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बरसाने में असल सुसरार, हमारौ न्यारौ नातौ
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 30 Oct 2015 11:57 PM IST
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नंदगांव-बरसाना के लोगों के मध्य वर्षों से चले आ रहे अटूट संबंध का नजारा शुक्रवार को नंदभवन में एक बार फिर देखने को मिला। दोनों ओर से प्रेम पगी गालियां सुनाई गईं।
इस दौरान ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा को भी नंदगांव के ग्वालों ने गालियां दिए बगैर नहीं छोड़ा। यात्रियों ने चर्चित हास-परिहास का जमकर आनंद लिया।
नंदगांव पड़ाव के दूसरे दिन ब्रजयात्रियों ने नंदगांव की परिक्रमा की। पावन सरोवर, मोती कुंड, छाछ कुंड, मोर कुंड, कृष्ण कुंड, ललिता कुंड, उद्धव क्यारी, नंद बैठक, यशोदा कुंड, हाऊ-विलाऊ, नृसिंह मंदिर, दधि मांट, खूटा, मधुसूदन कुंड, काजर कुंड, चरन पहाड़ी, पनिहारी कुंड, वृंदा देवी मंदिर आदि स्थलों के दर्शन किए।
संध्या को नंदभवन पहुंचे ब्रजयात्रियों ने नंद परिवार के दर्शन किए। इस दौरान जगमोहन में एक ओर नंदगांव के तो दूसरी ओर रमेश बाबा के साथ बरसाना के ग्वाल महफिल सजाए बैठे थे।
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दोनों ओर से राधाकृष्ण की लीलाओं से जुड़े पद और सवैया की बौछार हो रही थी। काव्य के माध्यम से बरसाना के लोग कृष्ण पर कटाक्ष कर रहे थे वहीं दूसरी ओर प्रत्युत्तर में नंदगांव के ग्वालों ने भी जमकर कटाक्ष किए।
बरसाने के ग्वालों ने पद के माध्यम से कृष्ण को प्रेम पगी गाली दीं
कन्हैया तेरौ कारौ री मैं कैसें ब्याहूं राधे
तेरौ कन्हैया इतनौं कारौ बादर में घोर अंधियारौ री
मेरी राधा इतनी गोरी, बादर में चंद्र उजियारौ री
वृंदावन की कुंज गलीन में, सब सखियन की रखवारी री
चंद्रसखि ब्रज बालकृष्ण छवि यह जीवन प्राण हमारौ री
प्रत्युत्तर में नंदगांव के ग्वालों ने भी सवैया कह नंदगांव बरसाना के संबंधों को उजागर किया
बरसाने में असल सुसरार, हमारौ न्यारौ नातौ
बरसानौ चंद्र है चकोर तहां नंदगांव
जो पै वह कमल, तौ यह भ्रमर रंग श्याम है
जो पै वह स्वाती तौ, यह पपीहा पुकारै पीउ
शुक कवि दोऊ ओर प्रीत प्रत्यक्ष जानौ
याही सौं जाहिर जग ब्रज सरनाम है
दोनों ही दिन-दिन रहत दरस दीदार यार
बरसानौ महबूबा तौ आशिक नंदगांम है
इस दौरान रमेश बाबा को भी नंदगांव के ग्वालों ने अनुराग युक्त गालियां सुनाईं। बाबा ने गालियां सुन स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया। बाबा ने स्वरचित लोकगीत माखन की चोरी बार-बार करे, फिर भी राधारानी प्यार करै के साथ हास परिहास कार्यक्रम का समापन किया गया। इस दौरान राधाकृष्ण प्रेमियों ने जमकर आनंद लूटा।
आज का पड़ाव पांडव गंगा
नंदगांव। श्रीराधा रानी ब्रजयात्रा आसेश्वर, टेरकदंब, जाब, किशोरी वट, राधाकांत मंदिर, कोकिलावन होते हुए पांडव गंगा पहुंचेगी।
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इस दौरान ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा को भी नंदगांव के ग्वालों ने गालियां दिए बगैर नहीं छोड़ा। यात्रियों ने चर्चित हास-परिहास का जमकर आनंद लिया।
नंदगांव पड़ाव के दूसरे दिन ब्रजयात्रियों ने नंदगांव की परिक्रमा की। पावन सरोवर, मोती कुंड, छाछ कुंड, मोर कुंड, कृष्ण कुंड, ललिता कुंड, उद्धव क्यारी, नंद बैठक, यशोदा कुंड, हाऊ-विलाऊ, नृसिंह मंदिर, दधि मांट, खूटा, मधुसूदन कुंड, काजर कुंड, चरन पहाड़ी, पनिहारी कुंड, वृंदा देवी मंदिर आदि स्थलों के दर्शन किए।
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संध्या को नंदभवन पहुंचे ब्रजयात्रियों ने नंद परिवार के दर्शन किए। इस दौरान जगमोहन में एक ओर नंदगांव के तो दूसरी ओर रमेश बाबा के साथ बरसाना के ग्वाल महफिल सजाए बैठे थे।
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दोनों ओर से राधाकृष्ण की लीलाओं से जुड़े पद और सवैया की बौछार हो रही थी। काव्य के माध्यम से बरसाना के लोग कृष्ण पर कटाक्ष कर रहे थे वहीं दूसरी ओर प्रत्युत्तर में नंदगांव के ग्वालों ने भी जमकर कटाक्ष किए।
बरसाने के ग्वालों ने पद के माध्यम से कृष्ण को प्रेम पगी गाली दीं
कन्हैया तेरौ कारौ री मैं कैसें ब्याहूं राधे
तेरौ कन्हैया इतनौं कारौ बादर में घोर अंधियारौ री
मेरी राधा इतनी गोरी, बादर में चंद्र उजियारौ री
वृंदावन की कुंज गलीन में, सब सखियन की रखवारी री
चंद्रसखि ब्रज बालकृष्ण छवि यह जीवन प्राण हमारौ री
प्रत्युत्तर में नंदगांव के ग्वालों ने भी सवैया कह नंदगांव बरसाना के संबंधों को उजागर किया
बरसाने में असल सुसरार, हमारौ न्यारौ नातौ
बरसानौ चंद्र है चकोर तहां नंदगांव
जो पै वह कमल, तौ यह भ्रमर रंग श्याम है
जो पै वह स्वाती तौ, यह पपीहा पुकारै पीउ
शुक कवि दोऊ ओर प्रीत प्रत्यक्ष जानौ
याही सौं जाहिर जग ब्रज सरनाम है
दोनों ही दिन-दिन रहत दरस दीदार यार
बरसानौ महबूबा तौ आशिक नंदगांम है
इस दौरान रमेश बाबा को भी नंदगांव के ग्वालों ने अनुराग युक्त गालियां सुनाईं। बाबा ने गालियां सुन स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया। बाबा ने स्वरचित लोकगीत माखन की चोरी बार-बार करे, फिर भी राधारानी प्यार करै के साथ हास परिहास कार्यक्रम का समापन किया गया। इस दौरान राधाकृष्ण प्रेमियों ने जमकर आनंद लूटा।
आज का पड़ाव पांडव गंगा
नंदगांव। श्रीराधा रानी ब्रजयात्रा आसेश्वर, टेरकदंब, जाब, किशोरी वट, राधाकांत मंदिर, कोकिलावन होते हुए पांडव गंगा पहुंचेगी।