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मथुरा: शिक्षण संस्थाओें की छात्रवृत्ति के भौतिक सत्यापन में फंसे अधिकारी
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मथुरा। करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की धमक से अधिकारी उबर नहीं पा रहे हैं। उनके द्वारा की जा रही जांच में फूंक-फूंक के कदम रखे जा रहे हैं। इसी के चलते २०२१-२२ मेें शासन द्वारा दी जाने वाली उच्च शिक्षण संस्थाओं की छात्रवृत्ति का सत्यापन करने वाले अधिकारी अभी तक जांच को पूरा नहीं कर सके हैं।
डीएम ने इन अधिकारियों से जल्द से जल्द सत्यापन रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
दरअसल, छात्रवृत्ति घोटाले में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी सहित कई कर्मचारियों को भी निलंबित किया गया था और वर्तमान में घोटाले की जांच कानपुर आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जा रही है। इसी दौरान जिन शिक्षण संस्थाओं छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था, उनका सत्यापन शासन ने मांगा। इस सत्यापन को पूरा करने के लिए ३९ एसडीएम व अन्य अधिकारियों की टीम लगी हुई है लेकिन अभी तक अधिकारी इस रिपोर्ट को नहीं दे सके हैं।
उधर, शासन द्वारा इस सत्यापन की रिपोर्ट को जल्द ही मांगी जा रही है। डीएम नवनीत चहल ने एक बैठक कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह एक सप्ताह में इस सत्यापन रिपोर्ट को पेश करें। प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी/जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देनी है।
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डीएम ने इन अधिकारियों से जल्द से जल्द सत्यापन रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
दरअसल, छात्रवृत्ति घोटाले में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी सहित कई कर्मचारियों को भी निलंबित किया गया था और वर्तमान में घोटाले की जांच कानपुर आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जा रही है। इसी दौरान जिन शिक्षण संस्थाओं छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था, उनका सत्यापन शासन ने मांगा। इस सत्यापन को पूरा करने के लिए ३९ एसडीएम व अन्य अधिकारियों की टीम लगी हुई है लेकिन अभी तक अधिकारी इस रिपोर्ट को नहीं दे सके हैं।
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उधर, शासन द्वारा इस सत्यापन की रिपोर्ट को जल्द ही मांगी जा रही है। डीएम नवनीत चहल ने एक बैठक कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह एक सप्ताह में इस सत्यापन रिपोर्ट को पेश करें। प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी/जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देनी है।
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