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सपा नेता ने रचा था मंदिर की जमीन हथियाने का षड्यंत्र
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कोसीकलां (मथुरा)। गांव शाहपुर में श्री बिहारीजी महाराज सेवा ट्रस्ट की भूमि के दस्तावेजों में हेराफेरी कर मंदिर की जमीन पर मजार बनाने का षड्यंत्र तत्कालीन सपा नेता ने 15 वर्ष पूर्व रची थी। सपा नेता ने लेटरपैड पर ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर कराकर सपा सरकार से गांव के ईदगाह और कब्रिस्तान को कागजातों में दर्ज कराने की मांग हुई। इसका खुलासा 2019 में जब हुआ मुस्लिम पक्ष कब्जा करने पहुंचा। मंदिर की जमीन को खुर्दबुर्द करने की शुरुआत दो सितंबर 2004 को हुई थी।
मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड ग्राम पंचायत शाहपुर के अध्यक्ष भोला खां पठान ने अपने लेटरपैड पर तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गांव में बनी ईदगाह व खसरा नंबर 108 में बने कब्रिस्तान को कागजात में दर्ज कराने की मांग की। शासन से तब कार्रवाई को लिखा गया। पत्र में जिन ग्रामीणों के हस्ताक्षर किए गए थे, उनमें कई फर्जी हैं। खसरा 108 चकरोड था। शासन के पत्र पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की।
शिकायतकर्ता रामअवतार सिंह का कहना है कि दिसंबर 2004 में प्रशासन ने अपर वक्फ आयुक्त से सूचना मांगी थी कि ये संपत्ति वक्फ कार्यालय में पंजीकृत हैं कि नहीं तो उन्होंने इनके पंजीकृत होने की रिपोर्ट दी। जबकि वक्फ कार्यालय में संपत्तियां पंजीकृत नहीं थीं। उन्होंने भी दस्तावेजों में दर्ज कराने को आख्या भेज दी। दिसंबर में ही एडीएम प्रशासन ने इस आख्या पर एसडीएम छाता को संपत्तियां दर्ज करने को कहा। बस यहीं से खसरा 108 को 1081 कागजों में कर दिया गया।
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तब तहसीलदार ब्रज किशोर मौर्या, राजस्व निरीक्षक अमीचंद्र और लेखपाल सुलेमान थे। 15 साल तक पूरे मामले को दबाए रखा गया। 2019 में मुस्लिम पक्ष ने जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा तो मामले की जानकारी हुई। जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने बताया कि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि शीघ्र ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड ग्राम पंचायत शाहपुर के अध्यक्ष भोला खां पठान ने अपने लेटरपैड पर तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गांव में बनी ईदगाह व खसरा नंबर 108 में बने कब्रिस्तान को कागजात में दर्ज कराने की मांग की। शासन से तब कार्रवाई को लिखा गया। पत्र में जिन ग्रामीणों के हस्ताक्षर किए गए थे, उनमें कई फर्जी हैं। खसरा 108 चकरोड था। शासन के पत्र पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की।
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शिकायतकर्ता रामअवतार सिंह का कहना है कि दिसंबर 2004 में प्रशासन ने अपर वक्फ आयुक्त से सूचना मांगी थी कि ये संपत्ति वक्फ कार्यालय में पंजीकृत हैं कि नहीं तो उन्होंने इनके पंजीकृत होने की रिपोर्ट दी। जबकि वक्फ कार्यालय में संपत्तियां पंजीकृत नहीं थीं। उन्होंने भी दस्तावेजों में दर्ज कराने को आख्या भेज दी। दिसंबर में ही एडीएम प्रशासन ने इस आख्या पर एसडीएम छाता को संपत्तियां दर्ज करने को कहा। बस यहीं से खसरा 108 को 1081 कागजों में कर दिया गया।
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तब तहसीलदार ब्रज किशोर मौर्या, राजस्व निरीक्षक अमीचंद्र और लेखपाल सुलेमान थे। 15 साल तक पूरे मामले को दबाए रखा गया। 2019 में मुस्लिम पक्ष ने जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा तो मामले की जानकारी हुई। जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने बताया कि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि शीघ्र ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।