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मथुरा, आगरा, मैनपुरी की पराग डेयरी का अस्तित्व समाप्त
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 06 Feb 2016 11:01 PM IST
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ब्रज में जहां दूध, दही की नदियां बहती थीं अब उसी ब्रज में दूध की सरकारी पराग डेयरी योजना दम तोड़ गई। मथुरा, आगरा और मैनपुरी में वर्ष 1965 में स्थापित की गई सहकारी दुग्ध समिति (पराग डेरी) की योजनाओं को बंद कर अब फीरोजाबाद की समिति में विलय कर दिया गया है।
एक फरवरी को दुग्ध सहकारी समिति दुग्ध आयुक्त ने इसके आदेश कर दिए हैं। इसके बाद समिति के अधिकारियों ने संघ के खाते सीज करा दिए। तीनों समितियों को लगातार घाटे का सौदा बताकर ऐसा करना बताया जा रहा है।
मथुरा में दुग्ध सहकारी समिति की स्थापना हाईवे पर वर्ष 1965 में की गई थी। इसमें समिति के लिए 14 एकड़ जमीन खरीदी गई और 30,000 लीटर दूध उत्पादन होने के बाद उसे रखने के लिए मशीनें लगाई गई थीं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 400 से अधिक सरकारी और निजी दुग्ध संग्रहण केंद्र बनाए गए थे।
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इससे जिले के 10,000 से अधिक किसान लाभान्वित होने लगे। जब 8000 लीटर दूध पराग डेयरी पर इकट्ठा हुआ तो यहां दही, घी, पनीर, मक्खन, फ्लेवर्ड मिल्क, पेड़ा सहित कई उत्पाद भी बनने लगे। सरप्लस दूध होने पर उसकी सप्लाई मदर डेयरी बल्लभगढ़ को जाने लगी।
इसमें कुल 25 कर्मचारी रखे गए, लेकिन अधिकारियों की नकारात्मक शैली और शासन की अनदेखी के चलते ब्रज की तीन पराग डेरी योजनाएं घाटे में चली गईं। अब उन तीनों योजनाओं को घाटे से उबारने के बजाए इन्हें बंद कर फीरोजाबाद की पराग डेयरी में विलय कर दिया गया है।
इस मामले में एक फरवरी को दुग्ध आयुक्त निबंधक दुग्ध सहकारी समिति अर्चना अग्रवाल ने मथुरा, आगरा और मैनपुरी की तीनों दुग्ध समिति का अस्तित्व समाप्त करते हुए फीरोजाबाद की समिति में विलय करने के आदेश कर दिए हैं।
ज्यादातर केंद्र हुए बंद, किसान लाभ से वंचित
मथुरा में खुली पराग डेयरी योजना के लिए 400 स्थानों पर दुग्ध संग्रहण केंद्र खोले गए। साथ ही आठ हजार पशु पालकों को यहां टीकाकरण, दवाइयों की सुविधा दी जाती थी। इसके अलावा बेरोजगारों को दूध के रोजगार से जोड़ने को टेस्टिंग मशीन और दूध जुटाने को बर्तन, 50,000 रुपये का आर्थिक लाभ और प्रशिक्षण दिया जाता था।
दुग्ध संघ के खाते हुए सीज, किसान नेता मौन
दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की आयुक्त के एक फरवरी को जारी पत्र के आते ही समिति के अधिकारियों ने संघ के खाते सीज करा दिए। किसानों के हाथ से छिनी इस योजना पर मथुरा के सारे किसान नेता मौन रहे। किसानों के हित की बात कहकर आए दिन जाम, धरना प्रदर्शन और हाईवे, एक्सप्रेसवे जाम करने वाले किसी किसान नेता ने इस मामले के संबंध में आवाज नहीं उठाई।
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एक फरवरी को दुग्ध सहकारी समिति दुग्ध आयुक्त ने इसके आदेश कर दिए हैं। इसके बाद समिति के अधिकारियों ने संघ के खाते सीज करा दिए। तीनों समितियों को लगातार घाटे का सौदा बताकर ऐसा करना बताया जा रहा है।
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मथुरा में दुग्ध सहकारी समिति की स्थापना हाईवे पर वर्ष 1965 में की गई थी। इसमें समिति के लिए 14 एकड़ जमीन खरीदी गई और 30,000 लीटर दूध उत्पादन होने के बाद उसे रखने के लिए मशीनें लगाई गई थीं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 400 से अधिक सरकारी और निजी दुग्ध संग्रहण केंद्र बनाए गए थे।
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इससे जिले के 10,000 से अधिक किसान लाभान्वित होने लगे। जब 8000 लीटर दूध पराग डेयरी पर इकट्ठा हुआ तो यहां दही, घी, पनीर, मक्खन, फ्लेवर्ड मिल्क, पेड़ा सहित कई उत्पाद भी बनने लगे। सरप्लस दूध होने पर उसकी सप्लाई मदर डेयरी बल्लभगढ़ को जाने लगी।
इसमें कुल 25 कर्मचारी रखे गए, लेकिन अधिकारियों की नकारात्मक शैली और शासन की अनदेखी के चलते ब्रज की तीन पराग डेरी योजनाएं घाटे में चली गईं। अब उन तीनों योजनाओं को घाटे से उबारने के बजाए इन्हें बंद कर फीरोजाबाद की पराग डेयरी में विलय कर दिया गया है।
इस मामले में एक फरवरी को दुग्ध आयुक्त निबंधक दुग्ध सहकारी समिति अर्चना अग्रवाल ने मथुरा, आगरा और मैनपुरी की तीनों दुग्ध समिति का अस्तित्व समाप्त करते हुए फीरोजाबाद की समिति में विलय करने के आदेश कर दिए हैं।
ज्यादातर केंद्र हुए बंद, किसान लाभ से वंचित
मथुरा में खुली पराग डेयरी योजना के लिए 400 स्थानों पर दुग्ध संग्रहण केंद्र खोले गए। साथ ही आठ हजार पशु पालकों को यहां टीकाकरण, दवाइयों की सुविधा दी जाती थी। इसके अलावा बेरोजगारों को दूध के रोजगार से जोड़ने को टेस्टिंग मशीन और दूध जुटाने को बर्तन, 50,000 रुपये का आर्थिक लाभ और प्रशिक्षण दिया जाता था।
दुग्ध संघ के खाते हुए सीज, किसान नेता मौन
दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की आयुक्त के एक फरवरी को जारी पत्र के आते ही समिति के अधिकारियों ने संघ के खाते सीज करा दिए। किसानों के हाथ से छिनी इस योजना पर मथुरा के सारे किसान नेता मौन रहे। किसानों के हित की बात कहकर आए दिन जाम, धरना प्रदर्शन और हाईवे, एक्सप्रेसवे जाम करने वाले किसी किसान नेता ने इस मामले के संबंध में आवाज नहीं उठाई।