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Mathura News: बहुओं के मायके से नहीं मिल रही 2003 की मतदाता सूची
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कोसीकलां। मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) महिला मतदाताओं के लिए जी का जंजाल बन गया है। उन्हें अपने मायके से वोटर लिस्ट की जानकारी जुटानी पड़ रही है। फिर इसका मिलान करने में बीएलओ परेशान हो रहे हैं। उन्हें ऐसे वोटरों का मिलान करने में ज्यादा दिक्कत हो रही है, जिनके नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे।
ऐसे मतदाताओं का मिलान उनके दादा या दादी के नाम से करना पड़ रहा है। मतदाता सूची हिंदी में है और बीएलओ एप पर नाम सर्च करने के लिए अंग्रेजी भाषा में लिखा जा रहा है। इससे स्पेलिंग अलग हो जाने के कारण मिलान नहीं हो पा रहा। साथ ही एक ही नाम के कई वोटरों की लिस्ट खुलकर सामने आ जाती है। इसमें से सही वोट छांटने में काफी समय लग रहा है।
वहीं भाग संख्या 58 के बीएलओ राकेश शर्मा ने बताया कि एक बीएलओ को 1001 मतदाताओं का फार्म भरवाने की जिम्मेदारी दी गई है। सबसे अधिक दिक्कत घर की बहुओं का फार्म भरवाने में हो रही है। मतदाता बता रहे हैं कि बहुओं के मायके से 2003 की मतदाता सूची नहीं मिल रही है।
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बीएलओ अनुजा ने बताया कि फार्म भरवाने में ब्लड रिलेशन के तहत 2003 की मतदाता सूची में अंकित मतदाता क्रमांक लिखना पड़ता है। इसी क्रम में घर की बहुओं का भी उनके माता-पिता या दादा दादी के 2003 के मतदाता क्रमांक डिटेल भरना पड़ेगा। बीएलओ सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा अगर 2003 का मतदाता सूची में बड़े बुजुर्गों में से किसी का नाम नहीं है। ऐसे में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। बीएलओ प्रदीप कुमार ने बताया कि कुछ मतदाता फोटो, जानकारी देने से कतरा रहे हैं।
बार-बार बीएलओ एप में हो रहा संशोधन
बीएलओ एप में बार-बार हो रहे संशोधन से परेशान हैं। उन्हें रोजाना एप का नया वर्जन डाउनलोड करना पड़ रहा है। कुछ देर तो एप सही चलता है, लेकिन फिर इसकी स्पीड बहुत धीमी हो जाती है। एक-एक वोटर को वेरिफाई करने में बीएलओ को खूब पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। उधर, बार-बार अधिकारियों के फोन और ऑनलाइन फीडिंग की रिपोर्ट मांगी जा रही है।
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विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में लगे बीएलओ को निर्देश दिए हैं कि प्राप्त होने वाले गणना प्रपत्रों को जमा करते समय उनमें अंकित प्रविष्टियों को भली-भांति पढ़कर मिलान कर लें। इसके बाद गणना प्रपत्रों की फीडिंग कराई जाए।
सचिन पंवार, तहसीलदार, छाता
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ऐसे मतदाताओं का मिलान उनके दादा या दादी के नाम से करना पड़ रहा है। मतदाता सूची हिंदी में है और बीएलओ एप पर नाम सर्च करने के लिए अंग्रेजी भाषा में लिखा जा रहा है। इससे स्पेलिंग अलग हो जाने के कारण मिलान नहीं हो पा रहा। साथ ही एक ही नाम के कई वोटरों की लिस्ट खुलकर सामने आ जाती है। इसमें से सही वोट छांटने में काफी समय लग रहा है।
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वहीं भाग संख्या 58 के बीएलओ राकेश शर्मा ने बताया कि एक बीएलओ को 1001 मतदाताओं का फार्म भरवाने की जिम्मेदारी दी गई है। सबसे अधिक दिक्कत घर की बहुओं का फार्म भरवाने में हो रही है। मतदाता बता रहे हैं कि बहुओं के मायके से 2003 की मतदाता सूची नहीं मिल रही है।
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बीएलओ अनुजा ने बताया कि फार्म भरवाने में ब्लड रिलेशन के तहत 2003 की मतदाता सूची में अंकित मतदाता क्रमांक लिखना पड़ता है। इसी क्रम में घर की बहुओं का भी उनके माता-पिता या दादा दादी के 2003 के मतदाता क्रमांक डिटेल भरना पड़ेगा। बीएलओ सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा अगर 2003 का मतदाता सूची में बड़े बुजुर्गों में से किसी का नाम नहीं है। ऐसे में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। बीएलओ प्रदीप कुमार ने बताया कि कुछ मतदाता फोटो, जानकारी देने से कतरा रहे हैं।
बार-बार बीएलओ एप में हो रहा संशोधन
बीएलओ एप में बार-बार हो रहे संशोधन से परेशान हैं। उन्हें रोजाना एप का नया वर्जन डाउनलोड करना पड़ रहा है। कुछ देर तो एप सही चलता है, लेकिन फिर इसकी स्पीड बहुत धीमी हो जाती है। एक-एक वोटर को वेरिफाई करने में बीएलओ को खूब पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। उधर, बार-बार अधिकारियों के फोन और ऑनलाइन फीडिंग की रिपोर्ट मांगी जा रही है।
विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में लगे बीएलओ को निर्देश दिए हैं कि प्राप्त होने वाले गणना प्रपत्रों को जमा करते समय उनमें अंकित प्रविष्टियों को भली-भांति पढ़कर मिलान कर लें। इसके बाद गणना प्रपत्रों की फीडिंग कराई जाए।
सचिन पंवार, तहसीलदार, छाता