{"_id":"68c9c116f83c546c9f0193ff","slug":"sanjhi-art-born-from-sadhana-is-the-pride-of-vrindavan-mathura-news-c-369-1-mt11010-136094-2025-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: साधना से जन्मी सांझी कला वृंदावन का गौरव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: साधना से जन्मी सांझी कला वृंदावन का गौरव
विज्ञापन
सांझी मेले में बच्चों को पुरस्कृत करते हुए अतिथिगण।
वृंदावन। जीएलए विश्वविद्यालय, द ब्रज फाउंडेशन एवं ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में वृंदावन स्थित प्राचीन ब्रह्मकुंड पर आयोजित त्रिदिवसीय सांझी मेले का समापन रंगोली प्रतियोगिता एवं कलाकारों के सम्मान समारोह के साथ हुआ।
मेले के अंतिम दिन रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और कलाकारों ने भाग लिया। निर्णायक की भूमिका प्राणवल्लभा दीदी ने निभाई। प्रतियोगिता के उपरांत सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
ब्रज फाउंडेशन के संस्थापक विनीत नारायण ने कहा कि ब्रह्मकुंड पर प्रारंभ किया गया यह सांझी मेला अब एक सांस्कृतिक परंपरा बन चुका है। कलाकारों और साधकों की तपस्या और वृंदावनवासियों के सहयोग से यह आयोजन अब उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा कि साधना से जन्मी सांझी कला आज वृंदावन का गौरव बन चुकी है। गोवर्धन नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन जगपाल चौधरी ने कहा कि ब्रज की प्राचीन सांझी कला का संरक्षण और विस्तार आवश्यक है।
विज्ञापन
जगदीश शर्मा गुरुजी ने सांझी कला की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल कला नहीं अपितु उपासना का माध्यम है। इस अवसर पर मंदिर श्रीधाम गोदा विहार पीठाधीश्वर शाश्वत आचार्य, सुरेश चंद्र शर्मा, अतुल श्रीवास्तव, राघव भारद्वाज, बंटू गौतम, यश सोनी, प्रीति चौहान आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
मेले के अंतिम दिन रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और कलाकारों ने भाग लिया। निर्णायक की भूमिका प्राणवल्लभा दीदी ने निभाई। प्रतियोगिता के उपरांत सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
विज्ञापन
ब्रज फाउंडेशन के संस्थापक विनीत नारायण ने कहा कि ब्रह्मकुंड पर प्रारंभ किया गया यह सांझी मेला अब एक सांस्कृतिक परंपरा बन चुका है। कलाकारों और साधकों की तपस्या और वृंदावनवासियों के सहयोग से यह आयोजन अब उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा कि साधना से जन्मी सांझी कला आज वृंदावन का गौरव बन चुकी है। गोवर्धन नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन जगपाल चौधरी ने कहा कि ब्रज की प्राचीन सांझी कला का संरक्षण और विस्तार आवश्यक है।
विज्ञापन
जगदीश शर्मा गुरुजी ने सांझी कला की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल कला नहीं अपितु उपासना का माध्यम है। इस अवसर पर मंदिर श्रीधाम गोदा विहार पीठाधीश्वर शाश्वत आचार्य, सुरेश चंद्र शर्मा, अतुल श्रीवास्तव, राघव भारद्वाज, बंटू गौतम, यश सोनी, प्रीति चौहान आदि मौजूद रहे। संवाद