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पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में १२.५५ लाख का गबन, खलबली
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मथुरा। एक साल पहले सेवानिवृत्त हुए क्लीनर के नाम पर पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में एक बार फिर 12.६5 लाख रुपये के ट्रेजरी से भुगतान ने खलबली मचा दी है। इस भुगतान की संपूर्ण प्रक्रिया सिर्फ एक दिन में पूरी की गई। इसमें लिपिक से लेकर एक्सईएन तक की संपूर्ण औपचारिकताएं शामिल हैं। इसके लिए भी वह दिन चुना गया जब जीपीएफ सहित भुगतान संबंधित दो पटलों के प्रभारी अवकाश पर थे। उनका दायित्व अन्य लिपिक को देते हुए सेवानिवृत्त क्लीनर के नाम पर विभागीय लिपिक ने अपने रिश्तेदार के बैंक एकाउंट में ट्रेजरी से भुगतान करा दिया।
दरअसल, पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में क्लीनर दयाशंकर पिछले साल सेवानिवृत्त हुए थे। विभागीय प्रक्रिया के तहत उन्होंने जीपीएफ सहित विभिन्न देयकों के भुगतान प्राप्त किए। उनके सेवानिवृत्त होने के एक करीब साल बाद एक बार फिर दयाशंकर के नाम पर ही जीपीएफ भुगतान के बिल ट्रेजरी के लिए तैयार किए गए। इस पुन: भुगतान के लिए संपूर्ण विभागीय प्रक्रिया पूरी की गई। ट्रेजरी को भेजे गए इस बिल में दयाशंकर के नाम के साथ बैंक एकाउंट बदल दिया गया।
ट्रेजरी ने भी बगैर किसी आपत्ति के दयाशंकर के नाम पर जीपीएफ की 12.६5 लाख रुपये की राशि अन्य के बैंक एकाउंट में जारी कर दी। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में इस बिल के तैयार करने के दिन डीडीओ लिपिक रमेशचंद्र अवकाश पर थे। जब वह लौटकर आए तो ट्रेजरी की इस डिटेल को लेकर उनका माथा ठनका और उन्होंने एकाउंटेंट केआर मीणा से दयाशंकर के नाम पर दोबारा जीपीएफ का भुगतान होने पर आपत्ति व्यक्त की।
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मामला खुलते ही विभाग में खलबली मच गई। इस फर्जीवाडे़ में शामिल लोगों ने आनन फानन में उस धनराशि को एक बार फिर ट्रेजरी को वापस करावा दिया। 13 अक्तूबर को यह राशि वापस की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में पटल सहायक से लेकर एक्सईएन तक सवालों के घेरे में हैं। अब इस मामले को रफादफा करने के लिए रविवार के सार्वजनिक अवकाश में भी पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड कार्यालय में गतिविधियां चलती रहीं। अनेक लिपिक और अधिकारी भी कार्यालय पहुंचे।
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दरअसल, पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में क्लीनर दयाशंकर पिछले साल सेवानिवृत्त हुए थे। विभागीय प्रक्रिया के तहत उन्होंने जीपीएफ सहित विभिन्न देयकों के भुगतान प्राप्त किए। उनके सेवानिवृत्त होने के एक करीब साल बाद एक बार फिर दयाशंकर के नाम पर ही जीपीएफ भुगतान के बिल ट्रेजरी के लिए तैयार किए गए। इस पुन: भुगतान के लिए संपूर्ण विभागीय प्रक्रिया पूरी की गई। ट्रेजरी को भेजे गए इस बिल में दयाशंकर के नाम के साथ बैंक एकाउंट बदल दिया गया।
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ट्रेजरी ने भी बगैर किसी आपत्ति के दयाशंकर के नाम पर जीपीएफ की 12.६5 लाख रुपये की राशि अन्य के बैंक एकाउंट में जारी कर दी। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में इस बिल के तैयार करने के दिन डीडीओ लिपिक रमेशचंद्र अवकाश पर थे। जब वह लौटकर आए तो ट्रेजरी की इस डिटेल को लेकर उनका माथा ठनका और उन्होंने एकाउंटेंट केआर मीणा से दयाशंकर के नाम पर दोबारा जीपीएफ का भुगतान होने पर आपत्ति व्यक्त की।
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मामला खुलते ही विभाग में खलबली मच गई। इस फर्जीवाडे़ में शामिल लोगों ने आनन फानन में उस धनराशि को एक बार फिर ट्रेजरी को वापस करावा दिया। 13 अक्तूबर को यह राशि वापस की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में पटल सहायक से लेकर एक्सईएन तक सवालों के घेरे में हैं। अब इस मामले को रफादफा करने के लिए रविवार के सार्वजनिक अवकाश में भी पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड कार्यालय में गतिविधियां चलती रहीं। अनेक लिपिक और अधिकारी भी कार्यालय पहुंचे।