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Mathura News: मोहन भागवत करेंगे मलूकदास महाराज की समाधि का पूजन
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जानकारी देते मलूक पीठाधीश्वर डा. राजेंद्रदास महाराज और किशोरदास महाराज।
वृंदावन। श्रीमद्जगद्गुरु मलूकदास महाराज का 452वां जयंती महोत्सव सीताराम की निकुंज अष्टयाम लीला दर्शन और रसचर्चा के साथ मनाया जा रहा है। पानीघाट चौराहा स्थित पहाड़ी बाबा भक्तमाली गोशाला में आयोजित महोत्सव में सात अप्रैल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मलूकदास महाराज की समाधि का पूजन करेंगे।
श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्र पीठाधीश्वर और मलूक पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राजेंद्रदास देवाचार्य ने बताया कि ऐसा आयोजन लगभग 225 वर्ष बाद हो रहा है। इससे पहले यह अयोध्या के कनकभवन में आयोजित किया गया था। कहा रसिक संतों की पदावली और छंदों को गहनता से सुनने के बाद कहीं भी यह भेद नहीं जान पड़ता कि सीताराम की अष्टयाम लीला और श्याम-श्याम में कोई भिन्नता है। वस्तुतः एक ही राग और भाव हैं। बुधवार को यहां सीताराम की निकुंज अष्टयाम लीला के अंतर्गत वन बिहार, स्नान और शृंगार लीला का मंचन किया गया। गंगा दास, अनुराग दास परमहंस सहित अन्य संत उपस्थित रहे।
लीला का महत्व बताया
संत गोरेलाल पीठ वाले महाराज ने कुंज बिहारी के निर्देशन में आयोजित अष्ट याम लीला को रसिकों के लिए साधना का सार बताया। राधावल्लभ संप्रदाय के रसिक संत रसिक माधव दास ने कहा कि महोत्सव में अष्टयाम लीला के दर्शन के साथ ही निकुंज अष्टयाम लीला की रस चर्चा मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य के मुख से सुनने को जो अवसर मिला है यह सौभाग्य का विषय है।
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श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्र पीठाधीश्वर और मलूक पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राजेंद्रदास देवाचार्य ने बताया कि ऐसा आयोजन लगभग 225 वर्ष बाद हो रहा है। इससे पहले यह अयोध्या के कनकभवन में आयोजित किया गया था। कहा रसिक संतों की पदावली और छंदों को गहनता से सुनने के बाद कहीं भी यह भेद नहीं जान पड़ता कि सीताराम की अष्टयाम लीला और श्याम-श्याम में कोई भिन्नता है। वस्तुतः एक ही राग और भाव हैं। बुधवार को यहां सीताराम की निकुंज अष्टयाम लीला के अंतर्गत वन बिहार, स्नान और शृंगार लीला का मंचन किया गया। गंगा दास, अनुराग दास परमहंस सहित अन्य संत उपस्थित रहे।
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लीला का महत्व बताया
संत गोरेलाल पीठ वाले महाराज ने कुंज बिहारी के निर्देशन में आयोजित अष्ट याम लीला को रसिकों के लिए साधना का सार बताया। राधावल्लभ संप्रदाय के रसिक संत रसिक माधव दास ने कहा कि महोत्सव में अष्टयाम लीला के दर्शन के साथ ही निकुंज अष्टयाम लीला की रस चर्चा मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य के मुख से सुनने को जो अवसर मिला है यह सौभाग्य का विषय है।
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