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150 बरस पुरानी मस्जिद में फिर गूंज उठी अजान
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 08 May 2015 11:59 PM IST
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उपद्रव के बाद पहली जुमे की नमाज सौहार्द की तारीख बन गई। बुधवार को यहां धार्मिक स्थलों पर तोड़फोड़ के बाद कर्फ्यू से सन्नाटे में नमाज भी मस्जिद में नहीं अदा की जा रही थी। लेकिन शुक्रवार को डेढ़ सौ बरस पुरानी मस्जिद में अजान हुई और 13 लोगों ने नमाज अदा कर कस्बे में अमन की दुआ मांगी। इस दरम्यान मस्जिद के सामने की सभी खुली दुकानों से भाईचारे का पैगाम निकल रहा था।
जुमे की नमाज को लेकर सौंख कस्बे के प्रारंभ से आखिर तक संगीनों का साया था। मुख्य बाजार में दो दिन बाद अच्छी-खासी चहल पहल थी लेकिन मस्जिद के आसपास सूनापन था। यहां सबसे पहले इमाम जियाउल्लाह पहुंचे। आसपास के दुकानदार मस्जिद की ओर निगाह लगाए थे और उन्हें माहौल सुधार के बीच नमाज जरूर अदा होने की उम्मीद थी। कुछ देर बाद एक-एक कर 13 नमाजी मस्जिद के भीतर पहुंचे। दोपहर 1:44 पर यहां अजान शुरू हुई। इसके बाद नमाज अदा की गई।
नमाज अदा करने के दौरान आसपास की सभी दुकानों पर सन्नाटा था। दूसरे मजहब के यहां के दुकानदार जरूर अपनी दुकानों पर बैठे थे। नमाजी बाहर निकले तो दुकानदारों ने उनका हाल पूछा। चंद मिनट की बातचीत के बाद नमाजी मस्जिद से आगे बढ़े। सकुशल नमाज अदा होने और मुख्य बाजार में चहलपहल इन्हें कुछ सुकून दे रही थी लेकिन सुरक्षा की भावना नहीं जागृत हो सकी।
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मस्जिद के इमाम जियाउल्लाह पांच साल से इस मस्जिद में रहते थे अब उनके जेहन में इतना डर है कि वह यहां रुकना मुनासिब नहीं समझते। 150 बरस पुरानी मस्जिद में पहली दफा ऐसा हुआ कि दो दिन नमाज नहीं अदा की गई। वह खुद मथुरा रह रहे थे लेकिन आज जुमे की नमाज के लिए इस मस्जिद में पहुंचे। इमाम कहते हैं कि आज दस लोग सौंख के और तीन लोग मथुरा से यहां नमाज पढ़ने आए। माहौल ठीक होने का उन्हें यकीन है और इस बात की खुशी है कि चलो चंद लोग ही सही पर नमाज तो पढ़ी गई। उन्होंने अमन सलामती की गुजारिश भी की। मथुरा से आए जमालुद्दीन कुरैशी फख्र से बोले कि हमें खुशी है कि दस लोग सौंख के नमाज पढ़ने आए।
जुमे की नमाज के बाद आगे आरोपी की गली में सन्नाटा पहले की तरह कायम है। संप्रदाय विशेष की बस्ती में अधिकांश घरों पर ताले लटके हैं। चंद बुजुर्ग लोग घर की दहलीज पर बैठे यही कहते हैं कि हम कहां जाएंगे, हम तो यहीं रहेंगे और हमारे पड़ोस वाले हमारी सुरक्षा कर रहे हैं, उपद्रव तो बाहर से आए लोगों ने किया।
सौंख प्रकरण
मथुरा के सौंख में तीन मई को एक समुदाय के युवक द्वारा दूसरे समुदाय की युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने के बाद से तनाव के हालात थे। तीन मई को ही कोसी में युवक-युवती को पकड़ लिया था लेकिन पुलिस टीम पर हमला कर उनको छुड़ा लिया गया। युवती के बरामद न होने पर सौंख में तनाव बढ़ता गया। छह मई को कस्बे में एक समुदाय विशेष के धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ और आगजनी की गई।
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जुमे की नमाज को लेकर सौंख कस्बे के प्रारंभ से आखिर तक संगीनों का साया था। मुख्य बाजार में दो दिन बाद अच्छी-खासी चहल पहल थी लेकिन मस्जिद के आसपास सूनापन था। यहां सबसे पहले इमाम जियाउल्लाह पहुंचे। आसपास के दुकानदार मस्जिद की ओर निगाह लगाए थे और उन्हें माहौल सुधार के बीच नमाज जरूर अदा होने की उम्मीद थी। कुछ देर बाद एक-एक कर 13 नमाजी मस्जिद के भीतर पहुंचे। दोपहर 1:44 पर यहां अजान शुरू हुई। इसके बाद नमाज अदा की गई।
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नमाज अदा करने के दौरान आसपास की सभी दुकानों पर सन्नाटा था। दूसरे मजहब के यहां के दुकानदार जरूर अपनी दुकानों पर बैठे थे। नमाजी बाहर निकले तो दुकानदारों ने उनका हाल पूछा। चंद मिनट की बातचीत के बाद नमाजी मस्जिद से आगे बढ़े। सकुशल नमाज अदा होने और मुख्य बाजार में चहलपहल इन्हें कुछ सुकून दे रही थी लेकिन सुरक्षा की भावना नहीं जागृत हो सकी।
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मस्जिद के इमाम जियाउल्लाह पांच साल से इस मस्जिद में रहते थे अब उनके जेहन में इतना डर है कि वह यहां रुकना मुनासिब नहीं समझते। 150 बरस पुरानी मस्जिद में पहली दफा ऐसा हुआ कि दो दिन नमाज नहीं अदा की गई। वह खुद मथुरा रह रहे थे लेकिन आज जुमे की नमाज के लिए इस मस्जिद में पहुंचे। इमाम कहते हैं कि आज दस लोग सौंख के और तीन लोग मथुरा से यहां नमाज पढ़ने आए। माहौल ठीक होने का उन्हें यकीन है और इस बात की खुशी है कि चलो चंद लोग ही सही पर नमाज तो पढ़ी गई। उन्होंने अमन सलामती की गुजारिश भी की। मथुरा से आए जमालुद्दीन कुरैशी फख्र से बोले कि हमें खुशी है कि दस लोग सौंख के नमाज पढ़ने आए।
जुमे की नमाज के बाद आगे आरोपी की गली में सन्नाटा पहले की तरह कायम है। संप्रदाय विशेष की बस्ती में अधिकांश घरों पर ताले लटके हैं। चंद बुजुर्ग लोग घर की दहलीज पर बैठे यही कहते हैं कि हम कहां जाएंगे, हम तो यहीं रहेंगे और हमारे पड़ोस वाले हमारी सुरक्षा कर रहे हैं, उपद्रव तो बाहर से आए लोगों ने किया।
सौंख प्रकरण
मथुरा के सौंख में तीन मई को एक समुदाय के युवक द्वारा दूसरे समुदाय की युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने के बाद से तनाव के हालात थे। तीन मई को ही कोसी में युवक-युवती को पकड़ लिया था लेकिन पुलिस टीम पर हमला कर उनको छुड़ा लिया गया। युवती के बरामद न होने पर सौंख में तनाव बढ़ता गया। छह मई को कस्बे में एक समुदाय विशेष के धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ और आगजनी की गई।