प्रहलाद नगरी का होलिका दहन: धधकते अंगारों से निकलने के लिए संजू पंडा ने शुरू की तपस्या, गांव की परिक्रमा की
संजू पंडा रविवार को एक माह की कठिन तपस्या पर बैठ गए। इससे पूर्व उन्होंने ग्रामीणों के साथ गांव की परिक्रमा की। इस दौरान ग्रामीणों ने गुलाल उड़ाकर समाज गायन किया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रहलाद नगरी फालैन में धधकते अंगारों से निकलने की तैयारी के लिए संजू पंडा रविवार को एक माह की कठिन तपस्या पर बैठ गए। इससे पूर्व उन्होंने ग्रामीणों के साथ गांव की परिक्रमा की। इस दौरान ग्रामीणों ने गुलाल उड़ाकर समाज गायन किया। पंडा ने होलिका दहन स्थल का पूजन कर साधना को सफल बनाने की कामना की।
होली पर धधकती होलिका से निकलने का करिश्मा करने के लिए संजू पंडा (41) एक माह की तपस्या पर बैठने के लिए सुबह ही मंदिर पर पहुंच गए। जैसे ही वे गांव की परिक्रमा के लिए निकले तो प्रह्लादजी के जयघोष से गांव फालैन गुंजायमान हो उठा। ग्रामीणों ने खूब गुलाल उड़ाया। पंडा को प्रहलादजी की माला सौंपकर दोबारा तप के नियम समझाए गए और इसके साथ ही वे एक माह की साधना पर बैठ गए। कठोर नियमों का पालन करते हुए एक माह तक वह घर नहीं जाएंगे। मंदिर पर रहकर और अन्न का त्याग कर तप करेंगे। उन्होंने बताया कि वह एक माह तक ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे। इसके बाद 3 मार्च को अलसुबह होलिका के धधकते अंगारों से होकर निकलेंगे।
पंडा को माना जाता है प्रहलाद का स्वरूप
धधकते अंगारों से निकलने वाले पंडा को प्रह्लादजी का स्वरूप माना जाता है। पूजा से पूर्व वह मंदिर में रखी प्राचीन प्रह्लादजी के नाम की माला को ग्रहण करते हैं। उसी से पूजा-अर्चना करते हैं। धधकती होलिका के अंगारों से सकुशल बच निकलने का कारनामा वे भक्ति के दम पर करते हैं।
पूर्णिमा के दिन घर परिवार को त्याग दिया और पूरे महीने ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। मंदिर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का सेवन तथा जमीन पर ही सोना होगा। इसके अलावा वे प्रहलाद कुंड में स्नान के बाद ध्यान लगाएंगे। तप के दौरान गांव की सीमा से बाहर नहीं जा सकेंगे और न ही किसी महिला या पुरुष श्रद्धालु को अपने पैर छूने देंगे।