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Mathura News: महिलाओं की सीटों पर पुरुषों का कब्जा
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मथुरा। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में महिला यात्रियों के लिए आरक्षित सीटें सिर्फ नाम के लिए है। वास्तविकता में इन सीट पर जो बैठ जाए फिर उसी का कब्जा है। महिलाओं द्वारा सीट खाली करने और नियमों की दुहाई देेने का भी पुरुषों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसा ही मामला मंगलवार सुबह भूतेश्वर बस स्टैंड पर देखने को मिला। जब आरक्षित सीट पर महिलाओं को नहीं बैठने दिया गया। मजबूरन महिलाओं को बस से उतरना पड़ा।
दोपहर लगभग 12:30 बजे मथुरा डिपो की बस संख्या यूपी 85 डीटी 1579 बस स्टैंड पर खड़ी थी। इसमें उत्तराखंड के खटीमा से आईं महिला यात्री अपने परिवार के साथ चढ़ीं। उन्हें आगरा जाना था जबकि बस की सीटें खचाखच भरी थीं। उन्होंने कंडक्टर से महिला सीट खाली कराने का आग्रह किया लेकिन कंडक्टर रणधीर सिंह ने हाथ खड़े कर दिए। कहा कि जहां जगह मिल जाए वहां बैठ जाएं। आगे सीट खाली होगी तो बैठा दिया जाएगा। महिलाओं ने आरक्षित सीट दिलवाने को कहा तो कंडक्टर ने उन्हें डपट दिया। कहा कि जहां बैठना है बैठ जाओ, हम किसी को जबरन सीट से नहीं हटाएंगे। सीट न मिलने से नाराज महिलाएं परिवार सहित बस से उतर गईं।
ये है नियम
परिवहन निगम के नियमानुसार सामान्य बस में 9 सीटें महिला यात्रियों के लिए आरक्षित होती हैं। इन पर आरक्षित का संदेश भी लिखा होता है। पुरुष यात्री इन सीटों पर बैठ सकते हैं, बशर्ते कोई महिला यात्री आती है तो उन्हें सीट खाली करनी होगी। ये जिम्मेदारी कंडक्टर की होती है कि महिला बस में खड़ी हो और उनकी आरक्षित सीट पर पुरुष बैठे हैं तो उसे खाली करवाएं।
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वर्जन
हमने कंडक्टर से सीट खाली करवाने का आग्रह किया था, उन्होंने आप आगे देख लीजिए कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। -शशिकला
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वर्जन
आरक्षित सीटें सिर्फ कागजों में ही हैं, व्यवहार में उनका पालन नहीं होता है। कंडक्टर का रवैया देखकर बहुत बुरा लगा। -पार्वती सिंह
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वर्जन
अगर महिला सीट पर कोई पुरुष यात्री बैठा है तो उसे खुद ही उठ जाना चाहिए। कंडक्टर आग्रह कर सकता है।
मदन मोहन शर्मा, एआरएम
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दोपहर लगभग 12:30 बजे मथुरा डिपो की बस संख्या यूपी 85 डीटी 1579 बस स्टैंड पर खड़ी थी। इसमें उत्तराखंड के खटीमा से आईं महिला यात्री अपने परिवार के साथ चढ़ीं। उन्हें आगरा जाना था जबकि बस की सीटें खचाखच भरी थीं। उन्होंने कंडक्टर से महिला सीट खाली कराने का आग्रह किया लेकिन कंडक्टर रणधीर सिंह ने हाथ खड़े कर दिए। कहा कि जहां जगह मिल जाए वहां बैठ जाएं। आगे सीट खाली होगी तो बैठा दिया जाएगा। महिलाओं ने आरक्षित सीट दिलवाने को कहा तो कंडक्टर ने उन्हें डपट दिया। कहा कि जहां बैठना है बैठ जाओ, हम किसी को जबरन सीट से नहीं हटाएंगे। सीट न मिलने से नाराज महिलाएं परिवार सहित बस से उतर गईं।
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ये है नियम
परिवहन निगम के नियमानुसार सामान्य बस में 9 सीटें महिला यात्रियों के लिए आरक्षित होती हैं। इन पर आरक्षित का संदेश भी लिखा होता है। पुरुष यात्री इन सीटों पर बैठ सकते हैं, बशर्ते कोई महिला यात्री आती है तो उन्हें सीट खाली करनी होगी। ये जिम्मेदारी कंडक्टर की होती है कि महिला बस में खड़ी हो और उनकी आरक्षित सीट पर पुरुष बैठे हैं तो उसे खाली करवाएं।
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हमने कंडक्टर से सीट खाली करवाने का आग्रह किया था, उन्होंने आप आगे देख लीजिए कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। -शशिकला
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आरक्षित सीटें सिर्फ कागजों में ही हैं, व्यवहार में उनका पालन नहीं होता है। कंडक्टर का रवैया देखकर बहुत बुरा लगा। -पार्वती सिंह
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अगर महिला सीट पर कोई पुरुष यात्री बैठा है तो उसे खुद ही उठ जाना चाहिए। कंडक्टर आग्रह कर सकता है।
मदन मोहन शर्मा, एआरएम