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Mathura News: 10 फीसदी से ज्यादा नवजात हो रहे पीलिया का शिकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Sep 2025 12:39 AM IST
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More than 10% of newborns are suffering from jaundice
मथुरा। महिला जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात पीलिया की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। हालांकि चिकित्सक नवजात के ठीक होने के लिए 8 से 10 दिन का इंतजार करते हैं। इसके बाद भी यदि पीलिया ठीक नहीं होता है तो उन्हें एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करना पड़ता है। जिला अस्पताल में प्रतिमाह करीब 300 बच्चे जन्म लेते हैं। इसमें से 35 नवजात ऐसे होते हैं जिन्हें पीलिया के कारण एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराना पड़ रहा है।
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चिकित्सक वैसे इसे नार्मल मानते हैं, लेकिन यदि 8 से 10 दिन के अंदर नवजात में पीलिया के लक्षण खत्म नहीं होते हैं तो अस्पताल में भर्ती कर उनका उपचार किया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल सिंह ने बताया कि यह कोई नई बीमारी नहीं है। मां के हार्मोन की गड़बड़ी के कारण नवजात को पीलिया होता है, लेकिन यह कुछ दिन में स्वयं ही ठीक भी हो जाता है। इसमें नवजात की त्वचा और आंखें पीली दिखाई देती हैं। हालांकि नवजात शिशु का लिवर अपरिपक्व होने के कारण यह एक आम समस्या है और मां का दूध पीने से कुछ दिनों में ही अपने आप ठीक हो जाती है।
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वहीं गंभीर मामलों में संक्रमण, रक्त असंगति या अन्य समस्याओं के कारण नवजात जल्द ठीक नहीं होता है। ऐसी स्थिति में नवजात को एसएनसीयू वार्ड (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती किया जाता है। यहां उन्हें मशीन में रखा जाता है, साथ ही विशेष देखभाल कर उपचार किया जाता है। इस समस्या से पीड़ित प्रतिमाह करीब 30 नवजात एसएनसीयू वार्ड में भर्ती होते हैं।
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पीलिया के यह हैं प्रमुख कारण
मां और बच्चे के ब्लड ग्रुप (जैसे मां का ओ और बच्चे का ए या बी) या आरएच फैक्टर में अंतर होने पर बच्चे की लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी टूट सकती हैं। इससे नवजात को पीलिया होता है। कुछ वायरस या बैक्टीरिया संक्रमण से शिशु को पीलिया हो सकता है। पित्त नलिकाओं में रुकावट के कारण शिशु के लिवर से आंत तक पित्त ले जाने वाली नलिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं। इसके कारण भी नवजात को पीलिया की बीमारी हो जाती है।



इन हालातों में अभिभावक हो जाएं सावधान
नवजात का पीलिया कुछ दिनों में ठीक न हो।
नवजात को संक्रमण हो जाए और पीलिया खत्म न हो।
नवजात ठीक से दूध नहीं पी रहा हो और वजन कम हो रहा हो।
नवजात के सुस्त रहने पर अभिभावक तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
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