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यूक्रेन में छात्र : कहीं खुशी तो कहीं मायूसी का आलम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 08:10 PM IST
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Students in Ukraine: Somewhere there is happiness and somewhere there is sadness
मथुरा। युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे जनपद के मेडिकल छात्र परिवारों में कहीं खुशी है तो कहीं अभी भी मायूसी का आलम है। बृहस्पतिवार को दो और छात्र-छात्राओं की सकुशल घर वापसी हो गई। इससे छाता की गौरी और आनंदवन के सचिन के घर में खुशियों की बहार आ गई है, जबकि सौंख के मनीष छटीकरा के योगेश व राया के रितिक वर्मा सहित कई और छात्र-छात्राओं के घर पर मायूसी का आलम है। इनके परिजन अभी भी बच्चों की सकुशल घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
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यूक्रेन के टिन्नोपिल शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर सचिन बृहस्पतिवार का आनंदवन फेस वन पहुंच गए। पिता रंजीत सिंह और ताऊ डीएस कॉलेज राया के चेयरमैन ओमप्रकाश सिंह सहित परिवार का चेहरे पर खुशियां छा गई। सभी लोग झूम उठे। एसडीएम सदर ने घर पहुंचकर सचिन से जानकारी की। उन्होंने बताया कि वे शहर से २४ फरवरी को निकले थे, विपरीत परिस्थितियों से गुजरते हुए अब घर पहुंचे हैं। इस दौरान उन्हें ८० किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा।
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पहले वे अपने मित्रों के साथ पोलैंड पहुंचे, लेकिन यहां से घर वापसी न होने पर रोमानिया जाना पड़ा। सचिन ने बताया ठंड के साथ वहां बहुत खराब स्थितियों से छात्रों को गुजरना पड़ रहा है। इस मौके पर रालोद के प्रदेश उपाध्यक्ष कुंवर नरेंद्र सिंह ने सचिन और पिता रंजीत को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि जनपद के अन्य बच्चे भी जल्द सकुशल लौटेंगे।
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इसके अलावा छाता की रहने वाले सतीश की पुत्री गौरी का घर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। बेटी को देख परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं था। गौरी ने बताया कि पोल्तावा में मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रही थी। जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो वह काफी डर गई थी, लेकिन सरकार की मदद से उसे पोल्तावा से हंगरी और फिर वहां से बुडापेस्ट होते हुए भारत लाया गया है। इन देशों में भारत सरकार की व्यवस्थाएं बेहतर रही हैं। सुरक्षा के भी प्रबंध थे। गौरी की मां सरस्वती ने इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त किया है।
बात करते-करते छलक उठते हैं मनीष और दादी-मां के आंसू
सौंख/छटीकरा (मथुरा)। सौंख के छात्र मनीष के परिजन सूमी शहर की स्थिति को लेकर खासे चिंतित हैं। मनीष ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ अभी तक बंकर में रह रहे हैं। वतन वापसी के लिए उनके पास कोई संदेश नहीं आया है। हमले के इस माहौल में खाना भी अच्छा नहीं लग रहा है। किसी तरह दिन और रात गुजरते हैं। यहां से करीब 5 किमी दूरी पर सूमी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के ऊपर बम का धमाका हुआ है। इससे सभी दहशत में हैं। मनीष की दादी वीरो देवी, मां सीमा देवी ने बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात करते वक्त दोनों ओर से आंखों में आंसू झलक आते हैं।

छटीकरा का छात्र योगेश पचौरी अभी भी रोमानिया एयरपोर्ट के पास अरीना में अन्य छात्रों के साथ घर वापसी की बारी का इंतजार कर रहा है। योगेश ने परिजनों को बताया कि वे रोमानिया एयरपोर्ट पहुंच गए हैं। यहां खाने पीने का पर्याप्त प्रबंध है। सिर्फ घर वापसी का इंतजार किया जा रहा है। रोमानिया में केंद्रीय मंत्री ज्योतिराव सिंधिया भी रुके हुए हैं, जो भारतीय छात्रों की वतन वापसी की व्यवस्थाओं का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे परिजन को भरोसा है कि उनका बेटा जल्द घर आ जाएगा। राया के रितिक वर्मा यूक्रेन के डीनिप्रो शहर में फंसा है। छात्रावास में अन्य साथियों के साथ रह रहे रितिक ने बताया कि अब उनके पास तीन दिन का राशन बचा है। शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं।
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