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मथुरा: श्रीराधारमण की श्यामसुंदर की...ओ मैंने छवि देखी...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Dec 2021 07:45 PM IST
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mathura: shreeraadhaaraman kee shyaamasundar kee...o mainne chhavi dekhee...
राधारमण मंदिर में शीतकालीन निकुंज में विराजे ठाकुरजी। - फोटो : VRINDAVAN
वृंदावन (मथुरा)। श्रीराधारमण की श्यामसुंदर की...ओ मैंने छवि देखी शीश पै उनके मुकुट विराजै...कुंडल की छवि न्यारी सखी...एवं कभी भूलूं ना याद तुम्हारी रटूं, तेरा नाम मैं सांझ-सवेरे... राधारमण मेरे... राधारमण मेरे... जैसे भजनों को सुन वातावरण श्रीराधारमणमय हो गया। सुप्रसिद्ध भजनों की धुन पर भक्त एवं श्रद्धालु अपने आप को रोक नहीं पाए और ठाकुरजी के समक्ष भावविभोर होकर नृत्य कर रहे थे।
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सायंकालीन संध्या आरती पश्चात अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सुप्रसिद्ध गायक गोविंद भार्गव ने राग सेवा की। श्रीचैतन्य प्रेम संस्थान के तत्वावधान में श्रीराधारमण मंदिर शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित किया गया। सेवा महोत्सव द्वाद्वश-भक्ति-रस-निकुंज के अंतर्गत वीर भक्ति रस की निकुंज में विराजित होकर ठा. राधारमण देवजू संग प्रियाजू भक्तों को दर्शन दिए।
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शीतऋतु के दृष्टिगत ठा. राधारमण लाल ने हरे रंग की जैकेट सहित श्वेत पत्र एवं स्वर्ण मोती के नूतन आभूषण धारण किए। प्रियाजू ने श्वेत का लहंगा धारण किया, प्रभु की मनमोहक छवि के आगे श्रद्धालु बरबस नजर आए एवं एकटक आंखों से अपने प्रभु एवं प्रियाजू को निहार रहे थे।
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शीतलहर को देखते हुए ठाकुरजी एवं प्रियाजू को तपिश देने के लिए चांदी की अंगीठी भी निवेदित की एवं प्रात:काल में गरम-गरम खिचड़ी का भोग ठा. राधारमण लाल के सम्मुख निवेदित किया गया।

वीर भक्ति रस निकुंज की महिमा बताते हुए आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि वीर भक्ति जो भक्ति है, वह हारे का हरिनाम नहीं है, जो पूर्ण समर्पण करने की भावना जहां पर है, वो ही वीर है, समर्पण भाव ही यहां भक्ति रस है। शीतऋतु के अंतर्गत सखी-सहचरियों द्वारा हल्दी एवं रोली का विशेष प्रयोग करके वीर भक्ति रस की निकुंज तैयार की गई है, जिससे कि ठाकुरजी को शीतलहर से बचाया जा सके एवं निकुंज का आनंद भी लिया जा सके। वेणुगोपाल गोस्वामी, अभिनव गोस्वामी, सुवर्ण गोस्वामी आदि उपस्थित थे।
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