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सच्चे मुसलमान हैं, जान भी दे देंगे इंडिया के लिए
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Thu, 16 Feb 2017 11:42 PM IST
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श्ाािददिक के पिररिवािररिजन
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जोहरा, सायरा, शमीना, सद्दीक, सलाम, नाहिद, सुल्तान, आमिर और अशफाक की पैदाइश भले ही बर्मा की है लेकिन अब ये लोग भारत से जाने को तैयार नहीं। कहते हैं कि अब तो इसी देश में रहेंगे और यहीं मर जाएंगे। सच्चे मुसलमान हैं, जान भी दे देंगे इंडिया के लिए।
मथुरा के औरंगाबाद में रह रहे म्यांमार के नागरिक मोहम्मद सादिक की गिरफ्तारी से वह शरणार्थी बेचैन हैं जो मथुरा में वर्षों पहले आकर बसे हैं। इन लोगों का कहना है कि वह म्यांमार को भूल चुके हैं।
अब तो भारत का अन्न खा रहे हैं। इसी देश में उनके बच्चे बड़े हो रहे हैं। यहीं तालीम भी हासिल की है। अब तो हमारा देश यही है। अगर कोई उनसे जाने को कहेगा तो वह नहीं जा सकते। जबरदस्ती की जाएगी तो वह जान दे देंगे।
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जोहरा ने बताया कि अब हमारी सारी रिश्तेदारियां यहां हैं। शादियां यहां हो रही हैं। फिर बर्मा में हमारा क्या रह गया। सायरा का कहना है कि वह सच्चे मुसलमान हैं। इस देश में उन्हें आसरा मिला है। यही हमारा मुल्क है।
हम लोगों की नीयत पर शक न किया जाए। अशफाक का कहना है कि आए दिन पुलिस वाले उनसे पूछताछ करने लगते हैं। हम तो मजदूरी करके अपने परिवार का पालन कर रहे हैं। हम गलत इंसान नहीं है। भारत के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं।
औरंगाबाद में रहने वाले सादिक के परिवारीजनों का कहना है कि सादिक हज पर जाना चाहता है। इसलिए उसने पासपोर्ट बनवाया है। बाकी हम लोगों को कहीं नहीं जाना। अब पासपोर्ट में नाम गलत कैसे हो गया ये तो वही जानें लेकिन किसी की मंशा बुरी नहीं है।
यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि म्यांमार से आए मुसलमान दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ समेत कई शहरों में रह रहे हैं। वह सभी लोग रिफ्यूजी हैं। पुलिस का कहना है कि वह इन लोगों की जांच करते रहते हैं।
कूड़ा बीनकर गुजर बसर कर रहे हैं रिफ्यूजी। उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों में ये मिल जाएंगे। मथुरा में ही 80 परिवार पिछले दस साल से बसे हैं। सुबह को रिक्शा या ठेला लेकर निकल जाते हैं कूड़ा बीनने के लिए। कुछ डलाव घर पर पहुंचेंगे तो कुछ घर-घर जाकर लोहा या रद्दी खरीदते मिलेंगे।
मथुरा में म्यांमार के नागरिकों ने मेवाती, औरंगाबाद, आजमपुर, गोविंदनगर, पीलीपोखर, तैयापुर, टाउनशिप और रामलीला ग्राउंड के पास बरारी में ठिकाने बना रखे हैं। कुछ झोपड़ी में रह रहे हैं जबकि कुछ ने औरंगाबाद में अपने मकान बना लिए हैं।
इन सभी के पास (यूएनएचसीआर) यूनाइटेड नेशन हाई कमीशन ऑफ रिफ्यूजी का कार्ड भी है। इन लोगों को इतना समय यहां हो गया कि अब रिश्तेदारियां भी यहीं हो गईं हैं। बेटे-बेटियों की शादी भी यहीं कर रहे हैं।
इन परिवारों के लोग मजदूरी करते हैं। सुबह को कालोनियों में जाकर रद्दी खरीदना। डलाव घर से कूड़ा इकट्ठा करके बेचना इनका मुख्य कारोबार है। कूड़े की कीमत पर ही इनके घरों का चूल्हा जलता है। पुलिस ने बुधवार को औरंगाबाद से म्यांमार निवासी सादिक को गिरफ्तार करके जेल भेजा है।
सादिक ने जो पासपोर्ट बनवाया था वह पहचान बदलकर बनवाया था। जांच में खुलासा होने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। परिवार वालों का कहना है कि हज जाने के लिए पासपोर्ट बनवाया था।
म्यांमार का नागरिक मोहम्मद सादिक का पासपोर्ट 3 अप्रैल, 2016 को बना था। एसपी सिटी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सादिक ब्लैक लिस्टेड हो गया है। अब वह कहीं अपना पासपोर्ट नहीं बनवा सकेगा। हालांकि रिफ्यूजी को वैसे भी पासपोर्ट बनवाने का अधिकार नहीं है। उसका पासपोर्ट निरस्त करने के लिए भी पासपोर्ट कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी गई है।
म्यांमार के नागरिक सादिक का पासपोर्ट बन गया है। मामला खुलने पर अधिकारियों को सारे नियम-कानून याद आ रहे हैं। लेकिन यहां सवाल उठता है कि उसका पासपोर्ट बन कैसे गया। पासपोर्ट बनने से पहले पुलिस और एलआईयू जांच करती है।
