{"_id":"909b7d9ac5312ab599c06131a39b9764","slug":"ramlila-by-artist-from-mathura-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मथुरा की रामलीला में 'स्वरूप' की प्रतिष्ठा है’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मथुरा की रामलीला में 'स्वरूप' की प्रतिष्ठा है’
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Tue, 01 Dec 2015 07:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के उपक्रम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली की ओर से देश के विभिन्न स्थानों की ख्याति प्राप्त रामलीलाओं की विशेषताओं के संबंध में विचार संगोष्ठी आयोजित की गई।
इसमें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष मोहनस्वरूप भाटिया ने कहा कि मथुरा में भगवान श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा रही है, इस कारण गांव, कस्बों और नगरों में बड़ी संख्या में रामलीलाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि मथुरा की रामलीला में कलाकार नहीं ‘स्वरूप’ की प्रतिष्ठा है।
उन्होंने कहा कि मथुरा के निवासियों में मूलत: धार्मिक भावना रही है। रामलीला के पात्रों में भी यह भावना रहने के कारण वे अपनी भूमिका के अनुरूप चरित्र को आत्मसात कर लेते हैं। व्यासपीठ पर विराजमान स्वामी के पुत्र यदि राम की भूमिका करते हैं तो लीला शुरू होने से पूर्व वह उनका चरण स्पर्श करते हैं।
विज्ञापन
इस स्वरूप में वह पुत्र के नहीं साक्षात भगवान श्रीराम के दर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि मथुरा की रामलीला गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस पर आधारित होती है, लेकिन उसमें ब्रजभाषा के कवियों की रचनाओं और लोक संगीत का समावेश भी अनूठी विशिष्टता है।
यहां की रामलीला मंडलियां राजधानी दिल्ली, मुंबई आदि प्रमुख महानगरों में आग्रह के साथ आमंत्रित की जाती हैं। इस अवसर पर आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी, अयोध्या प्रसाद गुप्ता कुमुद आदि प्रबुद्ध विचारकों के अतिरिक्त जन संपदा विभागाध्यक्ष डा. मौल्ली कौशल भी उपस्थित रहीं।
विज्ञापन
इसमें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष मोहनस्वरूप भाटिया ने कहा कि मथुरा में भगवान श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा रही है, इस कारण गांव, कस्बों और नगरों में बड़ी संख्या में रामलीलाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि मथुरा की रामलीला में कलाकार नहीं ‘स्वरूप’ की प्रतिष्ठा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मथुरा के निवासियों में मूलत: धार्मिक भावना रही है। रामलीला के पात्रों में भी यह भावना रहने के कारण वे अपनी भूमिका के अनुरूप चरित्र को आत्मसात कर लेते हैं। व्यासपीठ पर विराजमान स्वामी के पुत्र यदि राम की भूमिका करते हैं तो लीला शुरू होने से पूर्व वह उनका चरण स्पर्श करते हैं।
विज्ञापन
इस स्वरूप में वह पुत्र के नहीं साक्षात भगवान श्रीराम के दर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि मथुरा की रामलीला गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस पर आधारित होती है, लेकिन उसमें ब्रजभाषा के कवियों की रचनाओं और लोक संगीत का समावेश भी अनूठी विशिष्टता है।
यहां की रामलीला मंडलियां राजधानी दिल्ली, मुंबई आदि प्रमुख महानगरों में आग्रह के साथ आमंत्रित की जाती हैं। इस अवसर पर आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी, अयोध्या प्रसाद गुप्ता कुमुद आदि प्रबुद्ध विचारकों के अतिरिक्त जन संपदा विभागाध्यक्ष डा. मौल्ली कौशल भी उपस्थित रहीं।