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मथुरा: अब दिल्ली वाली धर्मशाला को खुर्द बुर्द करने की तैयारी
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वृंदावन (मथुरा)। तीर्थ नगरी वृंदावन के बाग-बगीचे, तालाब, पोखर और मंदिरों की जमीन बिक्री के बाद अब भूमाफिया की नजर शहर की पुरानी धर्मशालाओं पर है।
बीते कुछ वर्षों में वृंदावन की कई प्राचीन और ट्रस्ट की धर्मशालाओं को बेचकर कॉलोनियां बना डाली गईं अब शहर की दिल्ली वाली धर्मशाला को बिक्री करने की तैयारी चल रही है।
पत्थरपुरा निवासी मयंक भारद्वाज ने जनपद न्यायाधीश के यहां सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 के अंतर्गत पत्थरपुरा स्थित लोक ट्रस्ट सेठ सूरजमल जयनारायण ट्रस्ट व उससे लगी दिल्ली वाली धर्मशाला की सुरक्षा के लिए वाद प्रस्तुत किया है।
वाद पत्र में कहा गया है कि लोक ट्रस्ट सेठ सूरजमल जयनारायण ट्रस्ट व उससे लगी दिल्ली वाली धर्मशाला के नाम से जानी जाती है, उक्त ट्रस्ट लोक ट्रस्ट है व लोक हितार्थ चैरिटी उद्देश्य है। धर्मशाला को सैटलर ट्रस्टीगणों द्वारा कायम किया गया था व जिनकी किसी भी व्यक्ति को अंतरण करने पर रोक लगा दी थी लेकिन प्रतिवादीगण जो वर्तमान में ट्रस्टीगण हैं ट्रस्ट की संपत्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं व मिस मैनेजमेंट कर रहे हैं।
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वादी मयंक भारद्वाज ने प्राचीन दिल्ली वाली धर्मशाला के क्रय-विक्रय, अंतरण, हस्तांतरण पर रोक लगाने के लिए जनपद न्यायाधीश के यहां गुहार लगाई है। जनपद न्यायाधीश द्वारा धारा 92 के अंतर्गत वाद पत्र को स्वीकृति प्रदान करते हुए उक्त प्रकरण की सुनवाई 18 जुलाई को नियत की है।
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बीते कुछ वर्षों में वृंदावन की कई प्राचीन और ट्रस्ट की धर्मशालाओं को बेचकर कॉलोनियां बना डाली गईं अब शहर की दिल्ली वाली धर्मशाला को बिक्री करने की तैयारी चल रही है।
पत्थरपुरा निवासी मयंक भारद्वाज ने जनपद न्यायाधीश के यहां सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 के अंतर्गत पत्थरपुरा स्थित लोक ट्रस्ट सेठ सूरजमल जयनारायण ट्रस्ट व उससे लगी दिल्ली वाली धर्मशाला की सुरक्षा के लिए वाद प्रस्तुत किया है।
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वाद पत्र में कहा गया है कि लोक ट्रस्ट सेठ सूरजमल जयनारायण ट्रस्ट व उससे लगी दिल्ली वाली धर्मशाला के नाम से जानी जाती है, उक्त ट्रस्ट लोक ट्रस्ट है व लोक हितार्थ चैरिटी उद्देश्य है। धर्मशाला को सैटलर ट्रस्टीगणों द्वारा कायम किया गया था व जिनकी किसी भी व्यक्ति को अंतरण करने पर रोक लगा दी थी लेकिन प्रतिवादीगण जो वर्तमान में ट्रस्टीगण हैं ट्रस्ट की संपत्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं व मिस मैनेजमेंट कर रहे हैं।
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वादी मयंक भारद्वाज ने प्राचीन दिल्ली वाली धर्मशाला के क्रय-विक्रय, अंतरण, हस्तांतरण पर रोक लगाने के लिए जनपद न्यायाधीश के यहां गुहार लगाई है। जनपद न्यायाधीश द्वारा धारा 92 के अंतर्गत वाद पत्र को स्वीकृति प्रदान करते हुए उक्त प्रकरण की सुनवाई 18 जुलाई को नियत की है।