{"_id":"cc3525a9de4ad9105a458ef5dc4b3d62","slug":"now-it-is-problem-for-selling-the-wheat-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नमूने फेल हुए तो रोक दी गेहूं की खरीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नमूने फेल हुए तो रोक दी गेहूं की खरीद
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 22 Apr 2015 11:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय खाद्य निगम की ओर से जिले में सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीदे गए गेहूं के सात नमूने फेल किए जाने के बाद किसानों की चिंता और बढ़ गई है। हालात यह हैं कि गांवों में स्थापित क्रय केंद्रों पर खरीद रोक दी गई है।
सरकारी एजेंसियों का कहना है कि किसानों से खरीदे गए गेहूं को एफसीआई ने स्वीकार नहीं किया तो उसका वह क्या करेंगे। किसानों को मजबूरन खुले बाजार में सस्ते दामों को अपनी उपज बेचनी पड़ रही है।
जिले में इस बार करीब दो लाख हेेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल बोई गई। इसमें से अधिकतर फसल मार्च और अप्रैल माह में हुई बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि में तबाह हो चुकी है। इससे बचकर जो फसल किसानों के घर पहुंची है उसकी गुणवत्ता एफसीआई के मानकों पर खरी नहीं रही है।
विज्ञापन
हालांकि केंद्र सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए गेहूं की गुणवत्ता में छूट प्रदान की है, लेकिन इसके बाद भी जिले का गेहूं मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है।
इस बार जिले में सहकारी समितियां, भारतीय खाद्य निगम, खाद्य एवं विपणन विभाग और यूपी स्टेट एग्रो की ओर से गेहूं खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। अब तक इन केंद्रों के माध्यम से खरीदे गए गेहूं के नमूने जब केंद्र सरकार की खरीद एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेजे गए तो वह मानकों पर फेल हो गए। इसमें गेहूं के पांच नमूने पीसीएफ, एक एफसीआई टैंटीगांव का और एक खाद्य एवं विपणन विभाग का मंडी से एकत्रित नमूना शामिल था।
जिले में क्रय केंद्र
खाद्य एवं विपणन विभाग 04 केंद्र
पीसीएफ 69 केंद्र
यूपी स्टेट एग्रो 05 केंद्र
एफसीआई 01 केंद्र
विज्ञापन
सरकारी एजेंसियों का कहना है कि किसानों से खरीदे गए गेहूं को एफसीआई ने स्वीकार नहीं किया तो उसका वह क्या करेंगे। किसानों को मजबूरन खुले बाजार में सस्ते दामों को अपनी उपज बेचनी पड़ रही है।
विज्ञापन
जिले में इस बार करीब दो लाख हेेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल बोई गई। इसमें से अधिकतर फसल मार्च और अप्रैल माह में हुई बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि में तबाह हो चुकी है। इससे बचकर जो फसल किसानों के घर पहुंची है उसकी गुणवत्ता एफसीआई के मानकों पर खरी नहीं रही है।
विज्ञापन
हालांकि केंद्र सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए गेहूं की गुणवत्ता में छूट प्रदान की है, लेकिन इसके बाद भी जिले का गेहूं मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है।
इस बार जिले में सहकारी समितियां, भारतीय खाद्य निगम, खाद्य एवं विपणन विभाग और यूपी स्टेट एग्रो की ओर से गेहूं खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। अब तक इन केंद्रों के माध्यम से खरीदे गए गेहूं के नमूने जब केंद्र सरकार की खरीद एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेजे गए तो वह मानकों पर फेल हो गए। इसमें गेहूं के पांच नमूने पीसीएफ, एक एफसीआई टैंटीगांव का और एक खाद्य एवं विपणन विभाग का मंडी से एकत्रित नमूना शामिल था।
जिले में क्रय केंद्र
खाद्य एवं विपणन विभाग 04 केंद्र
पीसीएफ 69 केंद्र
यूपी स्टेट एग्रो 05 केंद्र
एफसीआई 01 केंद्र