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Mathura News: अब विदेशों में महकेगी ब्रज के बासमती चावल की खुशबू
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सुरीर क्षेत्र में खेत मे खड़ी धान की फसल।
अम्बर अग्निहोत्री
मथुरा। ब्रज की मिट्टी में पैदा होने वाले सुगंधित बासमती चावल की खुशबू अब विदेशों में भी महकेगी। यहां बासमती चावल की खरीद के लिए आठ से अधिक निर्यातक मथुरा की मंडियों से धान खरीदकर बासमती चावल विदेशों तक भेजेंगे। कृषि विभाग के अधिकारी भी इस बार धान की खेती करने वाले किसानों पर ध्यान दे रहे हैं।
जिले के 10 ब्लॉकों में 38 हजार 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में सुगंधित धान की खेती हो रही है। इसमें करीब 10-11 लाख क्विंटल धान का उत्पादन होता है। यहां पर सबसे ज्यादा सुगंधित बासमती चावल ही होता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों को बासमती की पैदावार करने के लिए लगातार चौपाल लगाकर जागरूक किया जा रहा है। अपर जिला कृषि अधिकारी स्मृति सिंह ने बताया कि सुगंधित बासमती चावल का लगातार लक्ष्य बढ़ाया जा रहा है। 2024 में 36,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी फसल की गई थी। इस बार किसानों ने जागरूकता दिखाते हुए 2000 हेक्टेयर अधिक क्षेत्रफल में यह बासमती चावल की फसल की है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह खरीद यहां के स्थानीय कारोबारियों के साथ निर्यातक कर रहे हैं। इनमें एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीईडीए) और एलटी फूड के रूप में बड़े निर्यातक मौजूद हैं।
मंडी के आढ़तियों का कहना है कि मथुरा में उत्पादित बासमती चावल-1509 और सुगंधा विदेशों के लिए निर्यात होता है। इसे ईरान, ईराक, सऊदी अरब, कुवैत आदि देशों में भेजा जाता है। अनाज मंडी के आढ़ती सुनील चौधरी ने बताया कि बासमती धान की 80 प्रतिशत खरीद विदेशी निर्यात के लिए ही हो रही है। राया के किसान राजकुमार ने बताया कि बासमती चावल बिक्री करने पर पिछले साल 3800 से 4100 रुपये तक की कीमत मिली थी, इस बार भी उन्होंने इस चावल की पैदावार की है। संवाद
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1509 और सुगंधा अधिक पसंद
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 38,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। इसमें बासमती की किस्म 1509, 1692, 1847, 1718, 1121 शामिल हैं। इसमें निर्यात के लिए बासमती की 1509 और सुगंधा को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। इसलिए किसान यह ज्यादा करते हैं।
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मथुरा में धान की अच्छी किस्म की खेती होती है। इनकी खरीद के लिए निर्यातक भी यहां पहुंचते हैं। विदेशों में मथुरा के चावल का बड़ा निर्यात है। यहां पर किसान भी अच्छी तरह से सुगंधित बासमती की पैदावार करते हैं। - आवेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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मथुरा। ब्रज की मिट्टी में पैदा होने वाले सुगंधित बासमती चावल की खुशबू अब विदेशों में भी महकेगी। यहां बासमती चावल की खरीद के लिए आठ से अधिक निर्यातक मथुरा की मंडियों से धान खरीदकर बासमती चावल विदेशों तक भेजेंगे। कृषि विभाग के अधिकारी भी इस बार धान की खेती करने वाले किसानों पर ध्यान दे रहे हैं।
जिले के 10 ब्लॉकों में 38 हजार 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में सुगंधित धान की खेती हो रही है। इसमें करीब 10-11 लाख क्विंटल धान का उत्पादन होता है। यहां पर सबसे ज्यादा सुगंधित बासमती चावल ही होता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों को बासमती की पैदावार करने के लिए लगातार चौपाल लगाकर जागरूक किया जा रहा है। अपर जिला कृषि अधिकारी स्मृति सिंह ने बताया कि सुगंधित बासमती चावल का लगातार लक्ष्य बढ़ाया जा रहा है। 2024 में 36,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी फसल की गई थी। इस बार किसानों ने जागरूकता दिखाते हुए 2000 हेक्टेयर अधिक क्षेत्रफल में यह बासमती चावल की फसल की है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह खरीद यहां के स्थानीय कारोबारियों के साथ निर्यातक कर रहे हैं। इनमें एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीईडीए) और एलटी फूड के रूप में बड़े निर्यातक मौजूद हैं।
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मंडी के आढ़तियों का कहना है कि मथुरा में उत्पादित बासमती चावल-1509 और सुगंधा विदेशों के लिए निर्यात होता है। इसे ईरान, ईराक, सऊदी अरब, कुवैत आदि देशों में भेजा जाता है। अनाज मंडी के आढ़ती सुनील चौधरी ने बताया कि बासमती धान की 80 प्रतिशत खरीद विदेशी निर्यात के लिए ही हो रही है। राया के किसान राजकुमार ने बताया कि बासमती चावल बिक्री करने पर पिछले साल 3800 से 4100 रुपये तक की कीमत मिली थी, इस बार भी उन्होंने इस चावल की पैदावार की है। संवाद
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1509 और सुगंधा अधिक पसंद
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 38,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। इसमें बासमती की किस्म 1509, 1692, 1847, 1718, 1121 शामिल हैं। इसमें निर्यात के लिए बासमती की 1509 और सुगंधा को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। इसलिए किसान यह ज्यादा करते हैं।
मथुरा में धान की अच्छी किस्म की खेती होती है। इनकी खरीद के लिए निर्यातक भी यहां पहुंचते हैं। विदेशों में मथुरा के चावल का बड़ा निर्यात है। यहां पर किसान भी अच्छी तरह से सुगंधित बासमती की पैदावार करते हैं। - आवेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी