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Mathura News: आरोपी ठेकेदार बनवारी और सुधीर का नहीं लगा सुराग
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- पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वांचल के कई जिलों में दी दबिश
- निलंबित विभागीय अधिकारी सिफारिशों को लगा रहे दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। कृष्ण विहार कॉलोनी में धराशायी हुई 2.50 लाख लीटर की पानी की टंकी हादसे के आरोपी ठेकेदार बनवारी और सुधीर मिश्रा अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं। दोनों ही आगरा के रहने वाले हैं। पुलिस को पिछले दिनों इनके दिल्ली-एनसीआर में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस को इनके पूर्वांचल में छिपे होने का जानकारी मिली। वहां भी पुलिस ने दबिश दी। मगर, खाली हाथ ही लौटना पड़ा।
इधर, हादसे के लिए प्रथम दृष्टया सरकारी कार्य के निर्वहन की जिम्मेदार में लापरवाह पाए गए मथुरा पेयजल पुनर्गठन योजना थ्रू गोकुल बैराज पार्ट-1 योजना पर तैनात सहायक अभियंता ललित मोहन, जू. अभियंता शोभित कुमार, वीरेंद्र पाल, रविंद्र प्रताप सिंह और अधिशासी अभियंता दयानंद शर्मा को निलंबित करते हुए इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। तत्कालीन सहायक अभियंता दिव्यांशु कुमार सिंह के विरुद्ध अनुशासनिक जांच बैठाई गई है। अधिशासी अभियंता महराज सिंह, कुमकुम गंगवार व तत्कालीन सहायक अभियंता राम प्रकाश यादव पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई के आदेश दिए हैं।इनमें से सहायक अभियंता खेमकरण की 2022 में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। टंकी का कुछ हिस्सा इनके समय में बना था। वहीं, उप्र जल निगम ग्रामीण, लखनऊ से सेवानिवृत्त हुए एक्सईएन योगेश कुमार शर्मा भी निर्माण के समय मथुरा में तैनात थे। अधिशासी अभियंता महाराज सिंह भी पिछले साल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विभागीय कार्रवाई में फंसे अभियंताओं में खलबली मची हुई है। वह सिफारिशों के लिए दौड़ लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उप्र के एक कद्दावर मंत्री ने इस हादसे के जिम्मेदारों की सिफारिश के संबंध में कुछ अधिकारियों को भी फोन किया है। मगर, मामला सीधे सीएम योगी की निगरानी में होने के चलते सिफारिशों को अधिकारियों ने दरकिनार कर दिया है। बताया यह भी जा रहा है कि प्रशासनिक जांच में जलकल के एक अभियंता का भी नाम सामने आया है। उस पर भी जल्द कार्रवाई हो सकती है।
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- निलंबित विभागीय अधिकारी सिफारिशों को लगा रहे दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। कृष्ण विहार कॉलोनी में धराशायी हुई 2.50 लाख लीटर की पानी की टंकी हादसे के आरोपी ठेकेदार बनवारी और सुधीर मिश्रा अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं। दोनों ही आगरा के रहने वाले हैं। पुलिस को पिछले दिनों इनके दिल्ली-एनसीआर में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस को इनके पूर्वांचल में छिपे होने का जानकारी मिली। वहां भी पुलिस ने दबिश दी। मगर, खाली हाथ ही लौटना पड़ा।
इधर, हादसे के लिए प्रथम दृष्टया सरकारी कार्य के निर्वहन की जिम्मेदार में लापरवाह पाए गए मथुरा पेयजल पुनर्गठन योजना थ्रू गोकुल बैराज पार्ट-1 योजना पर तैनात सहायक अभियंता ललित मोहन, जू. अभियंता शोभित कुमार, वीरेंद्र पाल, रविंद्र प्रताप सिंह और अधिशासी अभियंता दयानंद शर्मा को निलंबित करते हुए इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। तत्कालीन सहायक अभियंता दिव्यांशु कुमार सिंह के विरुद्ध अनुशासनिक जांच बैठाई गई है। अधिशासी अभियंता महराज सिंह, कुमकुम गंगवार व तत्कालीन सहायक अभियंता राम प्रकाश यादव पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई के आदेश दिए हैं।इनमें से सहायक अभियंता खेमकरण की 2022 में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। टंकी का कुछ हिस्सा इनके समय में बना था। वहीं, उप्र जल निगम ग्रामीण, लखनऊ से सेवानिवृत्त हुए एक्सईएन योगेश कुमार शर्मा भी निर्माण के समय मथुरा में तैनात थे। अधिशासी अभियंता महाराज सिंह भी पिछले साल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विभागीय कार्रवाई में फंसे अभियंताओं में खलबली मची हुई है। वह सिफारिशों के लिए दौड़ लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उप्र के एक कद्दावर मंत्री ने इस हादसे के जिम्मेदारों की सिफारिश के संबंध में कुछ अधिकारियों को भी फोन किया है। मगर, मामला सीधे सीएम योगी की निगरानी में होने के चलते सिफारिशों को अधिकारियों ने दरकिनार कर दिया है। बताया यह भी जा रहा है कि प्रशासनिक जांच में जलकल के एक अभियंता का भी नाम सामने आया है। उस पर भी जल्द कार्रवाई हो सकती है।
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