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मथुरा: पाला से सरसों की फसल प्रभावित, किसान परेशान
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गांव सुरवारी में फसल पर जमा पाला। संवाद
- फोटो : KOSI
कोसीकलां (मथुरा)। सर्दी के मौसम में पाला व शीतलहर के कहर से किसान परेशान हैं। सरसों के अलावा सब्जियों की खेती प्रभावित हो रही है। फसल को पाला से बचाने को किसान हर संभव प्रयास कर रहा है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को पाला से बचाव के उपाय बता रहे हैं।
किसानों का कहना है पाला से फसल के उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। किसानों की एक समस्या खत्म होती है तो दूसरी समस्या खड़ी हो जाती है। इन दिनों खेतों में किसानों ने रबी की फसल बोई है। सर्दी का कहर दिनोंदिन बढ़ रहा है। किसानों को पाला व शीतलहर की चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि फसलों को लेकर किसानों को बुवाई से लेकर कटाई तक परेशानियां ही बनी रहती हैं। पाला से सरसों व चना सहित सभी फूल वाली फसलें खराब हो जाएंगी। पैदावार में भी कमी रहेगी। इसके अलावा टमाटर, आलू की फसल भी खराब होने की उम्मीद है। हालांकि किसान अपने अनुसार फसल को बचाने की जुगत कर रहे हैं।
राजागढ़ी के किशन का कहना है कि पाला गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है, लेकिन फूल वाली फसलों के लिए नुकसानदायक है। नगरिया के कंहीराम, राधारमन, सुखदेव का कहना था खेती करना दिनोंदिन मुश्किल भरा होता जा रहा है। बुवाई से लेकर कटाई तक एक न एक समस्या बनी रहती है। कभी सूखा, कभी बारिश, तो कभी पाला किसानों पर आफत बनकर टूटता है। जिससे मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता।
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पाला पड़ने से फसल पर क्या होता है प्रभाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एलआर राजपूत ने बताया कि पाला पड़ने से पौधों की कोशिकाओं के रिक्त स्थानों में उपलब्ध जलीय घोल ठोस बर्फ में तब्दील हो जाते हैं। इसके चलते कार्बन डाईऑक्साइड, ऑक्सीजन, वाष्प उत्सर्जन तथा अन्य दैहिक क्रियाओं की विनिमय प्रक्रिया में बाधा पड़ती है और पौधे नष्ट हो जाते हैं। पाला से पत्तियां एवं फूल मुरझा जाते हैं और पौधे बदरंग हो जाते हैं। छोटे-छोटे दाने बनते ही फूल झड़ जाते हैं और उत्पादन प्रभावित होती है। आलू के साथ साथ मटर, टमाटर, मसूर, सरसों, धनिया, बैगन सहित अन्य रबी फसलों के लिए भी पाला नुकसानदायक है।
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किसानों का कहना है पाला से फसल के उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। किसानों की एक समस्या खत्म होती है तो दूसरी समस्या खड़ी हो जाती है। इन दिनों खेतों में किसानों ने रबी की फसल बोई है। सर्दी का कहर दिनोंदिन बढ़ रहा है। किसानों को पाला व शीतलहर की चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि फसलों को लेकर किसानों को बुवाई से लेकर कटाई तक परेशानियां ही बनी रहती हैं। पाला से सरसों व चना सहित सभी फूल वाली फसलें खराब हो जाएंगी। पैदावार में भी कमी रहेगी। इसके अलावा टमाटर, आलू की फसल भी खराब होने की उम्मीद है। हालांकि किसान अपने अनुसार फसल को बचाने की जुगत कर रहे हैं।
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राजागढ़ी के किशन का कहना है कि पाला गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है, लेकिन फूल वाली फसलों के लिए नुकसानदायक है। नगरिया के कंहीराम, राधारमन, सुखदेव का कहना था खेती करना दिनोंदिन मुश्किल भरा होता जा रहा है। बुवाई से लेकर कटाई तक एक न एक समस्या बनी रहती है। कभी सूखा, कभी बारिश, तो कभी पाला किसानों पर आफत बनकर टूटता है। जिससे मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता।
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पाला पड़ने से फसल पर क्या होता है प्रभाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एलआर राजपूत ने बताया कि पाला पड़ने से पौधों की कोशिकाओं के रिक्त स्थानों में उपलब्ध जलीय घोल ठोस बर्फ में तब्दील हो जाते हैं। इसके चलते कार्बन डाईऑक्साइड, ऑक्सीजन, वाष्प उत्सर्जन तथा अन्य दैहिक क्रियाओं की विनिमय प्रक्रिया में बाधा पड़ती है और पौधे नष्ट हो जाते हैं। पाला से पत्तियां एवं फूल मुरझा जाते हैं और पौधे बदरंग हो जाते हैं। छोटे-छोटे दाने बनते ही फूल झड़ जाते हैं और उत्पादन प्रभावित होती है। आलू के साथ साथ मटर, टमाटर, मसूर, सरसों, धनिया, बैगन सहित अन्य रबी फसलों के लिए भी पाला नुकसानदायक है।