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Mathura News: कचरे को कंचन में बदल रहा नौहझील आरआरसी सेंटर
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आरआरसी सेंटर नौहझील का निरीक्षण करते डीपीआरओ धनंजय जयसवाल।
दीपक गुप्ता
नौहझील। स्वच्छता और स्वावलंबन का संगम देखना हो तो ग्राम पंचायत नौहझील का रुख कीजिए, जहां कूड़ा अब ग्राम पंचायत की तिजोरी भर रहा है। दर्जनों हाथों को काम दे रहा है। मंगलवार को जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) धनंजय जयसवाल ने कस्बे के रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का औचक निरीक्षण किया, तो कार्यप्रणाली देख प्रसन्नता जाहिर की।
आवाज करती मशीनों और मेहनत करते मजदूरों के बीच डीपीआरओ को विकास की एक नई तस्वीर नजर आई। यह सेंटर वर्तमान में राधे कृष्ण प्लास्टिक फर्म के संचालक सुनील अग्रवाल के प्रबंधन में न केवल पर्यावरण को बचा रहा है, बल्कि वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कमाई) के मंत्र को धरातल पर उतार रहा है। निरीक्षण के दौरान डीपीआरओ ने पाया कि नौहझील और आसपास की दर्जनों ग्राम पंचायतों से एकत्रित प्लास्टिक कचरा अब यहां कच्चे माल के रूप में खरीदा जा रहा है। इससे पंचायतों की आय में इजाफा हो रहा है और पूरा क्षेत्र प्लास्टिक मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मशीनों के जरिए पॉलिथिन को पिघलाकर उच्च गुणवत्ता वाला एलडीपीई लम्प्स (गुल्ला) और प्लास्टिक दाना तैयार किया जा रहा है। यहां तैयार गुल्ला पाइप निर्माता कंपनियों को कृषि के लिए एचडीपीई पाइप बनाने के लिए भेजा जा रहा है। वहीं प्लास्टिक दाने से मेज, कुर्सियां और बच्चों के खिलौने तैयार हो रहे हैं। डीपीआरओ धनंजय जयसवाल ने ग्राम प्रधान प्रशांत गुप्ता और संचालक सुनील अग्रवाल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नौहझील ने कचरा निस्तारण का जो मॉडल पेश किया है, वह पूरे जिले के लिए नजीर है। चार माह में लगभग 35 टन प्लास्टिक कूड़ा रिसाइकिल किया जा चुका है। संवाद
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नौहझील। स्वच्छता और स्वावलंबन का संगम देखना हो तो ग्राम पंचायत नौहझील का रुख कीजिए, जहां कूड़ा अब ग्राम पंचायत की तिजोरी भर रहा है। दर्जनों हाथों को काम दे रहा है। मंगलवार को जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) धनंजय जयसवाल ने कस्बे के रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का औचक निरीक्षण किया, तो कार्यप्रणाली देख प्रसन्नता जाहिर की।
आवाज करती मशीनों और मेहनत करते मजदूरों के बीच डीपीआरओ को विकास की एक नई तस्वीर नजर आई। यह सेंटर वर्तमान में राधे कृष्ण प्लास्टिक फर्म के संचालक सुनील अग्रवाल के प्रबंधन में न केवल पर्यावरण को बचा रहा है, बल्कि वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कमाई) के मंत्र को धरातल पर उतार रहा है। निरीक्षण के दौरान डीपीआरओ ने पाया कि नौहझील और आसपास की दर्जनों ग्राम पंचायतों से एकत्रित प्लास्टिक कचरा अब यहां कच्चे माल के रूप में खरीदा जा रहा है। इससे पंचायतों की आय में इजाफा हो रहा है और पूरा क्षेत्र प्लास्टिक मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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मशीनों के जरिए पॉलिथिन को पिघलाकर उच्च गुणवत्ता वाला एलडीपीई लम्प्स (गुल्ला) और प्लास्टिक दाना तैयार किया जा रहा है। यहां तैयार गुल्ला पाइप निर्माता कंपनियों को कृषि के लिए एचडीपीई पाइप बनाने के लिए भेजा जा रहा है। वहीं प्लास्टिक दाने से मेज, कुर्सियां और बच्चों के खिलौने तैयार हो रहे हैं। डीपीआरओ धनंजय जयसवाल ने ग्राम प्रधान प्रशांत गुप्ता और संचालक सुनील अग्रवाल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नौहझील ने कचरा निस्तारण का जो मॉडल पेश किया है, वह पूरे जिले के लिए नजीर है। चार माह में लगभग 35 टन प्लास्टिक कूड़ा रिसाइकिल किया जा चुका है। संवाद
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