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Mathura News: हत्या के प्रयास में आरोपी को 4 मामलों में 37 साल की सजा
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मथुरा। हत्या के प्रयास के चार अलग-अलग मामलों में अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ अनुराग शर्मा ने बुधवार को दोषी गोविंद उर्फ गोविंदा को अलग-अलग 37 साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी चार मुकदमों में 20-20 हजार रुपये सहित कुल 80 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
कोसीकलां निवासी वसीम उर्फ अय्यूम ने एक अगस्त 2012 को गोवर्धन निवासी गोविंद उर्फ गोविंदा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि रात करीब आठ बजे गोविंदा ने उनके सात वर्षीय पुत्र को गोली मारकर घायल कर दिया। इसके बाद कोसीकलां के तांगड़ मोहल्ला निवासी गौरव शर्मा ने भी गोविंद के खिलाफ जान से मारने के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया।
नौ सितंबर 2014 को गौरव शर्मा ने गोविंद के खिलाफ एक अन्य मुकदमा दर्ज कराया। वहीं 28 अगस्त को श्याम सुंदर ने भी गोविंद के खिलाफ जान से मारने की नीयत से गोली चलाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ अनुराग शर्मा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को निर्दोष साबित करने के लिए दलीलें पेश कीं। वहीं अभियोजन की ओर से एडीजीसी क्राइम ने पुलिस रिपोर्ट, घायलों की चिकित्सकीय रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ पक्ष रखा।
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर गोविंद उर्फ गोविंदा को चारों मामलों में दोषी मानते हुए अलग-अलग सजा सुनाई। पहले मामले में आठ वर्ष चार माह, दूसरे में आठ वर्ष नौ माह, तीसरे में नौ वर्ष 10 माह और चौथे मामले में 10 वर्ष 15 दिन के कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ प्रत्येक मुकदमे में 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
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कोसीकलां निवासी वसीम उर्फ अय्यूम ने एक अगस्त 2012 को गोवर्धन निवासी गोविंद उर्फ गोविंदा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि रात करीब आठ बजे गोविंदा ने उनके सात वर्षीय पुत्र को गोली मारकर घायल कर दिया। इसके बाद कोसीकलां के तांगड़ मोहल्ला निवासी गौरव शर्मा ने भी गोविंद के खिलाफ जान से मारने के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया।
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नौ सितंबर 2014 को गौरव शर्मा ने गोविंद के खिलाफ एक अन्य मुकदमा दर्ज कराया। वहीं 28 अगस्त को श्याम सुंदर ने भी गोविंद के खिलाफ जान से मारने की नीयत से गोली चलाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ अनुराग शर्मा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को निर्दोष साबित करने के लिए दलीलें पेश कीं। वहीं अभियोजन की ओर से एडीजीसी क्राइम ने पुलिस रिपोर्ट, घायलों की चिकित्सकीय रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ पक्ष रखा।
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर गोविंद उर्फ गोविंदा को चारों मामलों में दोषी मानते हुए अलग-अलग सजा सुनाई। पहले मामले में आठ वर्ष चार माह, दूसरे में आठ वर्ष नौ माह, तीसरे में नौ वर्ष 10 माह और चौथे मामले में 10 वर्ष 15 दिन के कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ प्रत्येक मुकदमे में 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।