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बरसाना में होली की धूम: राधारानी ने भक्तों पर बरसाई कृपा, दर्शन को लगा रेला; 40 दिवसीय महोत्सव का समापन

Mon, 25 Mar 2024 07:09 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, मथुरा
अमर उजाला, मथुरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 25 Mar 2024 07:09 PM IST
सार

बरसाना में होली की धूम रही। इस मौके पर राधारानी ने भक्तों पर खूब कृपा बरसाई। दर्शन को भक्तों का रेला लगा रहा। इसी के साथ 40 दिवसीय महोत्सव का समापन हो गया। 

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Radharani showered blessings on devotees in Barsana and with this the 40 day festival ended
बरसाना में होली की धूम: राधारानी ने भक्तों पर बरसाई कृपा, - फोटो : संवाद

विस्तार

तीर्थनगरी मथुरा के बरसाना में सोमवार को होली की धूम रही। इस दौरान राधारानी के दर्शन को भक्तों का अपार जनसमूह पहुंचा। सोमवार को ही 'जो जीवैगो सो खेलेगौ, ढप धर दै यार गई अगली बरस की' पद गायन के साथ ब्रज में चल रहे चालीस दिवसीय होली महोत्सव का समापन हो गया। इस दौरान राधारानी ने अपने गर्भग्रह से बाहर निकलकर मंदिर परिसर में स्थित सफेद छतरी में विराजमान होकर भक्तों पर कृपा का सागर उड़ेला। 

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बृषभान नंदनी के निज धाम बरसाना में बंसत पंचमी से शुरू होने वाले चालीस दिवसीय होली के धमार का समापन सोमवार को 'जो जीवैगो सो खेलेगौ, ढप धर दै यार गई अगले बरस की' पद गायन के साथ हो गया। पद में समाज गायन में उपयोग आने वाली ढप का वर्णन है। इसमें यह भाव है कि ढप को अब सुरक्षित रख दिया जाए, जो अगले वर्ष तक जीवित रहेगा वह इस ढप को बजाएगा। 

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बरसाना में होने वाली प्रसिद्ध लड्डू व लठामार होली तथा फाग महोत्सव का शुभारंभ बंसत के दिन से लाडली जी मंदिर में ध्वज रूपी डाढ़ा गाढ़कर किया जाता है। चालीस दिवसीय इस होली महोत्सव के आनंद के रंग में श्रद्धालु बड़े भाव से राधाकृष्ण की इन लीलाओं का आनंद लेते है। गोस्वामी समाज के लोगो द्वारा मन्दिर परिसर में फाग महोत्सव का अन्तिम पद जीवेगो सो खेलेगो... गाकर चालीस दिवसीय होली धमार का समापन कर दिया।  
 

इसके साथ ही ढप, मृदंग, झांझ आदि अगले वर्ष के लिए रख दिए गए। शाम पांच बजे बृषभान नंदनी के डोला को सेवायत कंधों पर उठाकर मंदिर परिसर में बनी संगमरमर की सफेद छतरी में विराजमान किया। होली महोत्सव के अंतिम दिन राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी के दर्शन करके श्रद्धालुओं ने अपने आपको कृतार्थ माना। 
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बृषभान नंदनी भी अपने भक्तों पर कृपा का सागर उडे़ल रही थी। शाम सात बजे लाडली जी के डोले को वापस मंदिर में ले जाया गया। इसके उपरांत गोस्वामी समाज की कन्याओं द्वारा आरती की गई। वहीं श्यामा प्यारी के नजदीक से दर्शन करने के लिए श्रद्धालु बेताब नजर आ रहे थे। पूरा मंदिर परिसर राधा-कृष्ण के जयघोष से गुंजयमान हो उठा।
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