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राधा प्रेम से जगमगाया भागवत ज्ञान : ओझा जी
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माताजी गोशाला में श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते रमेश भाई ओझा।
बरसाना। राधाजी के प्रेम को भागवत का वास्तविक प्रकाश बताते हुए कथा प्रवक्ता रमेश भाई ओझा ने कहा कि राधा कृपा कटाक्ष से ही भागवत रूपी बगिया के पुष्प खिले हैं, राधाजी के हृदय का प्रेम इन पुष्पों का सौरभ है। राधा भाव से ही हर अध्याय, हर श्लोक और प्रत्येक स्कंद पोषित होता है। जब हृदय में राधा भावना उदित होती है तब ही शास्त्र की पंक्तियां आत्मा में आलोकित होती हैं, राधा सुधानिधि ही भागवत के प्रकरणों में चेतना भरती है।
शनिवार को माताजी गोशाला बरसाना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से ओझाजी ने श्रीकृष्ण जन्म का अलौकिक प्रसंग सुनाया। जैसे ही जन्मोत्सव की कथा आरंभ हुई, वातावरण आनंद से सराबोर हो उठा, श्रोता भावविह्वल होकर झूमने लगे। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाइयां दीं।
ओझा ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है, यह क्षणभंगुर देह यदि सत्संग में लग जाए तो यही सबसे बड़ा सौभाग्य है। मृत्यु जीवन का अनिवार्य सत्य है, इससे घबराना नहीं चाहिए क्योंकि आत्मा न जन्म लेती है और न ही नष्ट होती है। संसार में भगवान की इच्छा से बड़ा कोई बलवान नहीं।
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गोमाता के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जितेंद्रनाथ महाराज, फूलडोल बिहारी महाराज, हित लाडलीशरण महाराज, लाडलीदास महाराज, बिहारी दास महाराज, श्रुति देशपांडे, नृसिंह बाबा, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अधिकारी राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, माताजी गोशाला के संयोजक ब्रजशरण दास बाबा आदि मौजूद रहे। संवाद
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शनिवार को माताजी गोशाला बरसाना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से ओझाजी ने श्रीकृष्ण जन्म का अलौकिक प्रसंग सुनाया। जैसे ही जन्मोत्सव की कथा आरंभ हुई, वातावरण आनंद से सराबोर हो उठा, श्रोता भावविह्वल होकर झूमने लगे। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाइयां दीं।
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ओझा ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है, यह क्षणभंगुर देह यदि सत्संग में लग जाए तो यही सबसे बड़ा सौभाग्य है। मृत्यु जीवन का अनिवार्य सत्य है, इससे घबराना नहीं चाहिए क्योंकि आत्मा न जन्म लेती है और न ही नष्ट होती है। संसार में भगवान की इच्छा से बड़ा कोई बलवान नहीं।
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गोमाता के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जितेंद्रनाथ महाराज, फूलडोल बिहारी महाराज, हित लाडलीशरण महाराज, लाडलीदास महाराज, बिहारी दास महाराज, श्रुति देशपांडे, नृसिंह बाबा, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अधिकारी राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, माताजी गोशाला के संयोजक ब्रजशरण दास बाबा आदि मौजूद रहे। संवाद