अब फिर यह कैसी जांच थी। किसी ने उसके घर जाकर क्यों नहीं देखा। मोहल्ले वालों से जानकारी क्यों नहीं की गई। सादिक के पासपोर्ट में पुलिस और एलआईयू वाले भी फंस रहे हैं। अगर पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई गई तो इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
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मथुरा के औरंगाबाद में रह रहे म्यांमार के नागरिक मोहम्मद सादिक की गिरफ्तारी से वह शरणार्थी बेचैन हैं जो मथुरा में वर्षों पहले आकर बसे हैं। इन लोगों का कहना है कि वह म्यांमार को भूल चुके हैं।
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अब तो भारत का अन्न खा रहे हैं। इसी देश में उनके बच्चे बड़े हो रहे हैं। यहीं तालीम भी हासिल की है। अब तो हमारा देश यही है। अगर कोई उनसे जाने को कहेगा तो वह नहीं जा सकते। जबरदस्ती की जाएगी तो वह जान दे देंगे।
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जोहरा ने बताया कि अब हमारी सारी रिश्तेदारियां यहां हैं। शादियां यहां हो रही हैं। फिर बर्मा में हमारा क्या रह गया। सायरा का कहना है कि वह सच्चे मुसलमान हैं। इस देश में उन्हें आसरा मिला है। यही हमारा मुल्क है।
हम लोगों की नीयत पर शक न किया जाए। अशफाक का कहना है कि आए दिन पुलिस वाले उनसे पूछताछ करने लगते हैं। हम तो मजदूरी करके अपने परिवार का पालन कर रहे हैं। हम गलत इंसान नहीं है। भारत के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं।
औरंगाबाद में रहने वाले सादिक के परिवारीजनों का कहना है कि सादिक हज पर जाना चाहता है। इसलिए उसने पासपोर्ट बनवाया है। बाकी हम लोगों को कहीं नहीं जाना। अब पासपोर्ट में नाम गलत कैसे हो गया ये तो वही जानें लेकिन किसी की मंशा बुरी नहीं है।
यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि म्यांमार से आए मुसलमान दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ समेत कई शहरों में रह रहे हैं। वह सभी लोग रिफ्यूजी हैं। पुलिस का कहना है कि वह इन लोगों की जांच करते रहते हैं।
कूड़ा बीनकर गुजर बसर कर रहे हैं रिफ्यूजी। उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों में ये मिल जाएंगे। मथुरा में ही 80 परिवार पिछले दस साल से बसे हैं। सुबह को रिक्शा या ठेला लेकर निकल जाते हैं कूड़ा बीनने के लिए। कुछ डलाव घर पर पहुंचेंगे तो कुछ घर-घर जाकर लोहा या रद्दी खरीदते मिलेंगे।
मथुरा में म्यांमार के नागरिकों ने मेवाती, औरंगाबाद, आजमपुर, गोविंदनगर, पीलीपोखर, तैयापुर, टाउनशिप और रामलीला ग्राउंड के पास बरारी में ठिकाने बना रखे हैं। कुछ झोपड़ी में रह रहे हैं जबकि कुछ ने औरंगाबाद में अपने मकान बना लिए हैं।
इन सभी के पास (यूएनएचसीआर) यूनाइटेड नेशन हाई कमीशन ऑफ रिफ्यूजी का कार्ड भी है। इन लोगों को इतना समय यहां हो गया कि अब रिश्तेदारियां भी यहीं हो गईं हैं। बेटे-बेटियों की शादी भी यहीं कर रहे हैं।
इन परिवारों के लोग मजदूरी करते हैं। सुबह को कालोनियों में जाकर रद्दी खरीदना। डलाव घर से कूड़ा इकट्ठा करके बेचना इनका मुख्य कारोबार है। कूड़े की कीमत पर ही इनके घरों का चूल्हा जलता है। पुलिस ने बुधवार को औरंगाबाद से म्यांमार निवासी सादिक को गिरफ्तार करके जेल भेजा है।
सादिक ने जो पासपोर्ट बनवाया था वह पहचान बदलकर बनवाया था। जांच में खुलासा होने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। परिवार वालों का कहना है कि हज जाने के लिए पासपोर्ट बनवाया था।
म्यांमार का नागरिक मोहम्मद सादिक का पासपोर्ट 3 अप्रैल, 2016 को बना था। एसपी सिटी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सादिक ब्लैक लिस्टेड हो गया है। अब वह कहीं अपना पासपोर्ट नहीं बनवा सकेगा। हालांकि रिफ्यूजी को वैसे भी पासपोर्ट बनवाने का अधिकार नहीं है। उसका पासपोर्ट निरस्त करने के लिए भी पासपोर्ट कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी गई है।
म्यांमार के नागरिक सादिक का पासपोर्ट बन गया है। मामला खुलने पर अधिकारियों को सारे नियम-कानून याद आ रहे हैं। लेकिन यहां सवाल उठता है कि उसका पासपोर्ट बन कैसे गया। पासपोर्ट बनने से पहले पुलिस और एलआईयू जांच करती है।
अब फिर यह कैसी जांच थी। किसी ने उसके घर जाकर क्यों नहीं देखा। मोहल्ले वालों से जानकारी क्यों नहीं की गई। सादिक के पासपोर्ट में पुलिस और एलआईयू वाले भी फंस रहे हैं। अगर पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई गई तो इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।