Mathura: कुसुम सरोवर के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों खर्च, फिर भी जल प्रदूषित, मर रहे जलचर, आचमन को मजबूर श्रद्धालु
मथुरा में कुसुम सरोवर के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। इशके बाद भी इसका जल प्रदूषित है। प्रदूषण की सीमा यह है कि पानी से दुर्गंध आ रही है। जलचर मर रहे हैं। फिर भी लोग इसी पानी से आचमन करने को मजबूर हैं। जिम्मेदार लोग इस बारे में जरा भी चिंतित नजर नहीं आ रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में राधाकुंड के पास पर्यटक स्थल कुसुम सरोवर केरल में पिछले एक सप्ताह से छोटे बड़े जलचर मर रहे हैं। पर्यटक स्थल कुसुम सरोवर के सौंदर्यीकरण पर राज्य सरकार द्वारा पिछले एक दशक में करोड़ों रुपया खर्च हो चुका है। कुसुम सरोवर के जल से उठती दुर्गंध आसपास रहने वाले साधु संतों के साथ गिरिराज परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। अधिकारियों पर जलचरों की मौत की कोई चिंता नहीं दिखाई दे रही है।
पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित है कुसुम सरोवर
बताते चलें कि, कुसुम सरोवर ऐतिहासिक धरोहर है। पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित है। कुसुम सरोवर में मछलियों का मरना पहली बार नहीं हुआ है। पिछले साल भी काफी संख्या में मछलियां मरी थी। कुसुम सरोवर में मछलियों के मरने की घटना को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उत्तम शर्मा ने बताया कुसुम सरोवर में पिछले एक सप्ताह से मछलियां मर रही है। लेकिन, अभी तक जिम्मेदारों ने कोई कदम नहीं उठाया।
जल में ऑक्सीजन की कमी से मरीं मछलियां
आगरा मंडल के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ राजीव कुमार त्रिवेदी ने कहा कि कुसुम सरोवर के जल में मछलियों का मरने का कारण जल में ऑक्सीजन की कमी होनी है। ऐसा पिछले वर्ष भी हुआ था। कुसुम सरोवर के जल में चूना डलवाया जाएगा। ताकि ऑक्सीजन का लेवल बढ़ सके। मछलियों की जान बचाई जा सके।
मत्स्य विभाग की टीम से कराई गई थी जांच
बताया कि दो वर्ष पहले मत्स्य विभाग की टीम बुलाई गई थी। उनके द्वारा बताया गया कि पानी में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण मछलियां मर रही हैं। कुसुम सरोवर के जल में चूना डलवाया जा रहा है। ताकि कुसुम सरोवर का जल साफ हो सकेगा। इससे ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ जाएगी।