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खुल गए ठाकुर जी के द्वार, दर्शनकर भक्त हुए निहाल
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वृंदावन। आखिरकार करीब एक माह के बाद श्री बांकेबिहारी के द्वार आम भक्तों के लिए खोल दिए गए। भक्तों ने भी पट खुलते ही आपने आराध्य का दीदार किया। इस मौके पर सजग मंदिर प्रबंधन ने कोविड के नियमों का खयाल रखते हुए भक्तों को मंदिर में भगवान के दर्शन की अनुमति दी।
कोविड की दूसरी लहर के अचानक तेजी से प्रभावी होने पर 29 अप्रैल को प्रदेश में लॉकडाउन घोषित कर दिया था। इसी के साथ श्रीबांके बिहारी सहित वृंदावन के सभी प्रमुख मंदिर आम भक्तों के लिए बंद कर दिए। मंगलवार को जैसे ही अनलॉक घोषित हुआ, सभी मंदिरों के पट आमभक्तों के लिए खोल दिए गए। श्री बांके बिहारी के दर्शन के लिए भक्त सुबह 8 बजे से पहले मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंच गए। सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया से सोशल डिस्टेंसिंग के साथ आम भक्तों को मंदिर में प्रवेश कराया गया। मंदिर के अंदर भी भक्तों को चलते रहने के लिए कहा गया।
भक्त अपने आराध्य को निहारते फिर मंदिर से बाहर निकल जाते। यह प्रक्रिया अनवरत चलती रही। हालांकि एक माह बाद मंदिर खुलने के बाद भी भीड़ नहीं थी। इसी तरह कोविड की निर्धारित व्यवस्थाओं के तहत प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर में भी भक्तों को प्रवेश दिया। भक्तों ने भी इत्मीनान के साथ ठाकुर जी के दर्शन किये।
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कोविड की दूसरी लहर के अचानक तेजी से प्रभावी होने पर 29 अप्रैल को प्रदेश में लॉकडाउन घोषित कर दिया था। इसी के साथ श्रीबांके बिहारी सहित वृंदावन के सभी प्रमुख मंदिर आम भक्तों के लिए बंद कर दिए। मंगलवार को जैसे ही अनलॉक घोषित हुआ, सभी मंदिरों के पट आमभक्तों के लिए खोल दिए गए। श्री बांके बिहारी के दर्शन के लिए भक्त सुबह 8 बजे से पहले मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंच गए। सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया से सोशल डिस्टेंसिंग के साथ आम भक्तों को मंदिर में प्रवेश कराया गया। मंदिर के अंदर भी भक्तों को चलते रहने के लिए कहा गया।
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भक्त अपने आराध्य को निहारते फिर मंदिर से बाहर निकल जाते। यह प्रक्रिया अनवरत चलती रही। हालांकि एक माह बाद मंदिर खुलने के बाद भी भीड़ नहीं थी। इसी तरह कोविड की निर्धारित व्यवस्थाओं के तहत प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर में भी भक्तों को प्रवेश दिया। भक्तों ने भी इत्मीनान के साथ ठाकुर जी के दर्शन किये।
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