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दो दिन में यमुना का जल स्तर कम होने की उम्मीद
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मथुरा। ओखला बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कमी आने के कारण दो दिन में यमुना का जलस्तर कम होने की उम्मीद है। उधर, मथुरा में जल स्तर की आंशिक बढ़ोतरी देखते हुए सिंचाई विभाग ने गोकुल बैराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा दिया है। इससे यमुना के जल स्तर में बढ़ोतरी थम गई है। उधर, नौहझील के कुछ गांवों को पानी ने घेर लिया। इससे फसल बर्बाद होने की स्थिति तक पहुंच गई है। यहां पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित चौकी बना दी है।
मंगलवार को प्रयाग घाट पर 165.07 मीटर था, जबकि सोमवार को यह 165.01 मीटर था। यमुना का चेतावनी स्तर 165.20 मीटर है। सोमवार से थोड़ा सा जल स्तर बढ़ा है। लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पानी के स्तर को कम करने के लिए गोकुल बैराज का डिस्चार्ज बढ़ा दिया। यहां से मंगलवार सुबह आठ बजे 47 हजार 849 क्यूसेक, शाम को 49 हजार 281 क्यूसेक पानी आगरा के लिए छोड़ा गया। इससे यमुना के जलस्तर की बढ़ोतरी कुछ हद तक सामान्य हो सकी।
सिंचाई विभाग के एई राकेश कुमार ने बताया कि सोमवार को ओखला से 46 हजार 400 क्यूसेक और मंगलवार को यह 28 हजार 700 क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया है। इसका असर मथुरा में दो दिन बाद दिखना शुरू हो जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि दो दिन में जनपद में भी जलस्तर कम हो जाएगा।
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किसानों की डूब गई फसल
नौहझील। क्षेत्र के अड्डा मीणा, फिरोजपुर, इनायतगढ़,पिथौरा, रायपुर, तिलकागढ़ी,मुसमुना, भैरई,नानकपुर,दौलतपुर, बसाऊ,देदना, मरहला मुक्खा आदि गांवों से होकर यमुना नदी से कालिंदी निकलती है। यमुना जल ने इन गांवों के किसानों की सब्जी व धान की फसल को घेर लिया है। किसान सत्तन चौधरी ने बताया कि उनकी 25 बीघा धान की फसल यमुना में बाढ़ आने से डूब गई है। किसान बच्चू सिंह ने बताया कि उनकी 15 बीघा धान की फसल डूब गई है। किसान सुरेश ने बताया कि 10 बीघा में सब्जी की फसल पूरी तरह डूब गयी है। किसान चन्द्रपाल,राकेश, वीरो,उदयभान, नानिक,पंचो,वीरपाल, कन्हैया, सुखबीर आदि किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। वहीं, एसडीएम रामदत्त राम ने बताया कि झाड़ी हनुमान मंदिर पर बाढ़ प्रभावित चौकी बनाने के निर्देश राजस्व विभाग को दिए हैं।
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मंगलवार को प्रयाग घाट पर 165.07 मीटर था, जबकि सोमवार को यह 165.01 मीटर था। यमुना का चेतावनी स्तर 165.20 मीटर है। सोमवार से थोड़ा सा जल स्तर बढ़ा है। लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पानी के स्तर को कम करने के लिए गोकुल बैराज का डिस्चार्ज बढ़ा दिया। यहां से मंगलवार सुबह आठ बजे 47 हजार 849 क्यूसेक, शाम को 49 हजार 281 क्यूसेक पानी आगरा के लिए छोड़ा गया। इससे यमुना के जलस्तर की बढ़ोतरी कुछ हद तक सामान्य हो सकी।
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सिंचाई विभाग के एई राकेश कुमार ने बताया कि सोमवार को ओखला से 46 हजार 400 क्यूसेक और मंगलवार को यह 28 हजार 700 क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया है। इसका असर मथुरा में दो दिन बाद दिखना शुरू हो जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि दो दिन में जनपद में भी जलस्तर कम हो जाएगा।
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किसानों की डूब गई फसल
नौहझील। क्षेत्र के अड्डा मीणा, फिरोजपुर, इनायतगढ़,पिथौरा, रायपुर, तिलकागढ़ी,मुसमुना, भैरई,नानकपुर,दौलतपुर, बसाऊ,देदना, मरहला मुक्खा आदि गांवों से होकर यमुना नदी से कालिंदी निकलती है। यमुना जल ने इन गांवों के किसानों की सब्जी व धान की फसल को घेर लिया है। किसान सत्तन चौधरी ने बताया कि उनकी 25 बीघा धान की फसल यमुना में बाढ़ आने से डूब गई है। किसान बच्चू सिंह ने बताया कि उनकी 15 बीघा धान की फसल डूब गई है। किसान सुरेश ने बताया कि 10 बीघा में सब्जी की फसल पूरी तरह डूब गयी है। किसान चन्द्रपाल,राकेश, वीरो,उदयभान, नानिक,पंचो,वीरपाल, कन्हैया, सुखबीर आदि किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। वहीं, एसडीएम रामदत्त राम ने बताया कि झाड़ी हनुमान मंदिर पर बाढ़ प्रभावित चौकी बनाने के निर्देश राजस्व विभाग को दिए हैं।