल पर जिस वक्फ संपत्ति का पंजीकरण नहीं कराया जाएगा, उसका वक्फ दर्जा समाप्त हो सकता है या फिर मुतवल्लियों (सचिव) को इसके लिए वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती देनी होगी। हालांकि पंजीकरण में मुतवल्लियों की सहायता के लिए अल्पसंख्यक बोर्ड की ओर से जनपद में चार कोऑर्डिनेटर नामित किए गए हैं, जो संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज कराने में सहायता कर रहे हैं। इसके अलावा दिक्कत होने पर मुतवल्ली जिला अल्पसंख्यक कार्यालय पहुंचकर संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत करा सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना कि लोगों में जागरूकता की कमी के कारण पंजीकरण में देरी हो रही है।
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मुतवल्लियों से संपर्क कर लगातार ज्यादा से ज्यादा संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सभी समय से पहले कार्य पूरा कर लें। निर्धारित प्रक्रिया के बाद लोगों को कठिनाई का सामना करना पड सकता है। जिले में 920 वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें अभी करीब 820 का उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण होना है।
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-नीलमा सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को पंजीकृत कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बेवसाइट के कारण भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया गया है, साथ ही ग्रुपों के माध्यम से जानकारी साझा कर रहे हैं।
-शबनम कुरैशी, जिला कोऑर्डिनेटर
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उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ में मथुरा की कुल 920 वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हैं। इसका औसत पंजीकरण रोजाना तीन से चार वक्फ संपत्ति है। अब अंतिम तिथि में सिर्फ एक पखवाड़ा बचा है, ऐसे में पंजीकरण की यही गति रही तो जिले की शेष 820 संपत्तियों का पंजीकरण कराना बेहद मुश्किल होगा। पंजीकरण न होने पर उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। नियमानुसार उम्मीद पोर्टल पर जिस वक्फ संपत्ति का पंजीकरण नहीं कराया जाएगा, उसका वक्फ दर्जा समाप्त हो सकता है या फिर मुतवल्लियों (सचिव) को इसके लिए वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती देनी होगी। हालांकि पंजीकरण में मुतवल्लियों की सहायता के लिए अल्पसंख्यक बोर्ड की ओर से जनपद में चार कोऑर्डिनेटर नामित किए गए हैं, जो संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज कराने में सहायता कर रहे हैं। इसके अलावा दिक्कत होने पर मुतवल्ली जिला अल्पसंख्यक कार्यालय पहुंचकर संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत करा सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना कि लोगों में जागरूकता की कमी के कारण पंजीकरण में देरी हो रही है।
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मुतवल्लियों से संपर्क कर लगातार ज्यादा से ज्यादा संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सभी समय से पहले कार्य पूरा कर लें। निर्धारित प्रक्रिया के बाद लोगों को कठिनाई का सामना करना पड सकता है। जिले में 920 वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें अभी करीब 820 का उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण होना है।
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-नीलमा सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को पंजीकृत कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बेवसाइट के कारण भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया गया है, साथ ही ग्रुपों के माध्यम से जानकारी साझा कर रहे हैं।
-शबनम कुरैशी, जिला कोऑर्डिनेटर