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Mathura News: सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सभी मांगों पर दिए हैं कठोर आदेश
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मथुरा। डालमिया फार्म हाउस मामले में सोमवार को एनजीटी कोर्ट ने दाखिल दो याचिकाओं पर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में सभी मांगों पर कठोर आदेश गए हैं। याचिकाओं पर किसी प्रकार का निर्णय लेने के लिए कुछ शेष नहीं रहने पर कोर्ट ने दोनों याचिकाओं का निस्तारित कर दिया है।
दरअसल, बीती साल सितंबर में डालमिया फार्म हाउस में लगे 454 पेड़ काटने के मामले में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी और वृंदावन के समाजसेवी मधुमंगल शुक्ल ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। साथ ही आगरा निवासी पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में याचिका दाखिल की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) से मामले की जांच कराई।
जांच के बाद सीईसी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने काटे गए पेड़ों के बदले 4.54 करोड़ रुपये जुर्माना जमा करने के साथ, काटे गए 454 पेड़ों के बीस गुना 9080 पेड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। साथ ही सीईसी की सभी सिफारिशों को लागू किया था। सोमवार को इसी मामले में दाखिल दो याचिकाओं पर एनजीटी कोर्ट में सुनवाई हुई।
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प्रतिवादी शिवशंकर अग्रवाल उर्फ शंकर सेठ की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी व राहुल कुमार ने कहा कि वादी नरेंद्र कुमार गोस्वामी तथ्य को गुमराह करते हैं। उनकी याचिका पर एनजीटी कोर्ट ने कहा कि जो भी मांग याचिकाओं में की गई हैं, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उन सभी को मान लिया है। उन पर कठोर आदेश भी जारी किया है। ऐसे में अब इन याचिकाओं पर किसी प्रकार का निर्णय लेने के लिए कुछ शेष नहीं है। वहीं याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने बताया कि एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पूर्व में सभी मांगों पर कठोर आदेश दिए जाने के कारण कहा है कि अब कोई विवाद शेष नहीं है, इसलिए याचिका निस्तारित कर दी गईं।
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दरअसल, बीती साल सितंबर में डालमिया फार्म हाउस में लगे 454 पेड़ काटने के मामले में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी और वृंदावन के समाजसेवी मधुमंगल शुक्ल ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। साथ ही आगरा निवासी पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में याचिका दाखिल की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) से मामले की जांच कराई।
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जांच के बाद सीईसी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने काटे गए पेड़ों के बदले 4.54 करोड़ रुपये जुर्माना जमा करने के साथ, काटे गए 454 पेड़ों के बीस गुना 9080 पेड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। साथ ही सीईसी की सभी सिफारिशों को लागू किया था। सोमवार को इसी मामले में दाखिल दो याचिकाओं पर एनजीटी कोर्ट में सुनवाई हुई।
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प्रतिवादी शिवशंकर अग्रवाल उर्फ शंकर सेठ की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी व राहुल कुमार ने कहा कि वादी नरेंद्र कुमार गोस्वामी तथ्य को गुमराह करते हैं। उनकी याचिका पर एनजीटी कोर्ट ने कहा कि जो भी मांग याचिकाओं में की गई हैं, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उन सभी को मान लिया है। उन पर कठोर आदेश भी जारी किया है। ऐसे में अब इन याचिकाओं पर किसी प्रकार का निर्णय लेने के लिए कुछ शेष नहीं है। वहीं याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने बताया कि एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पूर्व में सभी मांगों पर कठोर आदेश दिए जाने के कारण कहा है कि अब कोई विवाद शेष नहीं है, इसलिए याचिका निस्तारित कर दी गईं।