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मनरेगा में बने दो जॉबकार्ड, हुआ दोहरा भुगतान
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मथुरा। गांवों में जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, प्रधान स्तर से हो रहीं अनियमितताएं भी सामने आ रही हैं। सरकार द्वारा ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए वृहद स्तर पर चलाई जा रही मनरेगा योजना में कई ब्लॉक में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। जिसे लेकर जांच कर रहे अधिकारी तक लापरवाही बरत रहे हैं। मामला मथुरा ब्लॉक के गांव मोरा का है। यहां पर मनरेगा के तहत कराए गए कच्चे कामों में अनियमितताएं प्रकाश में आई हैं। गांव में एक ही काम के लिए एक ही ग्रामीण के दो-दो जॉबकार्ड बन गए। दहला काम किसी ने किया नहीं और पैसा किसी और को मिल गया। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब जिन मजदूरों ने काम किया, उनको पैसा नहीं मिला।
शिकायत करने वाले ग्रामीणों में बने सिंह, सुरेश, दीपक, नेहना, शंकर, किशन सिंह, संदीप शामिल हैं। यहां तक कि बैंक में भी इस योजना के संचालन करने वाले अधिकारियों ने हेराफेरी कर डाली। इसमें भी काम करने वाले ग्रामीणों के स्थान पर दूसरे लोगों के बैंक खातों में पैसा डलवा दिया गया। सोमवार को फिर पीड़ित मजदूरों द्वारा सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ से शिकायत की गई। इस शिकायत की जांच एक माह पहले परियोजना निदेशक बलराम कुमार को दी गई। लेकिन जांच जस की तस पड़ी रह गई। न तो परियोजना निदेशक ने रिपोर्ट दी और न ही कोई कार्रवाई हो सकी। जिसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश है। परियोजना निदेशक बलराम कुमार ने बताया कि जांच अभी चल रही है। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई तय होगी।
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शिकायत करने वाले ग्रामीणों में बने सिंह, सुरेश, दीपक, नेहना, शंकर, किशन सिंह, संदीप शामिल हैं। यहां तक कि बैंक में भी इस योजना के संचालन करने वाले अधिकारियों ने हेराफेरी कर डाली। इसमें भी काम करने वाले ग्रामीणों के स्थान पर दूसरे लोगों के बैंक खातों में पैसा डलवा दिया गया। सोमवार को फिर पीड़ित मजदूरों द्वारा सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ से शिकायत की गई। इस शिकायत की जांच एक माह पहले परियोजना निदेशक बलराम कुमार को दी गई। लेकिन जांच जस की तस पड़ी रह गई। न तो परियोजना निदेशक ने रिपोर्ट दी और न ही कोई कार्रवाई हो सकी। जिसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश है। परियोजना निदेशक बलराम कुमार ने बताया कि जांच अभी चल रही है। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई तय होगी।
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