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श्वेत वस्त्रों में विराजे ठाकुरजी की छवि ने मोहा

Mon, 26 Oct 2015 11:00 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन Updated Mon, 26 Oct 2015 11:00 PM IST
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sharad purnima utsav in banke bihari temple
एक ओर चंद्रमा की धवल चांदनी तो दूसरी ओर श्वेत वस्त्रों में शृंगार कर विराजे ठाकुरजी। शरद पूर्णिमा के अवसर पर यह दोहरा आनंद धर्मनगरी में आए श्रद्धालुओं के लिए खास रहा। सोमवार को विभिन्न मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे और सजावट भी सफेद कपड़ों से ही थी। ऐसे में हर ओर आराध्य के दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ता दिखाई दिया।
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ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को बांकेबिहारी महाराज सोने और चांदी के सिंहासन पर विराजे थे। इस दौरान मोर मुकुट, काछनी और वंशी धारण किए ठाकुरजी को देखने वाले जैसे उनमें ही समा गए। प्रभु की एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
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मंदिर प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं को शरद पूर्णिमा का अहसास कराने के लिए मंदिर की सजावट में सफेद पर्दों और सफेद रंग की ही विद्युत झालर का प्रयोग किया था। ऐसे में लग रहा था जैसे पूरे प्रांगण में चंद्रमा की धवल रोशनी छायी है। वहीं राधासनेह बिहारी मंदिर में भी शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया।
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यहां भी ठाकुर राधा सनेहबिहारी ने श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। दक्षिण शैली के रंगनाथ मंदिर में भी शरद महोत्सव मनाया गया। इससे पहले सुबह से ही वृंदावन में श्रद्धालुओं ने यमुना स्नान किया और अपनी कार्तिक नियम सेवा की शुरुआत की।

परिक्रमा मार्ग पर दिखी मानव शृंखला
शरद पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही संपूर्ण परिक्रमा मार्ग राधे-राधे और ठाकुर श्रीबांके बिहारी की जय-जयकार से गुंजायमान था। हजारों श्रद्धालुओं ने परिक्रमा दी।


शरदोत्सव आरंभ
बांकेबिहारी कालोनी स्थित कृपा विलास में शरदोत्सव शुरू हो गया है। ठाकुर गोपाल कृष्ण महाराज ट्रस्ट द्वारा स्वामी सत्यानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित महोत्सव में सुबह संगीत की स्वरलहरियों पर हरिनाम संकीर्तन हुआ। इसके बाद भूपेंद्र भाई पाण्ड्या ने रासपंचाध्यायी पर प्रवचन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरुप है। इसके बारह स्कंध उनकी देह के बारह अंग के समान हैं। दसवां स्कंध इस देह रुपी महापुराण का हृदय है। पांच अध्याय देह के पंच तत्व हैं, जिनमें गोपी गीत सबसे महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर स्वामी श्रवणानंद सरस्वती, ट्रस्ट की अध्यक्ष सविता गुप्ता, दीपक, नीरज, विजय आदि उपस्थित थे।
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