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Mathura News: फर्जी डिजिटल भुगतान कर दुकानदार को लगाई 10 हजार की चपत
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कोसीकलां (मथुरा)। अगर आपकी दुकान से सामान खरीदने वाला आपको डिजिटल भुगतान कर उसका स्क्रीनशॉट दिखाए तो जरा सावधान हो जाइए। हो सकता है कि वह आपको चूना लगा रहा हो। ऐसा ही एक मामला सोमवार को मुख्य बाजार में सामने आया है। जहां कपड़ों की खरीदारी करने के बाद डिजिटल भुगतान के बहाने दुकानदार को 10 हजार रुपये का चूना लगा दिया। पीड़ित ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
रामनगर निवासी पंकज गोयल की मुख्य बाजार में रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाते हैं। सोमवार को उसकी दुकान पर पिता विनोद अग्रवाल बैठे थे। शाम करीब 4 बजे तीन युवक दुकान पर पहुंचे और करीब 10 हजार रुपये के कपड़े खरीद लिए। जिसके बाद उसने उसके क्यूआर कोड पर डिजिटल भुगतान करने की बात कहकर स्कैन किया और मोबाइल में स्क्रीनशॉट दिखाकर वहां से चला गया। बाद में जब दुकानदार ने खाते में भुगतान की जांच पड़ताल की तो वह हैरान रह गया। उसके खाते में कोई भुगतान नहीं आया था।
पीड़ित ने मामले की शिकायत थाने में की है। गत दिवस मुख्य बाजार में शाही दरवाजे के नीचे स्थित दीपक अग्रवाल की दुकान का ठगों ने क्यूआर कोड बदल दिया। दुकानदार ग्राहकों से क्यूआर कोड पर ही भुगतान कराता रहा। दो दिनों तक जब उसके खाते से संबंधित कोई भी भुगतान का मैसेज नहीं मिला तो उसने मामले की जांच की। तब उसे पता चला कि उसकी दुकान पर रखा क्यूआर कोड ही किसी अन्य व्यक्ति का है। दो दिनों में उसे करीब 5 हजार रुपये की चपत लग चुकी है।
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रामनगर निवासी पंकज गोयल की मुख्य बाजार में रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाते हैं। सोमवार को उसकी दुकान पर पिता विनोद अग्रवाल बैठे थे। शाम करीब 4 बजे तीन युवक दुकान पर पहुंचे और करीब 10 हजार रुपये के कपड़े खरीद लिए। जिसके बाद उसने उसके क्यूआर कोड पर डिजिटल भुगतान करने की बात कहकर स्कैन किया और मोबाइल में स्क्रीनशॉट दिखाकर वहां से चला गया। बाद में जब दुकानदार ने खाते में भुगतान की जांच पड़ताल की तो वह हैरान रह गया। उसके खाते में कोई भुगतान नहीं आया था।
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पीड़ित ने मामले की शिकायत थाने में की है। गत दिवस मुख्य बाजार में शाही दरवाजे के नीचे स्थित दीपक अग्रवाल की दुकान का ठगों ने क्यूआर कोड बदल दिया। दुकानदार ग्राहकों से क्यूआर कोड पर ही भुगतान कराता रहा। दो दिनों तक जब उसके खाते से संबंधित कोई भी भुगतान का मैसेज नहीं मिला तो उसने मामले की जांच की। तब उसे पता चला कि उसकी दुकान पर रखा क्यूआर कोड ही किसी अन्य व्यक्ति का है। दो दिनों में उसे करीब 5 हजार रुपये की चपत लग चुकी है।
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