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मथुरा में जमीन अधिग्रहण का मामला: 'लाठी भी खाई,जमीन भी गई, तीन पीढ़ी से कर रहे खेती, अब डर के साये में जी रहे'

Fri, 06 Jan 2023 09:10 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Fri, 06 Jan 2023 09:10 PM IST
सार

मथुरा में जमीन अधिग्रहण का मामला शांत नहीं हो रहा है। विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। लोगों का कहना है कि उनकी तीन पीढ़ियों से लोग खेती कर रहे हैं। अब जमीन जाने के डर से उनकी भूख-प्यास भी मर गई है।  

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Police has registered a case against 135 people in land acquisition case in vrindavan at Mathura
सांकेतिक फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वृंदावन में जमीन अधिग्रहण का विरोध करने के मामले में पुलिस ने 10 नामजदों समेत कुल 135 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पकड़ना शुरू कर दिया है। नामजदों में महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस के भय से कई किसानों को नींद भी नहीं आई। अनहोनी की आशंका में बड़ी संख्या में किसान अपने घरों को छोड़कर चले गए। किसानों का कहना है कि जमीन भी चली गई, पिटे भी, अब डर के साए में जी रहे हैं। 

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दरअसल, सुनरख स्थित सौभरिवन के लिए भूमि का अधिग्रहण कर वन विभाग को देने पर गुरुवार को किसान उग्र हो गए थे। कालीदह परिक्रमा मार्ग तिराहे पर आगजनी करते हुए प्रदर्शन किया। मौके से चार महिलाओं सहित 10 लोगों को हिरासत में लिया था। इस मामले में वृंदावन कोतवाली की बांके बिहारी पुलिस चौकी प्रभारी राजकुमार की ओर से बीती रात कुसुम, कमलेश, सौरभ, चंद्रप्रकाश, मंजू, आकाश, विकास, संजय, दागश्री, किशन निवासीगण रतन छतरी के अलावा सवा सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ मार्ग पर जाम कर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। 
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पुलिस ने नामजद सभी 10 आरोपियों का शुक्रवार को चालान का सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। यहां से देर शाम सभी को निजी मुचलके पर जमानत मिल गई। इधर, गुरुवार को हुए इस बवाल के बाद पुलिस हरकत में आ गई। कालीदह और रतन छतरी क्षेत्र में रात भर पुलिस का पहरा रहा। पुलिस की कार्रवाई की आशंका के चलते इन क्षेत्र के लोगों की रात डर के साए में निकली। अधिकांश लोग अपने घर छोड़कर कहीं और चले गए थे।

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तीन पीढ़ियों से कर रहे खेती, अब न खाना अच्छा लग रहा, न पानी 

बीते लगभग छह दशकों से जमीन को जोतते आ रहे किसानों को जमीन छिन जाने का दुख है।  इनमें कई ऐसे किसान भी हैं जिनकी तीसरी पीढ़ी इस जमीन पर खेती कर रही है। खड़ी फसल को सामने नष्ट होता देख उनकी आंखों से आंसू बह रहे हैं। कोई सुनने और समझने वाला नहीं है। दुख की इस घड़ी में न उन्हें खाना अच्छा लग रहा है और न पानी। कई घरों में तो आज चूल्हे भी नहीं जले। किसान अपनी जमीन को उजड़ते होते देख रहे हैं। 

लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे

एशिया के सबसे बड़े सौभरिवन पार्क के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण चल रहा है। प्रशासन की देखरेख में बीते दो दिनों से किसानों के कब्जे से जमीन को लेकर वन विभाग को देने के लिए प्रयास हो रहे हैं। किसान बंटू निषाद ने बताया कि हमारे पास दो एकड़ जमीन है, इस जमीन पर गेहूं और फूलों की खेती करते आ रहे हैं। पहले हमारे पिताजी करते थे उनके बाद हम खेती कर रहे हैं। राकेश निषाद की ढाई एकड़ जमीन पर फूलों की खेती हो रही थी, जिसे जेसीबी से उजाड़ दिया गया। सुमन, प्रेमवती और मुन्नी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। 



उन्होंने बताया कि हमारे कच्चे मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। पशुओं को भगा दिया। सर्द मौसम में सिर ढकने के लिए छत भी नहीं है। ऐसे में हम कहां जाएं। हमारी तीसरी पीढ़ी भी खेती करने के लिए हाथ बटा रही है। उन्होंने बताया कि यह जमीन 1965 में जहांगीरपुर ग्राम पंचायत के द्वारा पट्टे पर दी गई थी। तीन वर्ष के बाद जमीन संक्रमणीय हो गई। इस जमीन को हमसे जबरन लेना कानूनन गलत है। उन्होंने बताया कि 17 परिवारों को 52 एकड़ जमीन मिली थी, आज यह परिवार बढ़कर 150 हो गए हैं। परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है।

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