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Mathura News: पार्वती के बस में सवार होने का सुबूत मांग रही पुलिस
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मथुरा। हमीरपुर के गांव राठ के रहने वाले गोविंद कुमार अपनी पत्नी पार्वती की मौत से व्यथित हैं। डीएनए मिलान नहीं होने के बाद पुलिस पार्वती के बस में सवार होने के बारे में साक्ष्य जुटा रही है। 14 दिन से गांव से मथुरा के चक्कर काटकर थक चुके गोविंद अपनी व्यथा कहते हुए रो पड़ते हैं। कहते हैं कि मैं कर्जदार हो गया और पुलिस को यह भरोसा नहीं कि पार्वती अब इस दुनिया में नहीं हैं।
यमुना एक्सप्रेस-वे पर बलदेव में 16 दिसंबर की सुबह हुए भीषण हादसे में 19 मृतकों की पहचान होने के बाद पार्वती और भोलू का पता नहीं चल सका है। पार्वती के पति गोविंद कुमार मजदूरी करते हैं। वह उस घड़ी को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों को भांजी की शादी में भेजा। वह बताते हैं कि पार्वती अपनी भांजी की शादी में शरीक होकर भांजे के साथ पनवारी कट से बस में सवार हुई थी। जिस भांजे ने बस में बिठाया, उसके भी बयान ले लिए। साथ में आठ साल का बेटा आकाश और छह साल की बेटी भी थीं। हादसे के बाद जब बस लपटों में घिर गई तो पार्वती ने दोनों बच्चों को बाहर धकेल दिया। मासूम बच्चों का कहना है कि मां बस में फंस गई। हम चिल्लाते रहे मगर कोई बस के अंदर नहीं घुस सका। गोविंद कहते हैं कि अभी तक 40-50 हजार रुपये का कर्जा हो गया। हमीरपुर से मथुरा के चक्कर काटते हुए थक गया हूं। मथुरा पुलिस को अब साक्ष्य चाहिए। मथुरा से दरोगा को भेजा गया। दरोगा ने प्रधान, लेखपाल सभी के बयान लिए। सारी बातें पूछीं। उनसे भी तमाम सवाल हुए। पुलिस साक्ष्य मांग रही है। अगर पार्वती जिंदा है तो हमें दे दो। गोविंद बताते हैं कि फिर से पुलिस ने उन्हें मथुरा बुलाया है। आखिर पुलिस क्या चाहती है। वह सवाल उठाते हैं ..चश्मदीद बच्चों के बयानों पर क्या भरोसा नहीं हुआ था? इसी तरह बस में सवार हुए बाड़ी, धौलपुर के भोलू का भी डीएनए उनकी बहन और बेटी से मैच नहीं हो सका है। भोलू के परिजन भी मथुरा के कई चक्कर काटकर थक चुके हैं। बहन सितारा का कहना है कि अब पुलिस जो पूछती है, वह बता देते हैं। हमारा भाई तो लौटकर आएगा नहीं। हम क्या करें।
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सुरेशचंद्र रावत का कहना है कि बस हादसे में जिन लोगों का डीएनए मैच नहीं किया है। उनके बस में सवार होने के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। दोनों के गांवों में पुलिस को भेजा था। साक्ष्य संकलित किए गए हैं। ताकि उन्हें मृतक घोषित किया जा सके।
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यमुना एक्सप्रेस-वे पर बलदेव में 16 दिसंबर की सुबह हुए भीषण हादसे में 19 मृतकों की पहचान होने के बाद पार्वती और भोलू का पता नहीं चल सका है। पार्वती के पति गोविंद कुमार मजदूरी करते हैं। वह उस घड़ी को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों को भांजी की शादी में भेजा। वह बताते हैं कि पार्वती अपनी भांजी की शादी में शरीक होकर भांजे के साथ पनवारी कट से बस में सवार हुई थी। जिस भांजे ने बस में बिठाया, उसके भी बयान ले लिए। साथ में आठ साल का बेटा आकाश और छह साल की बेटी भी थीं। हादसे के बाद जब बस लपटों में घिर गई तो पार्वती ने दोनों बच्चों को बाहर धकेल दिया। मासूम बच्चों का कहना है कि मां बस में फंस गई। हम चिल्लाते रहे मगर कोई बस के अंदर नहीं घुस सका। गोविंद कहते हैं कि अभी तक 40-50 हजार रुपये का कर्जा हो गया। हमीरपुर से मथुरा के चक्कर काटते हुए थक गया हूं। मथुरा पुलिस को अब साक्ष्य चाहिए। मथुरा से दरोगा को भेजा गया। दरोगा ने प्रधान, लेखपाल सभी के बयान लिए। सारी बातें पूछीं। उनसे भी तमाम सवाल हुए। पुलिस साक्ष्य मांग रही है। अगर पार्वती जिंदा है तो हमें दे दो। गोविंद बताते हैं कि फिर से पुलिस ने उन्हें मथुरा बुलाया है। आखिर पुलिस क्या चाहती है। वह सवाल उठाते हैं ..चश्मदीद बच्चों के बयानों पर क्या भरोसा नहीं हुआ था? इसी तरह बस में सवार हुए बाड़ी, धौलपुर के भोलू का भी डीएनए उनकी बहन और बेटी से मैच नहीं हो सका है। भोलू के परिजन भी मथुरा के कई चक्कर काटकर थक चुके हैं। बहन सितारा का कहना है कि अब पुलिस जो पूछती है, वह बता देते हैं। हमारा भाई तो लौटकर आएगा नहीं। हम क्या करें।
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पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सुरेशचंद्र रावत का कहना है कि बस हादसे में जिन लोगों का डीएनए मैच नहीं किया है। उनके बस में सवार होने के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। दोनों के गांवों में पुलिस को भेजा था। साक्ष्य संकलित किए गए हैं। ताकि उन्हें मृतक घोषित किया जा सके।
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