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UP: अब धूप नहीं करेगी त्वचा पर वार! GLA यूनिवर्सिटी ने बनाया ऐसा देसी लोशन, मिला भारत सरकार का पेटेंट
Sat, 04 Jul 2026 12:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 12:09 PM IST
सार
मथुरा के जीएलए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक तेलों से तैयार एसपीएफ-25 युक्त सन प्रोटेक्शन लोशन विकसित कर भारत सरकार से पेटेंट हासिल किया है। यह लोशन तेज धूप में काम करने वाले लोगों की त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों और त्वचा कैंसर के खतरे से बचाने में सहायक हो सकता है।
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जीएलए विश्वविद्यालय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मथुरा के जीएलए विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च (आईपीआर) के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने चिकित्सा एवं कॉस्मेटिक विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। विश्वविद्यालय की ओर से विकसित ऑयल-इन-वाटर इमल्शन कॉस्मेटिक कंपोजिशन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा पेटेंट ग्रांट किया गया है।
प्राकृतिक तेलों से बना यह विशेष लोशन त्वचा को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से बचाएगा, जो खेतों में काम करने वाले किसान, निर्माण श्रमिक, सुरक्षा कर्मियों और सड़क पर काम करने वाले मजदूरों के लिए वरदान साबित हो सकता है। लगातार तेज धूप के संपर्क में रहने से समय से पहले त्वचा की क्षति और त्वचा कैंसर (स्किन कैंसर) का खतरा बढ़ जाता है।
लोशन की खास बात यह है कि इसमें चमेली का तेल और राइस ब्रान ऑयल जैसे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया गया है। यह सन प्रोटेक्शन फैक्टर (एसपीएफ 25) से अधिक सुरक्षा प्रदान करती है और इसमें उत्कृष्ट एंटीऑक्सीडेंट गुण हैं।
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इस महत्वपूर्ण शोध को विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. शशांक चतुर्वेदी, एसोसिएट प्रो. डॉ. अनुज गर्ग तथा बीफार्म की छात्रा मुस्कान गांधी ने मिलकर पूरा किया है। डॉ. शशांक ने बताया कि यह शोध समाज के उस बड़े वर्ग के लिए है जो धूप में पसीना बहाता है। डॉ. अनुज गर्ग ने कहा कि वर्तमान में त्वचा कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में यह लोशन इस जोखिम को कम करने में सहायक होगा।
विभाग के डायरेक्टर प्रो. कमल शाह ने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़ा योगदान बताया। डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. कमल शर्मा ने इसे यूनिवर्सिटी के मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम की सफलता कहा। कुलपति प्रो. अनूप गुप्ता ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि जीएलए में हमेशा समाज और मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाता है। वि.
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प्राकृतिक तेलों से बना यह विशेष लोशन त्वचा को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से बचाएगा, जो खेतों में काम करने वाले किसान, निर्माण श्रमिक, सुरक्षा कर्मियों और सड़क पर काम करने वाले मजदूरों के लिए वरदान साबित हो सकता है। लगातार तेज धूप के संपर्क में रहने से समय से पहले त्वचा की क्षति और त्वचा कैंसर (स्किन कैंसर) का खतरा बढ़ जाता है।
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लोशन की खास बात यह है कि इसमें चमेली का तेल और राइस ब्रान ऑयल जैसे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया गया है। यह सन प्रोटेक्शन फैक्टर (एसपीएफ 25) से अधिक सुरक्षा प्रदान करती है और इसमें उत्कृष्ट एंटीऑक्सीडेंट गुण हैं।
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इस महत्वपूर्ण शोध को विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. शशांक चतुर्वेदी, एसोसिएट प्रो. डॉ. अनुज गर्ग तथा बीफार्म की छात्रा मुस्कान गांधी ने मिलकर पूरा किया है। डॉ. शशांक ने बताया कि यह शोध समाज के उस बड़े वर्ग के लिए है जो धूप में पसीना बहाता है। डॉ. अनुज गर्ग ने कहा कि वर्तमान में त्वचा कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में यह लोशन इस जोखिम को कम करने में सहायक होगा।
विभाग के डायरेक्टर प्रो. कमल शाह ने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़ा योगदान बताया। डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. कमल शर्मा ने इसे यूनिवर्सिटी के मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम की सफलता कहा। कुलपति प्रो. अनूप गुप्ता ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि जीएलए में हमेशा समाज और मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाता है। वि.