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उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का होगा चिह्नांकन
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मथुरा। स्वास्थ्य विभाग उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) वाले मामले चिन्हित कर रहा है। वहीं, गर्भवती को खून देने की व्यवस्था भी की गई है।
रुटीन ओपीडी के अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर लगाकर हर महीने की 9 तारीख को उच्च जोखिम गर्भावस्था वाले मामले चिन्हित किए जा रहे हैं लेकिन रविवार होने के कारण यह दिवस 10 फरवरी को मनाया जाएगा। इसमें महिला का वजन, बीपी, शुगर, एचआईवी, संक्रमण आदि की नि:शुल्क जांच होगी।
एचआरपी महिलाओं के लिए विशेष रूप से जरूरी है कि वह चिकित्सक के परामर्शानुसार नियमित जांच कराएं ताकि जटिलताओं को टाला जा सके। सुरक्षित प्रसव कराना हमारी जिम्मेदारी है। इसके लिए हम शत प्रतिशत प्रयास करते हैं।
- डॉ. शेर सिंह, सीएमओ
32 केसों में मिली खून की कमी
अक्तूबर से दिसंबर 2019 तक सरकारी अस्पताल में लगभग 50 एचआरपी महिलाएं चिन्हित की गईं। इनमें से 32 को खून की कमी, 18 संक्रमण से पीड़ित थीं, जिन्हें खून उपलब्ध कराया गया।
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क्या है उच्च जोखिम गर्भावस्था
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में सामान्य गर्भावस्था की तुलना में अधिक जटिलताओं की आशंका रहती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे गर्भावस्था के दौरान खून या अन्य पोषक तत्वों की कमी, हाईपरटेंशन, डायबिटीज, एचआईवी, गर्भ में जुड़वा बच्चे होना, ब्रीच स्थिति, पिछला प्रसव सिजेरियन होना या गर्भपात होना, कम या ज्यादा उम्र में गर्भधारण होना आदि। कई बार इससे मां और होने वाले बच्चे दोनों की जान को खतरा भी हो सकता है। इसलिए ऐसी महिलाओं को प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा अधिक निगरानी की जरूरत होती है।
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रुटीन ओपीडी के अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिविर लगाकर हर महीने की 9 तारीख को उच्च जोखिम गर्भावस्था वाले मामले चिन्हित किए जा रहे हैं लेकिन रविवार होने के कारण यह दिवस 10 फरवरी को मनाया जाएगा। इसमें महिला का वजन, बीपी, शुगर, एचआईवी, संक्रमण आदि की नि:शुल्क जांच होगी।
एचआरपी महिलाओं के लिए विशेष रूप से जरूरी है कि वह चिकित्सक के परामर्शानुसार नियमित जांच कराएं ताकि जटिलताओं को टाला जा सके। सुरक्षित प्रसव कराना हमारी जिम्मेदारी है। इसके लिए हम शत प्रतिशत प्रयास करते हैं।
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- डॉ. शेर सिंह, सीएमओ
32 केसों में मिली खून की कमी
अक्तूबर से दिसंबर 2019 तक सरकारी अस्पताल में लगभग 50 एचआरपी महिलाएं चिन्हित की गईं। इनमें से 32 को खून की कमी, 18 संक्रमण से पीड़ित थीं, जिन्हें खून उपलब्ध कराया गया।
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क्या है उच्च जोखिम गर्भावस्था
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में सामान्य गर्भावस्था की तुलना में अधिक जटिलताओं की आशंका रहती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे गर्भावस्था के दौरान खून या अन्य पोषक तत्वों की कमी, हाईपरटेंशन, डायबिटीज, एचआईवी, गर्भ में जुड़वा बच्चे होना, ब्रीच स्थिति, पिछला प्रसव सिजेरियन होना या गर्भपात होना, कम या ज्यादा उम्र में गर्भधारण होना आदि। कई बार इससे मां और होने वाले बच्चे दोनों की जान को खतरा भी हो सकता है। इसलिए ऐसी महिलाओं को प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा अधिक निगरानी की जरूरत होती है।