{"_id":"62c46c587cb58cd49b080cf82ed78611","slug":"prayers-during-moon-eclipse-in-mathura-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" कीर्तन के बाद यमुना स्नान कर कमाया पुण्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कीर्तन के बाद यमुना स्नान कर कमाया पुण्य
ब्यूरो,अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 05 Apr 2015 12:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण के दौरान विश्राम घाट पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। यहां ग्रहण के दौरान भक्तों ने लगातार भजन कीर्तन किए, बाद में स्नान कर पुण्य कमाया। ग्रहण का सूतक लगने के कारण सुबह से ही मंदिरों के पट बंद थे।
शनिवार को ग्रहणकाल शाम को चंद्रोदय के साथ 6 बजकर 38 मिनट से सवा सात बजे तक रहा। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विश्राम घाट पर पहुंचकर भजन कीर्तन किया। ग्रहणकाल पूरा होते ही यमुना में स्नानकर पुण्य कमाया।
इधर मंदिरों में भी देर रात तक दर्शन जारी रहे। द्वारिकाधीश मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया राजभोग के दर्शन दस बजे से साढ़े दस बजे तक कराए गए।
विज्ञापन
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के संयुक्त मुख्य अधिशासी राजीव श्रीवास्तव के अनुसार जन्मस्थान पर मंदिरों के दर्शन शाम साढ़े आठ बजे से रात साढ़े नौ बजे तक खुले।
श्रीब्रज समाज हरि संकीर्तन संघ के तत्वावधान में चंद्रग्रहण के दौरान संकीर्तन का आयोजन किया गया था। इसके अलावा ग्रहण शुरू होने पर घरों में भी भजन कीर्तन का दौर चला।
विज्ञापन
शनिवार को ग्रहणकाल शाम को चंद्रोदय के साथ 6 बजकर 38 मिनट से सवा सात बजे तक रहा। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विश्राम घाट पर पहुंचकर भजन कीर्तन किया। ग्रहणकाल पूरा होते ही यमुना में स्नानकर पुण्य कमाया।
विज्ञापन
इधर मंदिरों में भी देर रात तक दर्शन जारी रहे। द्वारिकाधीश मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया राजभोग के दर्शन दस बजे से साढ़े दस बजे तक कराए गए।
विज्ञापन
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के संयुक्त मुख्य अधिशासी राजीव श्रीवास्तव के अनुसार जन्मस्थान पर मंदिरों के दर्शन शाम साढ़े आठ बजे से रात साढ़े नौ बजे तक खुले।
श्रीब्रज समाज हरि संकीर्तन संघ के तत्वावधान में चंद्रग्रहण के दौरान संकीर्तन का आयोजन किया गया था। इसके अलावा ग्रहण शुरू होने पर घरों में भी भजन कीर्तन का दौर चला।