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मथुरा-वृंदावन वैष्णव एवं सांस्कृतिक केंद्र : राम नाईक
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 19 Nov 2015 12:06 AM IST
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चैतन्य महाप्रभु ब्रज वृंदावन आगमन पंचशती महोत्सव के बुधवार को आयोजित शुभारंभ समारोह में शामिल होने आए प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि मथुरा-वृंदावन वैष्णव एवं सांस्कृतिक केंद्र है। यहां आबादी ज्यादा है या फिर मंदिर कहना मुश्किल है।
राज्यपाल ने कहा कि आज यहां कोई भी गतिविधि होती है, झट से अमेरिका में लोगों को इसकी जानकारी मिल जाती है। यह आधुनिक तकनीक का कमाल है, लेकिन 500 साल पहले चैतन्य महाप्रभु ने बगैर इन संसाधनों के ही वैष्णव धर्म का यहां से प्रचार किया।
हरिनाम जपते हुए उन्होंने बगैर जाति, धर्म और संप्रदाय के ही लोगों को एकता के सूत्र में बांधने का संदेश दिया। इतिहास बताता है कि मथुरा-वृंदावन को खड़ा करने का काम चैतन्य महाप्रभु ने किया, जो वैष्णव धर्म और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में सामने है।
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ब्रज भूमि को दुनिया में प्रचारित करने की इच्छा: हेमामालिनी
वृंदावन विकास में सहयोग कर रही केंद्र और राज्य सरकार
वृंदावन। राधे-राधे और हरे कृष्ण-कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे के साथ उद्बोधन शुरू करने वाली सांसद हेमामालिनी ने कहा कि उनकी इच्छा इस तेजस्वनी स्थल को देश और दुनिया में प्रचारित करने की है। इसके लिए उनके प्रयास चल रहे हैं।
सांसद हेमामालिनी ने वृंदावन विकास में प्रदेश और केंद्र सरकार के सहयोग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले वृंदावन को लोग भूल गए थे। चैतन्य महाप्रभु ने इसकी खोज की, बल्कि श्रीकृष्ण के लीला स्थलों की भी पहचान कराई। 1558 में मुगल शासक ने वृंदावन में इसके लिए जमीन उपलब्ध कराई।
राष्ट्रपति की हेमामालिनी से गुफ्तगू
वृंदावन। चैतन्य महाप्रभु ब्रज वृंदावन आगमन पंचशती महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ सांसद हेमामालिनी ने मंच साझा किया।
जब कार्यक्रम का समापन हुआ तो मंच से उतरते वक्त राष्ट्रपति ने बढ़ते कदमों के साथ सांसद हेमामालिनी को संबोधित किया। राष्ट्रपति के मुख से अपना नाम सुन सांसद उनकी ओर बढ़ीं, लेकिन पर्स उठाकर लाने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति से वक्त मांगा। इस दौरान राष्ट्रपति के मंच से उतरने के लिए बढ़ते कदम कुछ पल के लिए ठहर गए।
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राज्यपाल ने कहा कि आज यहां कोई भी गतिविधि होती है, झट से अमेरिका में लोगों को इसकी जानकारी मिल जाती है। यह आधुनिक तकनीक का कमाल है, लेकिन 500 साल पहले चैतन्य महाप्रभु ने बगैर इन संसाधनों के ही वैष्णव धर्म का यहां से प्रचार किया।
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हरिनाम जपते हुए उन्होंने बगैर जाति, धर्म और संप्रदाय के ही लोगों को एकता के सूत्र में बांधने का संदेश दिया। इतिहास बताता है कि मथुरा-वृंदावन को खड़ा करने का काम चैतन्य महाप्रभु ने किया, जो वैष्णव धर्म और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में सामने है।
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ब्रज भूमि को दुनिया में प्रचारित करने की इच्छा: हेमामालिनी
वृंदावन विकास में सहयोग कर रही केंद्र और राज्य सरकार
वृंदावन। राधे-राधे और हरे कृष्ण-कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे के साथ उद्बोधन शुरू करने वाली सांसद हेमामालिनी ने कहा कि उनकी इच्छा इस तेजस्वनी स्थल को देश और दुनिया में प्रचारित करने की है। इसके लिए उनके प्रयास चल रहे हैं।
सांसद हेमामालिनी ने वृंदावन विकास में प्रदेश और केंद्र सरकार के सहयोग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले वृंदावन को लोग भूल गए थे। चैतन्य महाप्रभु ने इसकी खोज की, बल्कि श्रीकृष्ण के लीला स्थलों की भी पहचान कराई। 1558 में मुगल शासक ने वृंदावन में इसके लिए जमीन उपलब्ध कराई।
राष्ट्रपति की हेमामालिनी से गुफ्तगू
वृंदावन। चैतन्य महाप्रभु ब्रज वृंदावन आगमन पंचशती महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ सांसद हेमामालिनी ने मंच साझा किया।
जब कार्यक्रम का समापन हुआ तो मंच से उतरते वक्त राष्ट्रपति ने बढ़ते कदमों के साथ सांसद हेमामालिनी को संबोधित किया। राष्ट्रपति के मुख से अपना नाम सुन सांसद उनकी ओर बढ़ीं, लेकिन पर्स उठाकर लाने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति से वक्त मांगा। इस दौरान राष्ट्रपति के मंच से उतरने के लिए बढ़ते कदम कुछ पल के लिए ठहर गए।