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14 मई की लोक अदालत में १.५ लाख वादों के निस्तारण का लक्ष्य
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मथुरा। १४ मई को होने वाली लोक अदालत में १.५ लाख वाद के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। लोक अदालत के प्रचार का हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग लोक अदालत में आएं और उन्हें न्याय मिल सके। यह संकल्प जिला जज राजीव भारती ने शनिवार को न्यायालय कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता मेें दोहराया।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत में निस्तारित वाद मेें दोनों पक्षों की जीत होती है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जनहित में लोक अदालत का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में १४ मई को किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किए जाने के लिए आवेदनपत्र देकर अंतिम आदेश और निर्णय प्राप्त कर सदैव के लिए लंबित मामले से छुटकारा पाएं।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनिका वर्मा ने बताया कि लंबित मामले यदि लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित होते हैं तो वादकारी को न्याय शुल्क वापस किया जाएगा। साथ ही लोक अदालत में हुए निर्णय के विरुद्घ कोई अपील भी नहीं की जा सकती है। राष्ट्रीय लोक अदालत में संदर्भित किए जाने योग्य छोटे-छोटे जितने भी मुकदमे हैं, उनका सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया जा सकता है।
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चाहे वह भरण-पोषण से संबंधित हों, चाहे वह मोटर दुर्घटना प्रतिकर के हों, सिविल प्रकृति के वाद हों, शमनीय अपराध के वाद हो, प्री. लिटिगेशन स्टेज पर बैंक ऋण, जल कर, गृह कर एवं अन्य छोटे-छोटे वादों का निस्तारण किया जा सकता है। उन्होंने वादकारियोें से लोक में अपने वादोें का निस्तारण कर लाभ उठाने को कहा।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालत में निस्तारित वाद मेें दोनों पक्षों की जीत होती है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जनहित में लोक अदालत का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में १४ मई को किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किए जाने के लिए आवेदनपत्र देकर अंतिम आदेश और निर्णय प्राप्त कर सदैव के लिए लंबित मामले से छुटकारा पाएं।
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सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनिका वर्मा ने बताया कि लंबित मामले यदि लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित होते हैं तो वादकारी को न्याय शुल्क वापस किया जाएगा। साथ ही लोक अदालत में हुए निर्णय के विरुद्घ कोई अपील भी नहीं की जा सकती है। राष्ट्रीय लोक अदालत में संदर्भित किए जाने योग्य छोटे-छोटे जितने भी मुकदमे हैं, उनका सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया जा सकता है।
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चाहे वह भरण-पोषण से संबंधित हों, चाहे वह मोटर दुर्घटना प्रतिकर के हों, सिविल प्रकृति के वाद हों, शमनीय अपराध के वाद हो, प्री. लिटिगेशन स्टेज पर बैंक ऋण, जल कर, गृह कर एवं अन्य छोटे-छोटे वादों का निस्तारण किया जा सकता है। उन्होंने वादकारियोें से लोक में अपने वादोें का निस्तारण कर लाभ उठाने को कहा।