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रामवृक्ष अपने छोटे बेटे को बनाना चाहता था उत्तराधिकारी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:22 AM IST
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रामवृक्ष यादव अपने छोटे बेटे विवेक को संगठन की कमान सौंपना चाहता था। बाकायदा युवा विंग के गठन की तैयारी कर ली गई थी। बेरोजगार नौजवानों को रोजगार दिलाने का झांसा देकर जोड़ने की प्लानिंग हो रही थी।
स्वाधीन भारत सुभाष सेना का कामकाज भी विवेक देखने लगा था। जवाहरबाग से जो अधजला रिकार्ड मिला था उस पर भी विवेक के ही हस्ताक्षर थे। बताया तो यहां तक जा रहा है कि रामवृक्ष विवेक की एंट्री किसी बड़े सियासी दल में कराने की तैयारी कर रहा था। विवेकी गिरफ्तारी के बाद ये खुलासा हुआ है।
रामवृक्ष यादव गाजीपुर जिले में मरदह का रहने वाला था। उसके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा राजनारायण यादव और छोटा विवेक यादव। 15 मार्च 2014 को जब रामवृक्ष यादव अपने करीब 500 लोगों के साथ मथुरा आया था तब विवेक भी उसके साथ था।
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विवेक ने अपने कुछ दोस्तों के साथ एक पूरा विंग बना रखा था जो रामवृक्ष के स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर अपलोड करता था। संगठन की नीतियों का भी प्रचार प्रसार करता था। विवेक तो पूरे वक्त ही जवाहरबाग में रहता था। संगठन के लिए आने वाले चंदे और खर्च की देखरेख वही करता था।
दो जून 2016 को जवाहरबाग हिंसा के बाद जो अधजला रिकार्ड मिला था उस पर भी विवेक के ही हस्ताक्षर थे। पुलिस जांच में इसका खुलासा हो चुका है। बताया गया कि जो भी नए लोग जुड़ते थे या फिर जवाहरबाग में जो भी बड़े नेता पहुंचते थे रामवृक्ष सबसे पहले विवेक से ही उनकी पहचान कराया करता था।
राजनारायण को नहीं थी पिता के संगठन में दिलचस्पी
रामवृक्ष के बड़े बेटे राजनारायण को अपने पिता के इस संगठन में कोई दिलचस्पी नहीं थी। हालांकि जवाहरबाग में तो वह भी आता था लेकिन अपने परिवार से मिलने के लिए। एक दो दिन यहां रहा और फिर चला जाता था।
जब पुलिस ने राकेश गुप्ता, वीरेश यादव और चंदनबोस को गिरफ्तार किया था तब इन लोगों ने भी कहा था कि राजनारायण अपने पिता के साथ नहीं रहता था। कई दफा तो पिता के कहने पर भी वह यहां नहीं रुकता था। उसने अपनी मां से भी कहा था कि वह जवाहरबाग में न रहकर उसके साथ रहे।
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स्वाधीन भारत सुभाष सेना का कामकाज भी विवेक देखने लगा था। जवाहरबाग से जो अधजला रिकार्ड मिला था उस पर भी विवेक के ही हस्ताक्षर थे। बताया तो यहां तक जा रहा है कि रामवृक्ष विवेक की एंट्री किसी बड़े सियासी दल में कराने की तैयारी कर रहा था। विवेकी गिरफ्तारी के बाद ये खुलासा हुआ है।
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रामवृक्ष यादव गाजीपुर जिले में मरदह का रहने वाला था। उसके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा राजनारायण यादव और छोटा विवेक यादव। 15 मार्च 2014 को जब रामवृक्ष यादव अपने करीब 500 लोगों के साथ मथुरा आया था तब विवेक भी उसके साथ था।
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विवेक ने अपने कुछ दोस्तों के साथ एक पूरा विंग बना रखा था जो रामवृक्ष के स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर अपलोड करता था। संगठन की नीतियों का भी प्रचार प्रसार करता था। विवेक तो पूरे वक्त ही जवाहरबाग में रहता था। संगठन के लिए आने वाले चंदे और खर्च की देखरेख वही करता था।
दो जून 2016 को जवाहरबाग हिंसा के बाद जो अधजला रिकार्ड मिला था उस पर भी विवेक के ही हस्ताक्षर थे। पुलिस जांच में इसका खुलासा हो चुका है। बताया गया कि जो भी नए लोग जुड़ते थे या फिर जवाहरबाग में जो भी बड़े नेता पहुंचते थे रामवृक्ष सबसे पहले विवेक से ही उनकी पहचान कराया करता था।
राजनारायण को नहीं थी पिता के संगठन में दिलचस्पी
रामवृक्ष के बड़े बेटे राजनारायण को अपने पिता के इस संगठन में कोई दिलचस्पी नहीं थी। हालांकि जवाहरबाग में तो वह भी आता था लेकिन अपने परिवार से मिलने के लिए। एक दो दिन यहां रहा और फिर चला जाता था।
जब पुलिस ने राकेश गुप्ता, वीरेश यादव और चंदनबोस को गिरफ्तार किया था तब इन लोगों ने भी कहा था कि राजनारायण अपने पिता के साथ नहीं रहता था। कई दफा तो पिता के कहने पर भी वह यहां नहीं रुकता था। उसने अपनी मां से भी कहा था कि वह जवाहरबाग में न रहकर उसके साथ रहे।