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मथुरा: पक्षकार का रिवीजन स्वीकार, विपक्ष करेगा बहस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jul 2022 08:39 PM IST
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Mathura: Revision accepted by the party, the opposition will argue
मथुरा। कोर्ट से बाहर आते अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह एवं अधिवक्ता राजेंद्र माहेश्वरी व अन्य। - फोटो : VRINDAVAN
मथुरा। सोमवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन ज्योति सिंह की अदालत में ठाकुर केशवदेव बनाम इंतजामिया कमेटी केस चलने योग्य है या नहीं, इस बिंदु पर सुनवाई नहीं हो सकी। पक्षकार सिविल कोर्ट के इस बिंदु पर दिए गए निर्णय के खिलाफ जिला जज की अदालत रिवीजन में चले गए। जहां उनका रिवीजन स्वीकार कर लिया गया। रिवीजन में ११ अगस्त को सुनवाई होगी। जबकि सिविल जज की अदालत में ७/११ सीपीसी पर सुनवाई जारी रहेगी।
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सिविल जज सीनियर डिवीजन के आदेश के तहत ठाकुर केशवदेव बनाम इंतजामिया कमेटी केस में सोमवार को तीन बजे से अदालत में ७/११ सीपीसी के तहत केस सुनने योग्य है या नहीं इस बिंदु पर सुनवाई होनी थी परंतु पक्षकार अधिवक्ता राजेंद्र माहेश्वरी व अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने अदालत मेें स्थगन प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि उनके द्वारा जिला जज की अदालत मेें कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ जिला जज राजीव भारती की अदालत में रिवीजन दाखिल किया है। उसमें पारित होने वाले आदेश की प्रतीक्षा की जाए।
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उधर, जिला जज की अदालत से रिवीजन की सुनवाई एडीजे सप्तम संजय चौधरी की अदालत में हुई, जिसमें न्यायालय ने रिवीजन स्वीकार करते हुए विपक्ष को नोटिस देने को पक्षकार को पांच दिन का समय दिया है। एडीजे सप्तम न्यायालय ने अवर न्यायालय का रिकॉर्ड मंगा लिया है। इंतजामिया कमेटी के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि पक्षकार ने अदालत के आदेश की अवमानना करते हुए न्यायालय में सोमवार को स्थगन प्रार्थना पत्र दिया है। अब इस पर मंगलवार से फिर से केस सुनने योग्य है या नहीं इस बिंदु पर सुनवाई चलेगी।
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पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने जिला जज की अदालत में सिविल जज कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिवीजन दाखिल किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। न्यायालय द्वारा सिविल जज कोर्ट से पत्रावली भी तलब की गई है। इसलिए अवर न्यायालय में अब सुनवाई नहीं होगी। विपक्षीगण श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के अधिवक्ता मुकेश खंडेलवाल ने बताया कि अदालत मेें सोमवार को पक्षकार द्वारा स्थगन प्रार्थना पत्र दिए जाने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
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