{"_id":"ea945d1af319f0ec2aa45afdf024ebea","slug":"railbus-facility-in-mathura-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नव कलेवर के बाद भी अधूरी रही रेलबस की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नव कलेवर के बाद भी अधूरी रही रेलबस की उम्मीद
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Thu, 24 Dec 2015 11:03 PM IST
विज्ञापन
अपनी स्थापना के लगभग 100 साल बाद मथुरा-वृंदावन रेल लाइन को बदला गया है। वर्ष 1905-1908 के दौरान राधामाधव मंदिर के निर्माण के लिए बिछाई गई रेललाइन के 15 किमी हिस्से के नव कलेवर में लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च भी हो गए। इसके बाद भी इस नई लाइन पर रेलबस का संचालन सुचारु नहीं हो सका है। मथुरा-वृंदावन के लोग इस सुगम मार्ग पर यात्रा की आज भी उम्मीद लगाए हैं।
वृंदावन रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर पवन कुमार के अनुसार 15 किलोमीटर से अधिक रेललाइन को बदलने के लिए वर्ष 2013 में प्रस्ताव तैयार किया गया था। 2014 के अंत तक आदेश आने के बाद रेलवे की ओर से लाइन को बदलने का कार्य भी शुरू करा दिया गया।
लगभग आठ महीने तक चले इस कार्य में मीटरगेज की 52 किलोग्राम पटरी और स्लीपर बदले गए। गिट्टी डालकर मार्ग को तैयार किया। इस पर लगभग 10 करोड़ खर्च होने के बाद नई लाइन पर दो ही बार रेलबस सेवा का कुछ दिनों के लिए ही संचालन हो पाया। जुलाई से रेलबस पर ब्रेक लग गया। इसके बाद रेलवे न तो दैनिक यात्रियों को इसका लाभ दे सका है और न बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिली है।
विज्ञापन
विस्तार की योजना भी नहीं बनी
मथुरा-वृंदावन रेलबस सेवा के विस्तार के लिए न तो रेलवे के अधिकारियों ने योजना बनाई और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान दिया है। विश्व पटल पर अलग पहचान रखने वाले वृंदावन के विकास के लिए देश और प्रदेश की राजधानी से कई योजनाएं शुरू हुईं लेकिन इसमें यातायात के सुलभ साधन रेलबस सेवा का विस्तारीकरण शामिल नहीं हो पाया।
इसके कारण 15 साल संचालन के बाद रखरखाव की बेहतर व्यवस्था न होने के कारण रेलबस पर ब्रेक लग गया। स्टेशन मास्टर पवन कुमार ने बताया कि रेलबस को ठीक कराने के लिए जल्द ही इज्जत नगर स्थित डिपो में भेजे जाने की जानकारी मिली है।
विज्ञापन
वृंदावन रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर पवन कुमार के अनुसार 15 किलोमीटर से अधिक रेललाइन को बदलने के लिए वर्ष 2013 में प्रस्ताव तैयार किया गया था। 2014 के अंत तक आदेश आने के बाद रेलवे की ओर से लाइन को बदलने का कार्य भी शुरू करा दिया गया।
विज्ञापन
लगभग आठ महीने तक चले इस कार्य में मीटरगेज की 52 किलोग्राम पटरी और स्लीपर बदले गए। गिट्टी डालकर मार्ग को तैयार किया। इस पर लगभग 10 करोड़ खर्च होने के बाद नई लाइन पर दो ही बार रेलबस सेवा का कुछ दिनों के लिए ही संचालन हो पाया। जुलाई से रेलबस पर ब्रेक लग गया। इसके बाद रेलवे न तो दैनिक यात्रियों को इसका लाभ दे सका है और न बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिली है।
विज्ञापन
विस्तार की योजना भी नहीं बनी
मथुरा-वृंदावन रेलबस सेवा के विस्तार के लिए न तो रेलवे के अधिकारियों ने योजना बनाई और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान दिया है। विश्व पटल पर अलग पहचान रखने वाले वृंदावन के विकास के लिए देश और प्रदेश की राजधानी से कई योजनाएं शुरू हुईं लेकिन इसमें यातायात के सुलभ साधन रेलबस सेवा का विस्तारीकरण शामिल नहीं हो पाया।
इसके कारण 15 साल संचालन के बाद रखरखाव की बेहतर व्यवस्था न होने के कारण रेलबस पर ब्रेक लग गया। स्टेशन मास्टर पवन कुमार ने बताया कि रेलबस को ठीक कराने के लिए जल्द ही इज्जत नगर स्थित डिपो में भेजे जाने की जानकारी मिली है।