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मथुरा के हाथियों को मिला एक नया साथी
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Thu, 09 Feb 2017 12:22 AM IST
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हाथ्ी
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जिले के चुरमुरा गांव स्थित ‘हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र’ में एक और हाथी आ गया है। वाइल्ड लाइफ की टीम इसे अंबेडकर नगर के गुसाईंगंज से मुक्त कराकर लाई है।
वाइल्ड लाइफ के सह संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि इसे अंबेडकर नगर के गुसाईंगंज से मुक्त कराया गया है। इसे मुक्त कराने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 36 घंटों की जद्दोजहद करनी पड़ी।
उसे बंधक बनाने वाले लोगों हर प्रकार से प्रताड़ित करते हुए मनमाने ढंग से उसका उपयोग तो करते ही थे, उसके लंबे दांतों को काटकर अच्छी खासी रकम भी बना चुके थे।
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एक विशेष एंबुलेंस के माध्यम से पशु विशेषज्ञों और हाथी केयर में प्रशिक्षित टीम की निगरानी में 700 किलोमीटर की यात्रा कर मथुरा के चुरमुरा गांव स्थित ‘हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र’ लाया गया। एनजीओ अब तक 24 हाथियों को अवैध कब्जेदारों से मुक्त करा चुका है।
इनमें से तीन मादा हाथी हरियाणा के ‘हाथी सेंटर’ पर रखी गई हैं। संस्था के अरिणीता शाण्डिल्य ने बताया कि तकरीबन साढे़ तीन टन (3500 किलो) वजनी, 50 वर्षीय दीर्घदंती नर हाथी से मनमाने तरीके से व्यावसायिक गतिविधियों, शादी-विवाहों, मेले, खेल-तमाशों, भिक्षावृत्ति जैसे कामों में किया जाता था।
इसके चलते उसके पैर, तलवे, कोहनी और पूंछ तक गंभीर रूप से घायल हैं। उनमें गंभीर जख्म बन गए हैं। वह आंशिक रूप से अंधा भी हो गया है।
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वाइल्ड लाइफ के सह संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि इसे अंबेडकर नगर के गुसाईंगंज से मुक्त कराया गया है। इसे मुक्त कराने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 36 घंटों की जद्दोजहद करनी पड़ी।
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उसे बंधक बनाने वाले लोगों हर प्रकार से प्रताड़ित करते हुए मनमाने ढंग से उसका उपयोग तो करते ही थे, उसके लंबे दांतों को काटकर अच्छी खासी रकम भी बना चुके थे।
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एक विशेष एंबुलेंस के माध्यम से पशु विशेषज्ञों और हाथी केयर में प्रशिक्षित टीम की निगरानी में 700 किलोमीटर की यात्रा कर मथुरा के चुरमुरा गांव स्थित ‘हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र’ लाया गया। एनजीओ अब तक 24 हाथियों को अवैध कब्जेदारों से मुक्त करा चुका है।
इनमें से तीन मादा हाथी हरियाणा के ‘हाथी सेंटर’ पर रखी गई हैं। संस्था के अरिणीता शाण्डिल्य ने बताया कि तकरीबन साढे़ तीन टन (3500 किलो) वजनी, 50 वर्षीय दीर्घदंती नर हाथी से मनमाने तरीके से व्यावसायिक गतिविधियों, शादी-विवाहों, मेले, खेल-तमाशों, भिक्षावृत्ति जैसे कामों में किया जाता था।
इसके चलते उसके पैर, तलवे, कोहनी और पूंछ तक गंभीर रूप से घायल हैं। उनमें गंभीर जख्म बन गए हैं। वह आंशिक रूप से अंधा भी हो गया है।