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नया करने की ललक ने प्रेरणा को बनाया मेमोरी गर्ल
अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 11 Aug 2016 11:43 PM IST
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प्रेरणा
- फोटो : अमर उजाला
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‘अगर देखना है मेरे उड़ने का अंदाज, तो कह दो आसमां से वो और ऊंचा हो जाए।’ मथुरा की प्रेरणा इन पंक्तियों को साबित कर रही हैं। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की मैमोरी गर्ल बनकर ब्रज की इस बिटिया ने जिले का मान बढ़ाया है। आर्थिक समस्या और विपरीत पारिवारिक परिस्थितियां भी उनकी उड़ान को नहीं रोक सकीं। आज पूरा जिला प्रेरणा पर गर्व कर रहा है।
कृष्णा नगर क्षेत्र की पदमपुरी कालोनी निवासी ऊषा शर्मा की बेटी प्रेरणा के मन में बचपन से ही कुछ नया करने की ललक थी। बचपन में पिता का साथ नहीं मिला लेकिन हौसले का दामन हमेशा प्रेरणा के साथ रहा। प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका की नौकरी मां ऊषा ने परिवार को पाला और बेटी को भी अच्छी शिक्षा दिलाई।
इसके बाद जब बेटी का आत्मविश्वास जागा तो उसने मां के सामने मैमोरी की क्लास ज्वाइन करने की इच्छा जताई। परिवार की आय के अनुसार फीस के रुपये नहीं थे तो कोचिंग संचालक ने शर्त रख कि अगर प्रेरणा ये हुनर सीख गईं तो उनकी क्लास के बच्चों को प्रशिक्षित करेंगी, अन्यथा फीस भरनी होगी।
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आत्मविश्वास से लबरेज प्रेरणा ने चुनौती स्वीकार की और यह मुकाम पा लिया। प्रेरणा ने हाल ही में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया था। अब उन्होंने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड की मेमोरी गर्ल बनने का गौरव भी हासिल कर लिया है।
शॉर्प मेमोरी देख दंग रह जाते है लोग
मथुरा में हुए परीक्षण के दौरान एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड की विभा भाटिया और राहुल भाटिया के निर्देशन में प्रेरणा को एक कमरे में बंद कर दिया गया था। फिर वहां मौजूद लोगों के मोबाइल नंबर की आखिरी दो डिजिट को सौ खानों में भर दिया गया। प्रेरणा को ये डिजिट देखने के लिए मात्र एक मिनट दिया। इसके बाद प्रेरणा ने सभी डिजिट को क्रम से सुनाया। यह देख सभी दंग रह गए। इसी परीक्षण की सीडी लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भेजी गई, जिसके आधार पर उन्हें मैमोरी गर्ल चुना गया।
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कृष्णा नगर क्षेत्र की पदमपुरी कालोनी निवासी ऊषा शर्मा की बेटी प्रेरणा के मन में बचपन से ही कुछ नया करने की ललक थी। बचपन में पिता का साथ नहीं मिला लेकिन हौसले का दामन हमेशा प्रेरणा के साथ रहा। प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका की नौकरी मां ऊषा ने परिवार को पाला और बेटी को भी अच्छी शिक्षा दिलाई।
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इसके बाद जब बेटी का आत्मविश्वास जागा तो उसने मां के सामने मैमोरी की क्लास ज्वाइन करने की इच्छा जताई। परिवार की आय के अनुसार फीस के रुपये नहीं थे तो कोचिंग संचालक ने शर्त रख कि अगर प्रेरणा ये हुनर सीख गईं तो उनकी क्लास के बच्चों को प्रशिक्षित करेंगी, अन्यथा फीस भरनी होगी।
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आत्मविश्वास से लबरेज प्रेरणा ने चुनौती स्वीकार की और यह मुकाम पा लिया। प्रेरणा ने हाल ही में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया था। अब उन्होंने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड की मेमोरी गर्ल बनने का गौरव भी हासिल कर लिया है।
शॉर्प मेमोरी देख दंग रह जाते है लोग
मथुरा में हुए परीक्षण के दौरान एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड की विभा भाटिया और राहुल भाटिया के निर्देशन में प्रेरणा को एक कमरे में बंद कर दिया गया था। फिर वहां मौजूद लोगों के मोबाइल नंबर की आखिरी दो डिजिट को सौ खानों में भर दिया गया। प्रेरणा को ये डिजिट देखने के लिए मात्र एक मिनट दिया। इसके बाद प्रेरणा ने सभी डिजिट को क्रम से सुनाया। यह देख सभी दंग रह गए। इसी परीक्षण की सीडी लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भेजी गई, जिसके आधार पर उन्हें मैमोरी गर्ल चुना गया।