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Mathura News: दवा के साथ अनुशासन से लगेगी शुगर-बीपी पर लगाम
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मथुरा। जिला अस्पताल के एनसीडी स्क्रीनिंग सेल में इन दिनों एक नई पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां मधुमेह (डायबिटीज) और हाइपरटेंशन (बीपी) की जांच कराने पहुंच रहे मरीजों को डॉक्टर पर्चे पर दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली अपनाने का चार्ट भी थमा रहे हैं।
अस्पताल परिसर में स्थित सेल में स्क्रीनिंग कर हेल्थ कार्ड के जरिए मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। प्राथमिकता इस बात को दी जा रही है कि मरीज दवा पर निर्भर होने के बजाय अपनी आदतों में सुधार करें। इस साल मार्च में मधुमेह के 481, हाइपरटेंशन के 371 व मधुमेह और हाइपरटेंशन दोनों से पीड़ित 270 मरीजों की स्क्रीनिंग कर परामर्श दिया गया।
हाइपरटेंशन के लिए नमक और मधुमेह के लिए चीनी के सीमित सेवन को पहली दवा बताया जा रहा है। डिब्बा बंद और जंक फूड के बजाय मौसमी फल और हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करने को कहा जा रहा है। स्क्रीनिंग सेंटर में मौजूद काउंसलर मरीजों को व्यायाम और योग के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
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प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल, तनाव मुक्त रहने और पर्याप्त नींद लेने, बीमारी को गंभीर होने से रोकने के लिए साल में एक बार स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी जा रही है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि यदि हम खान-पान और अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं तो मधुमेह और बीपी को दवाओं के बिना भी नियंत्रित किया जा सकता है। जिला अस्पताल के एनसीडी सेल में मरीजों की स्क्रीनिंग, दवाओं के साथ जीवनशैली में बदलाव के लिए कहा जा रहा है।
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अस्पताल परिसर में स्थित सेल में स्क्रीनिंग कर हेल्थ कार्ड के जरिए मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। प्राथमिकता इस बात को दी जा रही है कि मरीज दवा पर निर्भर होने के बजाय अपनी आदतों में सुधार करें। इस साल मार्च में मधुमेह के 481, हाइपरटेंशन के 371 व मधुमेह और हाइपरटेंशन दोनों से पीड़ित 270 मरीजों की स्क्रीनिंग कर परामर्श दिया गया।
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हाइपरटेंशन के लिए नमक और मधुमेह के लिए चीनी के सीमित सेवन को पहली दवा बताया जा रहा है। डिब्बा बंद और जंक फूड के बजाय मौसमी फल और हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करने को कहा जा रहा है। स्क्रीनिंग सेंटर में मौजूद काउंसलर मरीजों को व्यायाम और योग के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
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प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल, तनाव मुक्त रहने और पर्याप्त नींद लेने, बीमारी को गंभीर होने से रोकने के लिए साल में एक बार स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी जा रही है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि यदि हम खान-पान और अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं तो मधुमेह और बीपी को दवाओं के बिना भी नियंत्रित किया जा सकता है। जिला अस्पताल के एनसीडी सेल में मरीजों की स्क्रीनिंग, दवाओं के साथ जीवनशैली में बदलाव के लिए कहा जा रहा है।