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रौद्र भक्ति रस निकुंज में विराजे ठा. राधारमण लाल
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भक्तों को दर्शन देते राधा रमण लाल
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर श्री राधारमण मंदिर में चल रहे शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में ठा. राधारमण लाल ने अपनी प्रिया जी के संग लाल रंग की पोशाक एवं नूतन आभूषण धारण कर रौद्र भक्ति रस-निकुंज में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। महोत्सव के अंतर्गत जगमोहन में ठाकुरजी के दायीं एवं बायीं तरफ बने सौंफ के वृक्ष आकर्षित कर रहे थे।
कुंज की महिमा का वर्णन करते हुए आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि श्रीरूप गोस्वामी पाद द्वारा प्रदत्त भक्ति के 12 रसों के अंतर्गत ठा. राधारमण लाल आज रौद्र भक्ति रस निकुंज में विराजे हैं, शीतकालीन सेवा के अंतर्गत विभिन्न सूखी मेवाओं से युक्त श्रीजी की सखियों द्वारा रौद्र भक्ति रस निकुंज को भावस्वरूप सजाया गया है, जिसमें पीले एवं लाल रंग के वस्त्र की अद्भुत कारीगरी के मध्य सौंफ के वृक्ष एवं मखाने से द्वार, डोल एवं झूमर विशेष सजाया गया।
आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी ने बताया कि शरद ऋतु को देखते हुए ठा. राधारमण लाल को शीत लहर से बचाव के लिए एवं तपिश प्रदान करने के लिए हिना एवं केसर इत्रों का प्रयोग किया गया। सायंकाल राग सेवा ब्रज के सुविख्यात गायक पं. मदनगोपाल शर्मा ने दी, उनके साथ पखावज पर प्रस्तुति पं. कृष्णगोपाल शर्मा ने दी।
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उन्होंने श्रीराधारमण जू ब्यारू कीजैं... आदि पदों पर सुस्वर गायन किया, जिसे सुन भक्त एवं श्रद्धालु आत्मविभोर होकर गायन कर रहे थे। आगंतुकों का स्वागत आचार्य अभिनव गोस्वामी ने किया एवं शयन आरती आचार्य सुवर्ण गोस्वामी ने की।
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कुंज की महिमा का वर्णन करते हुए आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि श्रीरूप गोस्वामी पाद द्वारा प्रदत्त भक्ति के 12 रसों के अंतर्गत ठा. राधारमण लाल आज रौद्र भक्ति रस निकुंज में विराजे हैं, शीतकालीन सेवा के अंतर्गत विभिन्न सूखी मेवाओं से युक्त श्रीजी की सखियों द्वारा रौद्र भक्ति रस निकुंज को भावस्वरूप सजाया गया है, जिसमें पीले एवं लाल रंग के वस्त्र की अद्भुत कारीगरी के मध्य सौंफ के वृक्ष एवं मखाने से द्वार, डोल एवं झूमर विशेष सजाया गया।
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आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी ने बताया कि शरद ऋतु को देखते हुए ठा. राधारमण लाल को शीत लहर से बचाव के लिए एवं तपिश प्रदान करने के लिए हिना एवं केसर इत्रों का प्रयोग किया गया। सायंकाल राग सेवा ब्रज के सुविख्यात गायक पं. मदनगोपाल शर्मा ने दी, उनके साथ पखावज पर प्रस्तुति पं. कृष्णगोपाल शर्मा ने दी।
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उन्होंने श्रीराधारमण जू ब्यारू कीजैं... आदि पदों पर सुस्वर गायन किया, जिसे सुन भक्त एवं श्रद्धालु आत्मविभोर होकर गायन कर रहे थे। आगंतुकों का स्वागत आचार्य अभिनव गोस्वामी ने किया एवं शयन आरती आचार्य सुवर्ण गोस्वामी ने की।