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मथुरा: डाटा फॉरवर्ड करने के लिए दबंग जनप्रतिनिधियों के धमकने लगे फोन
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मथुरा। छात्रवृत्ति घोटाले के नाम पर करोड़ों रुपये डकारने वाली शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने अपनी शिक्षण संस्थाओं का डाटा फॉरवर्ड करने के लिए संबंधित अधिकारियोें पर दबाव बढ़ा दिया है।
उनके द्वारा संबंधित अधिकारियों से फोन तक किया जा रहा है। इस दबाव से अधिकारी परेशान हैं। जानकारी रहे समाज कल्याण अधिकारी का काम देख रहे समाज कल्याण अधिकारी (विकास) रमाशंकर गुप्ता का स्थानांतरण उन्नाव हो गया है। उनके स्थान पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह को चार्ज दिया गया है।
कुल लगभग ५४० शिक्षण संस्थाओं में से १०० शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने समाज कल्याण विभाग में अपना डाटा अपडेट तक नहीं किया। बची हुई ४४० शिक्षण संस्थाओं में से मात्र २९८ शिक्षण संस्थाओं ने ही अपना डाटा अपडेट किया। उनके द्वारा सीट और फीस की जानकारी दी।
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करीब १४२ शिक्षण संस्थाओं द्वारा अभी तक कोई डाटा नहीं दिया। दूसरे चरण की डाटा फॉरवर्ड करने की आखिरी तारीख 20 दिसंबर थी। तीसरे चरण की तारीख अभी तय की जानी है। यदि इस तारीख तक भी विभाग द्वारा इन शिक्षण संस्थाओं का डाटा फॉरवर्ड नहीं किया तो यह शिक्षण संस्थाएं छात्रवृत्ति से वंचित रह सकती हैं।
इसी भय से इन शिक्षण संस्थाओं के संचालक विभाग पर दबाव बना रहे हैं। एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के जनप्रतिनिधि द्वारा विभाग के अधिकारियों से फोन करके दबाव बनाया जा रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात हुए अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी चार्ज लिया है। फिलहाल कक्षा ९,१० का डाटा फॉरवर्ड किया जा रहा है। डाटा फॉरवर्डिंग के लिए बहुत दबाव है, कुछ लोग दबाव बना रहे हैं।
दबाव न मानने वाले अधिकारी को कराया रिलीव
छात्रवृत्ति घोटाले के पहले दिन से आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले जिला समाज कल्याण अधिकारी रहे रमाकांत गुप्ता को घोटालेे में लिप्त शिक्षण संस्था संचालकों ने दबाव में लेने का प्रयास किया था। उनको कई प्रकार की धमकियां भी दी गईं परंतु जब उनके द्वारा गलत तरीके से डाटा फॉरवर्ड नहीं किया गया तो राजनीतिक दबाव बनाकर अधिकारी को रिलीव करा दिया गया।
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उनके द्वारा संबंधित अधिकारियों से फोन तक किया जा रहा है। इस दबाव से अधिकारी परेशान हैं। जानकारी रहे समाज कल्याण अधिकारी का काम देख रहे समाज कल्याण अधिकारी (विकास) रमाशंकर गुप्ता का स्थानांतरण उन्नाव हो गया है। उनके स्थान पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह को चार्ज दिया गया है।
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कुल लगभग ५४० शिक्षण संस्थाओं में से १०० शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने समाज कल्याण विभाग में अपना डाटा अपडेट तक नहीं किया। बची हुई ४४० शिक्षण संस्थाओं में से मात्र २९८ शिक्षण संस्थाओं ने ही अपना डाटा अपडेट किया। उनके द्वारा सीट और फीस की जानकारी दी।
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करीब १४२ शिक्षण संस्थाओं द्वारा अभी तक कोई डाटा नहीं दिया। दूसरे चरण की डाटा फॉरवर्ड करने की आखिरी तारीख 20 दिसंबर थी। तीसरे चरण की तारीख अभी तय की जानी है। यदि इस तारीख तक भी विभाग द्वारा इन शिक्षण संस्थाओं का डाटा फॉरवर्ड नहीं किया तो यह शिक्षण संस्थाएं छात्रवृत्ति से वंचित रह सकती हैं।
इसी भय से इन शिक्षण संस्थाओं के संचालक विभाग पर दबाव बना रहे हैं। एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के जनप्रतिनिधि द्वारा विभाग के अधिकारियों से फोन करके दबाव बनाया जा रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात हुए अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी चार्ज लिया है। फिलहाल कक्षा ९,१० का डाटा फॉरवर्ड किया जा रहा है। डाटा फॉरवर्डिंग के लिए बहुत दबाव है, कुछ लोग दबाव बना रहे हैं।
दबाव न मानने वाले अधिकारी को कराया रिलीव
छात्रवृत्ति घोटाले के पहले दिन से आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले जिला समाज कल्याण अधिकारी रहे रमाकांत गुप्ता को घोटालेे में लिप्त शिक्षण संस्था संचालकों ने दबाव में लेने का प्रयास किया था। उनको कई प्रकार की धमकियां भी दी गईं परंतु जब उनके द्वारा गलत तरीके से डाटा फॉरवर्ड नहीं किया गया तो राजनीतिक दबाव बनाकर अधिकारी को रिलीव करा दिया गया।