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सभी भाषाओं की स्रोत है संस्कृत
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वृंदावन। संस्कृत भारती द्वारा केशवधाम में आयोजित किए गए दस दिवसीय भाषा बोधन प्रशिक्षण वर्ग का सोमवार को समापन हो गया। मुख्य अतिथि भागवतचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की स्रोत है। आज संपूर्ण विश्व संस्कृत को ज्ञान विज्ञान की भाषा के रूप में स्वीकार कर रहा है। संस्कृत भाषा को जीवन की मुख्यधारा में शामिल कर अपनाने की आवश्यकता है। क्योंकि संस्कृत प्राचीनकाल से ही ज्ञान विज्ञान की भाषा रही है।
मुख्य वक्ता प्रांत संगठन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा इस वर्ग में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 50 छात्रों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वर्ग का यही उद्देश्य है कि सभी संस्कृत को अपनी दैनिक बोलचाल की भाषा में प्रयोग करें। आरएसएस के विभाग प्रचारक गोविंद ने कहा संस्कृत हमारी प्राचीन संस्कृति व सभ्यता का बोध कराती है। भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संस्कारों की आवश्यकता होती है, इस दृष्टि से संस्कृत का पठन-पाठन अति आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि भाजपा जिला महामंत्री सत्यपाल चौधरी ने कहा कि जब हम संस्कृत को जानेंगे तभी हमारी संस्कृति सुरक्षित रहेगी। कार्यक्रम में गौरव गौतम, न्यास अध्यक्ष ओमप्रकाश बंसल, न्यास सचिव गंगाधर अरोड़ा, रामदास चतुर्वेदी, महानगर अध्यक्ष आचार्य बृजेंद्र नागर, दुर्गा प्रसाद, डॉ. गोविंदास, मनीष त्रिपाठी, संजय, कृति कृष्णा, रविंद्र शर्मा, हरिश्चंद्र, सुधाकर द्विवेदी, हरस्वरूप आदि मौजूद थे।
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मुख्य वक्ता प्रांत संगठन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा इस वर्ग में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 50 छात्रों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वर्ग का यही उद्देश्य है कि सभी संस्कृत को अपनी दैनिक बोलचाल की भाषा में प्रयोग करें। आरएसएस के विभाग प्रचारक गोविंद ने कहा संस्कृत हमारी प्राचीन संस्कृति व सभ्यता का बोध कराती है। भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संस्कारों की आवश्यकता होती है, इस दृष्टि से संस्कृत का पठन-पाठन अति आवश्यक है।
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विशिष्ट अतिथि भाजपा जिला महामंत्री सत्यपाल चौधरी ने कहा कि जब हम संस्कृत को जानेंगे तभी हमारी संस्कृति सुरक्षित रहेगी। कार्यक्रम में गौरव गौतम, न्यास अध्यक्ष ओमप्रकाश बंसल, न्यास सचिव गंगाधर अरोड़ा, रामदास चतुर्वेदी, महानगर अध्यक्ष आचार्य बृजेंद्र नागर, दुर्गा प्रसाद, डॉ. गोविंदास, मनीष त्रिपाठी, संजय, कृति कृष्णा, रविंद्र शर्मा, हरिश्चंद्र, सुधाकर द्विवेदी, हरस्वरूप आदि मौजूद थे।
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